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खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी: अधिवक्ताओं ने बताया 'अलोकतांत्रिक', पीटीआई ने की कड़ी निंदा

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खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी: अधिवक्ताओं ने बताया 'अलोकतांत्रिक', पीटीआई ने की कड़ी निंदा

सारांश

पाकिस्तान में खैबर पख्तूनख्वा के 12 जिलों में इमरजेंसी और गवर्नर शासन लागू होते ही वकील और विपक्ष सड़क पर उतर आए। PTI चेयरमैन गोहर अली खान ने इसे 'राजनीतिक भूल' बताया, जबकि दो बड़ी बार एसोसिएशनों ने 'काला दिवस' का एलान कर दिया — यह पाकिस्तान के बढ़ते संवैधानिक संकट की नई कड़ी है।

मुख्य बातें

पाकिस्तान सरकार ने खैबर पख्तूनख्वा के 12 जिलों में इमरजेंसी और गवर्नर शासन लागू किया; राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने कैबिनेट सिफारिश को मंजूरी दी।
SHCBA और KBA ने इसे 'लोकतंत्र विरोधी' बताते हुए 'काला दिवस' मनाने का एलान किया।
KBA ने सोमवार को कार्य बहिष्कार और आम बैठक बुलाई।
PTI चेयरमैन गोहर अली खान ने एक्स पर इसे 'गंभीर राजनीतिक भूल और अलोकतांत्रिक कदम' बताया।
खान ने संघीय सरकार से 'कुछ दिनों में फैसला वापस लेने' की अपील की, अन्यथा 'भारी राजनीतिक और आर्थिक नुकसान' की चेतावनी दी।

पाकिस्तान में सिंध हाई कोर्ट बार एसोसिएशन (SHCBA) और कराची बार एसोसिएशन (KBA) ने खैबर पख्तूनख्वा (KP) प्रांत के 12 जिलों में इमरजेंसी और गवर्नर शासन लागू करने के संघीय सरकार के फैसले की तीखी आलोचना की है। दोनों बार एसोसिएशनों ने इस कदम को 'लोकतंत्र विरोधी' करार दिया और घोषणा की कि समस्त अधिवक्ता इसके विरोध में 'काला दिवस' मनाएंगे। यह आपातकाल पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी द्वारा कैबिनेट की सिफारिशों को मंजूरी दिए जाने के बाद लागू किया गया।

मुख्य घटनाक्रम

पाकिस्तानी दैनिक 'डॉन' की रिपोर्टों के अनुसार, SHCBA ने प्रशासन से लोगों के बुनियादी अधिकारों का सम्मान करने और लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल करने हेतु ठोस कदम उठाने की अपील की। KBA ने एलान किया कि अधिवक्ता सोमवार को कोई आधिकारिक कार्य नहीं करेंगे और इमरजेंसी व गवर्नर शासन पर चर्चा के लिए एक आम बैठक बुलाई गई है।

एसोसिएशन ने सभी राजनीतिक दलों से खैबर पख्तूनख्वा के लोगों के जनादेश का सम्मान करने की माँग करते हुए आग्रह किया कि ऐसा कोई कदम न उठाया जाए जिससे राजनीतिक अस्थिरता उत्पन्न हो या लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का विश्वास डगमगाए।

पीटीआई की प्रतिक्रिया

पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ (PTI) के चेयरमैन गोहर अली खान ने रविवार को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए इस कदम को 'राजनीतिक भूल और अलोकतांत्रिक' बताया। उन्होंने लिखा, "हम प्रांत में इमरजेंसी लागू करने की कड़ी निंदा करते हैं और इस कदम को पूरी तरह से खारिज करते हैं। यह बेहद चिंताजनक और गंभीर राजनीतिक गलती और अलोकतांत्रिक कदम है — लोग अपने अधिकारों के खिलाफ ऐसे कदमों को कभी स्वीकार नहीं करेंगे।"

खान ने तर्क दिया कि खैबर पख्तूनख्वा के लोगों का जनादेश उनका संवैधानिक और कानूनी अधिकार है और प्रांतीय स्वायत्तता को कमजोर करके या केंद्र एवं प्रांत के बीच टकराव पैदा करके शांति स्थापित नहीं की जा सकती।

आतंकवाद बनाम राजनीतिक दमन का तर्क

गोहर अली खान ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद को समाप्त करने के उद्देश्य पर कोई मतभेद नहीं है; किंतु उन्होंने आरोप लगाया कि आतंकवाद विरोधी अभियान को जनता की आवाज़ दबाने, राजनीतिक मकसद साधने और प्रांत के संवैधानिक अधिकारों को सीमित करने के बहाने के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

