13 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी के बाद CM हिरासत और इंटरनेट बैन पर एमनेस्टी ने उठाए सवाल

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी के बाद CM हिरासत और इंटरनेट बैन पर एमनेस्टी ने उठाए सवाल

सारांश

पाकिस्तान की संघीय सरकार ने खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन लागू कर PTI सरकार निलंबित की, CM सोहेल अफरीदी को हिरासत में लिया और इंटरनेट काटा। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इसे मानवाधिकारों के विरुद्ध बताया — यह पाकिस्तान के लोकतांत्रिक संकट की नई और गंभीर कड़ी है।

मुख्य बातें

पाकिस्तान की संघीय सरकार ने रविवार को खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल घोषित कर PTI की प्रांतीय सरकार निलंबित की।
मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी और मंत्रिमंडल के कई सदस्यों को कथित तौर पर सोमवार को हिरासत में लिया गया।
प्रांत में इंटरनेट सेवाएँ बाधित की गईं; गवर्नर हाउस में आगजनी और कई शहरों में पुलिस कार्रवाई की खबरें आईं।
एमनेस्टी इंटरनेशनल के उपनिदेशक बाबू राम पंत ने हिरासत और इंटरनेट बाधा को 'गंभीर सवाल' उठाने वाला बताया।
राज्य मंत्री तलाल चौधरी ने कहा कि हिरासत में लिए गए नेताओं पर लंबित मामलों में मुकदमा चलाया जाएगा।
PTI ने इसे 'खतरनाक मिसाल' और निर्वाचित नेतृत्व के विरुद्ध 'राजनीतिक प्रताड़ना' करार दिया।

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में संघीय सरकार द्वारा आपातकाल लागू किए जाने के बाद मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी समेत कई वरिष्ठ नेताओं की कथित हिरासत और प्रांतव्यापी इंटरनेट सेवाओं पर रोक की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय चिंता को जन्म दिया है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने 13 अक्टूबर को इन घटनाक्रमों पर गंभीर आपत्ति जताते हुए पाकिस्तानी संघीय अधिकारियों से जवाबदेही सुनिश्चित करने की माँग की है।

आपातकाल की पृष्ठभूमि और गवर्नर शासन

पाकिस्तान की संघीय सरकार ने रविवार को खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल की घोषणा करते हुए गवर्नर शासन लागू कर दिया। इस निर्णय के परिणामस्वरूप जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के नेतृत्व वाली प्रांतीय सरकार को निलंबित कर दिया गया।

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सोमवार को मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी और मंत्रिमंडल के अनेक सदस्यों को हिरासत में लिया गया। पाकिस्तान के गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री तलाल चौधरी ने कहा कि हिरासत में लिए गए नेताओं के विरुद्ध लंबित कानूनी मामलों में आरोप तय किए जाएँगे और मुकदमा चलाया जाएगा।

एमनेस्टी की आपत्ति और मानवाधिकार चिंताएँ

एमनेस्टी इंटरनेशनल, दक्षिण एशिया के उपनिदेशक बाबू राम पंत ने आपातकाल की घोषणा और प्रांत में सशस्त्र बलों की तैनाती की निंदा करते हुए कहा, 'मुख्यमंत्री समेत प्रमुख नेताओं की मनमानी हिरासत और पूरे प्रांत में इंटरनेट सेवाओं में बाधा की खबरें इन आपातकालीन उपायों के अनुपात पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।'

पंत ने स्पष्ट किया कि आपातकालीन शक्तियाँ केवल अत्यंत सीमित परिस्थितियों में — जब देश का अस्तित्व संकट में हो — लागू की जा सकती हैं। उन्होंने कहा, 'आपातकालीन शक्तियाँ मानवाधिकारों के दमन, असहमति की आवाज दबाने या सत्ता को केंद्रित करने का खुला अधिकार नहीं देतीं।'

सैन्य तैनाती और पुराने रिकॉर्ड पर सवाल

पंत ने चेतावनी दी कि सेना की तैनाती से खैबर पख्तूनख्वा का और अधिक सैन्यीकरण होने तथा बल के गैरकानूनी इस्तेमाल की आशंका बढ़ सकती है। उन्होंने आतंकवाद विरोधी अभियानों के दौरान जबरन गुमशुदगी और न्यायेतर हत्याओं के मामलों में सशस्त्र बलों के पुराने रिकॉर्ड का भी उल्लेख किया।

संगठन ने पाकिस्तानी अधिकारियों से अपील की कि सामान्य कानून-व्यवस्था के लिए सैन्यकर्मियों का उपयोग न किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि सैन्य बल अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों एवं मानकों का पालन करते हुए जवाबदेह बने रहें।

