क्या पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में गोलीबारी ने एक बार फिर से हिंसा का खतरा बढ़ा दिया?

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क्या पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में गोलीबारी ने एक बार फिर से हिंसा का खतरा बढ़ा दिया?

सारांश

खैबर पख्तूनख्वा में हाल की गोलीबारी ने एक बार फिर से क्षेत्र में बढ़ती हिंसा को उजागर किया है। इस घटना ने जिरगा सदस्यों पर हमले की एक लंबी परंपरा को दर्शाया है। क्या यह स्थिति और बिगड़ने वाली है?

Key Takeaways

  • खैबर पख्तूनख्वा में हिंसा का खतरा बढ़ रहा है।
  • जिरगा सदस्यों पर हमले की घटनाएं जारी हैं।
  • पुलिस ने हमलावरों की गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई की है।
  • स्थानीय समुदाय में असुरक्षा का माहौल बन रहा है।
  • आतंकवाद की घटनाएं बढ़ रही हैं।

पेशावर, १३ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में हिंसक घटनाओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार को पुलिस वाहन को आईईडी से उड़ाने की घटना के महज २४ घंटे बाद मंगलवार को बन्नू में अंधाधुंध गोलीबारी हुई, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई। स्थानीय मीडिया के अनुसार, मारे गए लोग जिरगा के सदस्य थे।

जिओ न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित गुलबदीन लुंडई इलाके में एक जिरगा (पश्तून समुदायों में एक पारंपरिक सभा जो विवादों का समाधान करती है) से लौट रहे थे, तभी उन पर हमला हुआ। घटना के बाद, पुलिस ने शवों को जिला मुख्यालय अस्पताल पहुंचाया।

पुलिस ने बताया कि हमलावरों को पकड़ने और स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इलाके में तलाशी अभियान शुरू किया गया है।

यह घटना खैबर पख्तूनख्वा में धमाकों और गोलीबारी की नई लहर के बीच हुई है। एक दिन पहले, प्रांत के टैंक जिले में गोमल बाजार रोड पर एक इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) विस्फोट में पुलिस की बख्तरबंद वाहन के परखच्चे उड़ गए थे। इस हमले में सात पुलिसकर्मी मारे गए थे।

मारे गए पुलिसकर्मियों की पहचान गोमल बाजार पुलिस स्टेशन के एचएचओ इशाक अहमद खान, एडिशनल एसएचओ शेर असलम, ड्राइवर अब्दुल मजीद, और एलीट फोर्स के जवान अरशद अली, शौकत अली, हजरत अली और एहसानुल्लाह के रूप में हुई। मारे गए राहगीर की पहचान नहीं हो पाई थी।

जिरगा सदस्यों के खिलाफ हिंसा की एक समान घटना पिछले साल हुई थी। २१ नवंबर को बन्नू के होवेड इलाके में अज्ञात हमलावरों ने सात लोगों को गोली मार दी थी।

यह घटना पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी इलाकों में बढ़ती हिंसा की कड़ी है, जहां कई चरमपंथी समूह सक्रिय हैं।

पुलिसवालों पर यह नवीनतम हमला खैबर पख्तूनख्वा के लक्की मरवत और बन्नू जिलों में अनजान हमलावरों की फायरिंग की दो अलग-अलग घटनाओं में चार पुलिसवालों के मारे जाने के एक हफ्ते बाद हुआ है। लक्की मरवत में, सराय नौरंग शहर में अनजान मोटरसाइकिल सवार अज्ञात हमलावरों ने ट्रैफिक पुलिसवालों पर फायरिंग की थी, जिसमें तीन अधिकारी मारे गए थे।

इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) के डायरेक्टर जनरल लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने ६ जनवरी को अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया था कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने २०२५ में देश भर में ७५,१७५ आईबीओ (खुफिया आधारित अभियान) किए थे।

इसका ब्यौरा देते हुए उन्होंने कहा कि केपी में १४,६५८ आईबीओ, बलूचिस्तान में ५८,७७८, जबकि देश के बाकी हिस्सों में १,७३९ ऑपरेशन चलाए गए थे।

लेफ्टिनेंट जनरल चौधरी ने कहा था कि पिछले साल देश भर में ऐसी ५,३९७ घटनाएं रिपोर्ट की गईं। इनमें से ३,८११ घटनाएं केपी में, १,५५७ बलूचिस्तान में, और देश के दूसरे हिस्सों में २९ घटनाएं रिपोर्ट की गईं।

उन्होंने इन सभी हमलों को आतंकवादियों की कारस्तानी बताते हुए दावा किया था कि इसके पीछे अफगान आतंकियों का हाथ रहा है।

Point of View

हमें खैबर पख्तूनख्वा में बढ़ती हिंसा की गहराई से जांच करने की आवश्यकता है। यह क्षेत्र कई चरमपंथी समूहों का गढ़ बनता जा रहा है और ऐसे में समाज की सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।
NationPress
08/03/2026

Frequently Asked Questions

क्या खैबर पख्तूनख्वा में सुरक्षा की स्थिति सुधर रही है?
नहीं, हाल की घटनाएं इस बात की पुष्टि करती हैं कि सुरक्षा की स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है।
जिरगा सदस्य कौन होते हैं?
जिरगा सदस्य पश्तून समुदायों में विवादों का निपटारा करने के लिए पारंपरिक सभा में शामिल होते हैं।
क्या पुलिस ने हमलावरों को पकड़ने के लिए कोई कार्रवाई की है?
हाँ, पुलिस ने हमलावरों को पकड़ने के लिए तलाशी अभियान शुरू किया है।
क्या पाकिस्तान में आतंकवाद की घटनाएं बढ़ रही हैं?
हाँ, हाल के वर्षों में आतंकवाद की घटनाओं में वृद्धि हुई है, विशेषकर खैबर पख्तूनख्वा में।
इस घटना का प्रभाव स्थानीय समुदाय पर क्या होगा?
इस घटना का प्रभाव स्थानीय समुदाय में भय और असुरक्षा बढ़ाने का होगा।
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