एमनेस्टी इंटरनेशनल की पाकिस्तान को चेतावनी: PTM कार्यकर्ता फरीदुल्लाह अफरीदी के अपहरण पर जवाब दो
सारांश
मुख्य बातें
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने 27 मई 2026 को पाकिस्तान में पश्तून तहफ्फुज मूवमेंट (PTM) के कार्यकर्ताओं के जबरन गायब किए जाने की बढ़ती घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ने इसे राज्य प्राधिकारियों द्वारा संचालित एक व्यापक दमन अभियान का हिस्सा करार दिया है।
फरीदुल्लाह अफरीदी का कथित अपहरण
एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार, PTM सदस्य फरीदुल्लाह अफरीदी को 18 मई की शाम पेशावर, खैबर पख्तूनख्वा से कथित तौर पर अगवा किया गया। संगठन ने बताया कि परिवार द्वारा शिकायत दर्ज कराने के बावजूद पुलिस ने न तो प्राथमिकी (FIR) दर्ज की और न ही किसी जाँच की शुरुआत की।
संगठन ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'फरीदुल्लाह अफरीदी पहले PTM कार्यकर्ता नहीं हैं जिन्हें बिना किसी सुराग के गायब किया गया हो। यह मामला PTM कार्यकर्ताओं के जबरन गायब किए जाने और राज्य प्राधिकारियों की कार्रवाई के चिंताजनक पैटर्न को दर्शाता है।'
पाकिस्तानी अधिकारियों से माँगें
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने पाकिस्तान सरकार से तीन स्पष्ट माँगें रखी हैं — अफरीदी के कथित अपहरण की तुरंत स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जाँच कराई जाए; यदि वे सरकारी हिरासत में हैं तो उनकी मौजूदगी सार्वजनिक की जाए और उन्हें तत्काल रिहा किया जाए; तथा जिम्मेदार व्यक्तियों को अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के तहत जवाबदेह ठहराया जाए।
पिछले मामले और चिंताजनक पैटर्न
यह ऐसे समय में आया है जब पिछले महीने भी एमनेस्टी इंटरनेशनल ने खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहैल अफरीदी को पत्र लिखकर PTM कार्यकर्ताओं हनीफ पश्तीन और नूर उल्लाह तरीन के गायब होने पर गंभीर चिंता जताई थी। दोनों को 12 नवंबर 2025 को पेशावर स्थित प्रांतीय विधानसभा परिसर से निकलते समय पुलिस हिरासत में लिया गया था।
गौरतलब है कि संगठन ने चेतावनी दी थी कि दोनों कार्यकर्ताओं की गुप्त हिरासत से यातना, दुर्व्यवहार और अन्य गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों का खतरा बढ़ गया है।
PTM पर दमन का व्यापक आरोप
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने आरोप लगाया है कि PTM और उसके सदस्यों के खिलाफ पाकिस्तान में मनमानी गिरफ्तारी, उत्पीड़न, धमकी और जबरन गायब किए जाने की घटनाएँ लगातार सामने आ रही हैं। संगठन के अनुसार यह कोई अकेली या अपवाद-स्वरूप घटना नहीं है, बल्कि PTM कार्यकर्ताओं के खिलाफ राज्य-स्तरीय दमन के एक सुनियोजित पैटर्न का हिस्सा है।
आगे क्या होगा
अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद पाकिस्तान सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। मानवाधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि यदि स्वतंत्र जाँच नहीं हुई तो यह मामला संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के समक्ष भी उठाया जा सकता है।