14 अक्टूबर 2026
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खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन के विरोध में PTI प्रदर्शन हिंसक, पुलिस फायरिंग में एक की मौत

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खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन के विरोध में PTI प्रदर्शन हिंसक, पुलिस फायरिंग में एक की मौत

सारांश

पाकिस्तान में खैबर पख्तूनख्वा पर संघीय कब्जे के खिलाफ PTI का विरोध खून में बदल गया — बारा बाज़ार में पुलिस फायरिंग, नादरा दफ्तर में आगज़नी और 15 पुलिसकर्मी कथित तौर पर बंधक। इमरान खान की अनुपस्थिति में उनकी पार्टी और संघीय सत्ता के बीच टकराव अपने चरम पर है।

मुख्य बातें

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन के विरोध में PTI का प्रदर्शन 14 अक्टूबर 2026 को हिंसक हुआ।
पुलिस फायरिंग में 1 व्यक्ति की मौत की खबर; PTI विधायक इकबाल अफरीदी के अनुसार 11 कार्यकर्ता घायल — स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई।
हयाताबाद मेडिकल कॉम्प्लेक्स में एक दर्जन से अधिक घायल भर्ती, जिनमें 4 पुलिसकर्मी शामिल।
प्रदर्शनकारियों ने नादरा कार्यालय में आग लगाई; 15 पुलिसकर्मियों को कथित तौर पर बंधक बनाया।
पुलिस ने 50 लोगों को गिरफ्तार किया।
संघीय सरकार के आदेश से PTI नेता सोहेल अफरीदी की मुख्यमंत्री की भूमिका निलंबित।

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में गवर्नर शासन लागू किए जाने के विरोध में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के प्रदर्शन मंगलवार, 14 अक्टूबर 2026 को हिंसक हो गए, जिसमें स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार पुलिस की गोलीबारी में एक व्यक्ति की मौत हो गई और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए। संघीय सरकार द्वारा रविवार को आपातकाल की घोषणा और प्रांत में गवर्नर शासन लागू किए जाने के बाद से राजनीतिक तनाव तेज़ी से बढ़ा है।

मुख्य घटनाक्रम

खैबर जिले के पुलिस अधिकारी वकार अहमद के अनुसार, मंगलवार दोपहर PTI के सैकड़ों समर्थक बारा बाज़ार इलाके में एकत्र हुए। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आँसू गैस के गोले दागे और कथित तौर पर गोलियाँ भी चलाईं, जिसके बाद प्रदर्शनकारी कुछ देर के लिए पीछे हट गए।

करीब 90 मिनट बाद तनाव फिर भड़क उठा, जब प्रांतीय विधानसभा सदस्य अब्दुल गनी के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों का एक बड़ा जत्था मीनार चौक से बारा चौक की ओर मार्च करता हुआ पहुँचा। वकार अहमद ने बताया कि चौराहे पर पहुँचने के बाद प्रदर्शनकारियों ने सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाया और यातायात संकेतकों में आग लगा दी।

नादरा कार्यालय में आगज़नी और पुलिसकर्मी बंधक

प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने बारा बाज़ार स्थित राष्ट्रीय डेटाबेस एवं पंजीकरण प्राधिकरण (नादरा) के एक कार्यालय में आग लगा दी। इसके अलावा, आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने तहसील नगरपालिका कार्यालय के भीतर 15 पुलिसकर्मियों को बंद कर दिया और उनके हथियार तथा वर्दियाँ कथित तौर पर अपने कब्जे में ले लीं। हालाँकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

हताहतों की स्थिति

PTI विधायक इकबाल अफरीदी ने दावा किया कि हिंसा में पार्टी के 11 कार्यकर्ता घायल हुए और एक की मौत हो गई। पाकिस्तानी अखबार 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' के अनुसार इन हताहतों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। वहीं, पाकिस्तानी अखबार 'डॉन' ने प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से कम से कम पाँच प्रदर्शनकारियों के घायल होने की जानकारी दी। पेशावर के हयाताबाद मेडिकल कॉम्प्लेक्स के एक डॉक्टर ने 'डॉन' को बताया कि अस्पताल में एक दर्जन से अधिक घायलों को लाया गया, जिनमें चार पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। पुलिस ने अशांति फैलाने के कथित आरोप में 50 लोगों को गिरफ्तार भी किया।

सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में सड़क पर गोलीबारी और हथियारबंद सुरक्षाकर्मियों द्वारा लोगों का पीछा करने के दृश्य दिखाए जा रहे हैं, वहीं एक अन्य वीडियो में पुलिसकर्मियों को लाठियों से पिटाई करते दिखाया गया है। हालाँकि, इन वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

यह हिंसा ऐसे समय में हुई है जब संघीय सरकार ने रविवार को खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन लागू कर दिया, जिससे जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी PTI के नेतृत्व वाली प्रांतीय सरकार का कामकाज निलंबित हो गया। PTI नेता सोहेल अफरीदी की प्रांत के मुख्यमंत्री के रूप में भूमिका भी इस फैसले के बाद प्रभावहीन हो गई है। गौरतलब है कि खैबर पख्तूनख्वा पाकिस्तान का एकमात्र बड़ा प्रांत था जहाँ PTI की सरकार थी।

आगे क्या

स्थिति अभी भी अस्थिर बनी हुई है और प्रांत में सुरक्षाबलों की तैनाती जारी है। PTI ने गवर्नर शासन को असंवैधानिक बताते हुए विरोध जारी रखने का संकल्प लिया है। विश्लेषकों के अनुसार, यदि संवाद की जगह दमन की नीति अपनाई गई तो तनाव और गहरा हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और उस जनादेश को रद्द करना विपक्ष को संवैधानिक चैनलों से बाहर धकेलने जैसा है। पुलिस फायरिंग, आगज़नी और बंधक बनाने की घटनाएँ बताती हैं कि जब राजनीतिक अभिव्यक्ति के रास्ते बंद होते हैं, तो हिंसा का रास्ता खुल जाता है — यह पाकिस्तान के इतिहास में बार-बार देखा गया पैटर्न है।
RashtraPress
14 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन क्यों लागू किया गया?
पाकिस्तान की संघीय सरकार ने रविवार को खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन लागू कर दिया, जिससे PTI की प्रांतीय सरकार का कामकाज निलंबित हो गया। इस फैसले के बाद PTI नेता सोहेल अफरीदी की मुख्यमंत्री के रूप में भूमिका भी प्रभावहीन हो गई है।
खैबर पख्तूनख्वा में हिंसा में कितने लोग हताहत हुए?
PTI विधायक इकबाल अफरीदी के अनुसार एक कार्यकर्ता की मौत हुई और 11 घायल हुए, हालाँकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। हयाताबाद मेडिकल कॉम्प्लेक्स में एक दर्जन से अधिक घायल भर्ती हुए, जिनमें चार पुलिसकर्मी शामिल हैं।
बारा बाज़ार में PTI प्रदर्शन के दौरान क्या हुआ?
14 अक्टूबर को PTI के सैकड़ों समर्थक बारा बाज़ार में एकत्र हुए जहाँ पुलिस ने आँसू गैस और कथित तौर पर गोलियाँ चलाईं। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने नादरा कार्यालय में आग लगाई और कथित तौर पर तहसील नगरपालिका कार्यालय में 15 पुलिसकर्मियों को बंधक बना लिया।
इमरान खान की पार्टी PTI का इस संकट में क्या रुख है?
PTI ने गवर्नर शासन को असंवैधानिक बताते हुए इसके विरोध में सड़क पर उतरने का फैसला किया है। जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी इसे अपनी प्रांतीय सरकार को जबरन हटाने की कोशिश बता रही है।
क्या खैबर पख्तूनख्वा में हालात और बिगड़ सकते हैं?
स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है और प्रांत में सुरक्षाबलों की तैनाती जारी है। विश्लेषकों के अनुसार, संवाद की जगह दमन की नीति अपनाई जाती रही तो टकराव और गहरा हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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