खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर हाउस को लगाई आग, इमरजेंसी के बाद PTI नेताओं की गिरफ्तारी
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा (केपी) में 12 अक्टूबर 2026 को गवर्नर हाउस में आग लगा दी गई, यह घटना संघीय सरकार द्वारा प्रांत में इमरजेंसी लागू किए जाने के बाद भड़की हिंसा और व्यापक राजनीतिक अशांति के बीच हुई। इमरजेंसी की घोषणा के साथ ही जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के नेतृत्व वाली प्रांतीय सरकार निलंबित हो गई।
गवर्नर हाउस में आग और सोशल मीडिया वीडियो
सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो क्लिप में गवर्नर हाउस आग की लपटों में घिरा दिखाई दे रहा है। अन्य फुटेज में प्रांत के विभिन्न शहरों में पुलिस को गोलाबारी करते देखा जा सकता है। हालाँकि, आग लगने की सटीक परिस्थितियाँ, वास्तविक क्षति और हताहतों की संख्या के बारे में तत्काल कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं हो सकी।
रिपोर्टों के अनुसार, रविवार को इमरजेंसी के विरोध में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे। पूरे प्रांत में प्रमुख चौराहों और राजमार्गों पर सुरक्षा बल तैनात किए गए, जबकि स्वाबी में मोबाइल फोन और पीटीसीएल इंटरनेट सेवाएँ निलंबित कर दी गईं।
PTI नेताओं की गिरफ्तारी और हिरासत
पाकिस्तानी अखबार 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार को केपी में बड़े पैमाने पर सरकारी एजेंसियों की कार्रवाई के चलते PTI का इस्लामाबाद मार्च बाधित हो गया। इस दौरान पुलिस ने स्वाबी में 59 और खैबर जिले में 6 PTI कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया।
रिपोर्टों के अनुसार, पदच्युत मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी और PTI के प्रांतीय अध्यक्ष जुनैद अकबर को भी हिरासत में लिया गया। एक अलग घटनाक्रम में, पूर्व मुख्यमंत्री अली अमीन खान गंडापुर ने कहा कि उन्हें डेरा इस्माइल खान स्थित उनके आवास पर नजरबंद कर दिया गया है।
विपक्ष की तीखी प्रतिक्रिया
विपक्षी दलों ने केपी में गवर्नर रूल लगाने के केंद्र सरकार के फैसले को लोकतंत्र पर हमला करार देते हुए कड़ा विरोध किया। उन्होंने अदालत और सार्वजनिक मंचों पर इस कदम को चुनौती देने का संकल्प व्यक्त किया।
पाकिस्तानी अखबार 'डॉन' की रिपोर्ट के मुताबिक, PTI ने एक बयान में चेतावनी दी कि इस फैसले ने एक 'खतरनाक मिसाल' कायम की है और इसे प्रांत की चुनी हुई नेतृत्व को कमजोर करने के इरादे से किया गया राजनीतिक उत्पीड़न बताया। PTI ने सोहेल अफरीदी और जुनैद अकबर की तत्काल रिहाई की माँग करते हुए केंद्र सरकार से उनकी हिरासत के कानूनी आधार और आरोपों का खुलासा करने की अपील की।
टीटीएपी का विरोध और आगे की स्थिति
तहरीक-ए-तहफुज आयिन-ए-पाकिस्तान (TTAP) ने भी अदालत, संसद और सार्वजनिक मंचों पर गवर्नर रूल का विरोध करने की घोषणा की। संगठन ने दावा किया कि PTI पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार विरोध प्रदर्शन जारी रखेगी।
यह संकट ऐसे समय में उभरा है जब पाकिस्तान पहले से ही गंभीर आर्थिक चुनौतियों और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है। गौरतलब है कि केपी पाकिस्तान का एकमात्र प्रांत था जहाँ PTI की सरकार सत्ता में थी और अब उसे निलंबित किए जाने से राजनीतिक संघर्ष और गहरा होने की आशंका है।