खैबर पख्तूनख्वा में 48 घंटों में इमरजेंसी की आशंका, PML-N नेता ने 'बड़े फैसले' के दिए संकेत
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान की संघीय सरकार ने खैबर पख्तूनख्वा (केपी) प्रांत में आपातकाल या गवर्नर शासन लागू करने की संभावित स्थिति से निपटने की तैयारियाँ पूरी कर ली हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 10 अक्टूबर 2026 को मिली जानकारी के मुताबिक अगले 48 घंटों में कोई बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया जा सकता है। हालाँकि, अंतिम फैसला सरकार और विपक्षी प्रतिनिधिमंडलों के बीच जारी बातचीत के नतीजे पर निर्भर करेगा।
मुख्य घटनाक्रम
पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) के नेता दानियाल चौधरी ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि अगले 48 घंटों में 'बड़े फैसले' लिए जाने के संकेत हैं। उनके इस बयान के बाद प्रांत में राजनीतिक उथलपुथल को लेकर अटकलें और तेज हो गई हैं।
पाकिस्तानी मीडिया आउटलेट जियो न्यूज़ ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि प्रांत में व्यापक प्रशासनिक फेरबदल की तैयारी की जा रही है। इसमें उपायुक्तों और सचिवों की स्तर पर बदलाव के साथ-साथ क्षेत्रीय एवं जिला पुलिस अधिकारियों की नई नियुक्तियों की सूची तैयार करना भी शामिल है।
12 जिलों में आपातकाल का प्रस्ताव
रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान की केंद्र सरकार खैबर पख्तूनख्वा के 12 जिलों में प्रारंभिक चरण में आपातकाल लागू करने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। गौरतलब है कि अभी तक किसी भी अंतिम निर्णय की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यह स्थिति ऐसे समय में उत्पन्न हुई है जब पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) पार्टी अध्यक्ष की रिहाई और 'संविधान बचाने' की मुहिम के तहत पूरे प्रदेश में लगातार सातवें दिन प्रदर्शन कर रही है।
मुख्यमंत्री और PTI नेतृत्व की बैठक
खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने लोगों के बीच दावा किया है कि वे 13 अक्टूबर को एक अहम फैसला लेंगे। इसके अलावा कहा जा रहा है कि PTI का शीर्ष नेतृत्व भी मुख्यमंत्री से जल्द मुलाकात करने वाला है।
रिपोर्टों के अनुसार, PTI अध्यक्ष बैरिस्टर गौहर अली खान सहित पार्टी के वरिष्ठ नेता इस बैठक में शामिल हो सकते हैं। बैठक में मौजूदा राजनीतिक स्थिति, केंद्र सरकार की ओर से मिले संदेशों और प्रस्तावित लॉन्ग मार्च की तैयारियों पर चर्चा होने की संभावना है।
केंद्र बनाम प्रांत: राजनीतिक खींचतान
यह ध्यान देने योग्य है कि खैबर पख्तूनख्वा में फिलहाल PTI की सरकार है, जबकि केंद्र में PML-N के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार सत्ता में है। ऐसे में केंद्र और प्रांतीय नेतृत्व के बीच जारी राजनीतिक टकराव के बीच आपातकाल या गवर्नर शासन की आशंका पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति में एक नया मोड़ ला सकती है।
आलोचकों का कहना है कि इस प्रकार का कदम संघीय ढाँचे पर गंभीर सवाल खड़े करेगा और पाकिस्तान में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को और कमज़ोर करेगा। अगले कुछ घंटों में होने वाली बातचीत और बैठकें तय करेंगी कि पाकिस्तान का राजनीतिक संकट किस दिशा में आगे बढ़ता है।