उन्होंने एक्स पर आगे लिखा, "प्रांतों को कमजोर करके संघ को मजबूत नहीं किया जा सकता। समस्याओं का समाधान जोर जबरदस्ती, टकराव और असाधारण उपायों में नहीं, बल्कि राजनीतिक समझदारी, संविधान की सर्वोच्चता, सार्थक बातचीत और व्यावहारिक कदमों में है।"

फैसले पर पुनर्विचार की अपील

खान ने संघीय सरकार से आग्रह किया कि वह 'अहंकार' छोड़कर जमीनी हकीकत को समझे और "इस फैसले को कुछ दिनों में वापस लिया जा सकता है" — ऐसा कहते हुए उन्होंने चेताया कि अन्यथा देश को 'भारी राजनीतिक और आर्थिक नुकसान' उठाना पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि "राजनीतिक फैसलों पर पुनर्विचार करना कमजोरी की नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हित में समझदारी की निशानी है।"

गौरतलब है कि PTI और वकील समुदाय की यह तीखी प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब पाकिस्तान पहले से ही गहरे राजनीतिक और आर्थिक संकट से जूझ रहा है। खैबर पख्तूनख्वा में आतंकवादी घटनाओं की बढ़ती संख्या को केंद्र सरकार ने इस असाधारण कदम का आधार बताया है, लेकिन विपक्षी दलों और कानूनी बिरादरी का मानना है कि यह राजनीतिक प्रेरणा से उठाया गया कदम है।

आने वाले दिनों में वकील संघों की आम बैठकें, PTI की संभावित कानूनी चुनौती और संसदीय बहस तय करेंगे कि क्या यह गवर्नर शासन टिकाऊ साबित होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

किंतु 12 जिलों में एक साथ आपातकाल की व्यापकता और उसके तत्काल राजनीतिक लाभ पर सवाल उठना स्वाभाविक है। वकील समुदाय की एकजुट आवाज़ — जो पाकिस्तान में पहले भी मुशर्रफ युग में न्यायपालिका की बहाली का मोर्चा बन चुकी है — इस बार भी सांकेतिक राजनीतिक भार रखती है। असली परीक्षा यह होगी कि संसद और न्यायपालिका इस कदम की समीक्षा कब और कैसे करते हैं।
RashtraPress
12 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी क्यों लागू की गई?
पाकिस्तान की संघीय सरकार ने खैबर पख्तूनख्वा के 12 जिलों में आतंकवादी गतिविधियों का हवाला देते हुए इमरजेंसी और गवर्नर शासन लागू किया। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने कैबिनेट की सिफारिश पर इसे मंजूरी दी।
PTI और वकील इसका विरोध क्यों कर रहे हैं?
PTI चेयरमैन गोहर अली खान का कहना है कि यह कदम खैबर पख्तूनख्वा के लोगों के जनादेश और प्रांतीय स्वायत्तता के खिलाफ है। SHCBA और KBA का तर्क है कि यह फैसला लोकतंत्र विरोधी है और बुनियादी संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।
'काला दिवस' क्या है और वकील क्या करेंगे?
कराची बार एसोसिएशन ने सोमवार को सभी आधिकारिक कानूनी कार्यों का बहिष्कार कर 'काला दिवस' मनाने का एलान किया है। इसके साथ ही इमरजेंसी और गवर्नर शासन पर चर्चा के लिए एक आम बैठक भी बुलाई गई है।
गोहर अली खान ने एक्स पर क्या कहा?
गोहर अली खान ने एक्स पर लिखा कि इमरजेंसी एक 'गंभीर राजनीतिक गलती और अलोकतांत्रिक कदम' है। उन्होंने चेताया कि प्रांतों को कमजोर करके संघ को मजबूत नहीं किया जा सकता और सरकार से इस फैसले पर कुछ ही दिनों में पुनर्विचार करने की अपील की।
क्या खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी वापस ली जा सकती है?
PTI के अनुसार यह फैसला वापस लिया जा सकता है और उन्होंने इसकी माँग की है। हालाँकि संघीय सरकार ने अब तक कोई संकेत नहीं दिया है; PTI ने हर संवैधानिक, कानूनी और लोकतांत्रिक मंच पर इसे चुनौती देने की बात कही है।
राष्ट्र प्रेस
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