हिंसा और गवर्नर हाउस में आगजनी

आपातकाल लागू होने के बाद प्रांत में राजनीतिक तनाव चरम पर पहुँच गया। सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में गवर्नर हाउस आग की लपटों में घिरा दिखाई दिया। अन्य वीडियो में प्रांत के विभिन्न शहरों में पुलिस द्वारा गोलीबारी और आँसू गैस के गोले दागे जाने के दृश्य सामने आए। यह ऐसे समय में आया है जब प्रांत में पहले से ही सुरक्षा स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई थी।

विपक्ष की प्रतिक्रिया और PTI का रुख

रविवार को विपक्षी दलों ने गवर्नर शासन लागू करने के संघीय सरकार के फैसले को 'लोकतंत्र पर हमला' करार देते हुए कड़ा विरोध जताया। उन्होंने कानूनी और जन आंदोलन के माध्यम से इस निर्णय को चुनौती देने की बात कही।

पाकिस्तानी अखबार डॉन के अनुसार, PTI ने एक बयान में चेतावनी दी कि यह फैसला एक खतरनाक मिसाल कायम करता है और इसे प्रांत के निर्वाचित नेतृत्व को कमजोर करने के उद्देश्य से की गई राजनीतिक प्रताड़ना बताया। गौरतलब है कि PTI खैबर पख्तूनख्वा में एकमात्र प्रमुख दल है जो केंद्र की सत्तारूढ़ गठबंधन के विरोध में है।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पाकिस्तान का सर्वोच्च न्यायालय इस आपातकाल की संवैधानिक वैधता पर क्या रुख अपनाता है और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच संघीय सरकार अपनी नीति में कोई बदलाव करती है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

इसका जवाब संघीय सरकार ने नहीं दिया। मुख्यधारा की कवरेज जो चूकती है वह यह है कि यह घटनाक्रम PTI बनाम संघीय सरकार की लड़ाई से परे है — यह पाकिस्तान में प्रांतीय स्वायत्तता और संघीय ढाँचे की विश्वसनीयता पर सीधा प्रहार है, जिसके दूरगामी संवैधानिक परिणाम हो सकते हैं।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल क्यों लगाया गया?
पाकिस्तान की संघीय सरकार ने रविवार को खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल घोषित कर गवर्नर शासन लागू किया, जिसके बाद PTI की प्रांतीय सरकार निलंबित कर दी गई। संघीय सरकार ने इसके पीछे कानून-व्यवस्था की स्थिति का हवाला दिया, जबकि PTI ने इसे राजनीतिक प्रताड़ना बताया।
मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी को क्यों हिरासत में लिया गया?
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रांतीय सरकार निलंबित होने के बाद मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी और मंत्रिमंडल के कई सदस्यों को सोमवार को हिरासत में लिया गया। राज्य मंत्री तलाल चौधरी ने कहा कि उन पर लंबित कानूनी मामलों में आरोप तय कर मुकदमा चलाया जाएगा।
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने पाकिस्तान से क्या माँगें रखी हैं?
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने पाकिस्तानी अधिकारियों से सामान्य कानून-व्यवस्था के लिए सैन्यकर्मियों का उपयोग न करने, आपातकालीन उपायों की स्वतंत्र निगरानी सुनिश्चित करने और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों का पालन करने की माँग की है। संगठन ने इंटरनेट बाधा और मनमानी हिरासत को तत्काल समाप्त करने की भी अपील की।
खैबर पख्तूनख्वा में इंटरनेट बैन का क्या असर हुआ?
आपातकाल लागू होने के बाद प्रांत में इंटरनेट सेवाएँ बाधित कर दी गईं, जिससे नागरिकों और पत्रकारों की सूचना तक पहुँच सीमित हो गई। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इसे आपातकालीन उपायों के अनुपात पर गंभीर सवाल उठाने वाला बताया।
PTI ने गवर्नर शासन पर क्या प्रतिक्रिया दी?
पाकिस्तानी अखबार डॉन के अनुसार, PTI ने एक बयान में इस फैसले को 'खतरनाक मिसाल' और प्रांत के निर्वाचित नेतृत्व को कमजोर करने की 'राजनीतिक प्रताड़ना' बताया। विपक्षी दलों ने भी इसे लोकतंत्र पर हमला करार देते हुए कानूनी और जन आंदोलन के माध्यम से चुनौती देने की घोषणा की।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. कल
  3. 2 दिन पहले
  4. 2 दिन पहले
  5. 3 दिन पहले
  6. 1 सप्ताह पहले
  7. 4 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले