खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी पर विचार कर रही शहबाज सरकार: पाकिस्तानी मंत्री तारिक फजल चौधरी
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के संसदीय कार्यमंत्री तारिक फजल चौधरी ने बुधवार, 30 सितंबर 2026 को दावा किया कि शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली संघीय सरकार खैबर पख्तूनख्वा (केपी) में संविधान के अनुच्छेद 232 के तहत आपातकाल (इमरजेंसी) लगाने पर 'गंभीरता से विचार' कर रही है। मंत्री के अनुसार, प्रांत में तेज़ी से बिगड़ती सुरक्षा स्थिति और आतंकवाद को रोकने में केपी सरकार की कथित विफलता इस विचार के पीछे मुख्य कारण हैं।
मंत्री का बयान और आधार
इस्लामाबाद में संसद भवन के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए चौधरी ने कहा, 'सरकार केपी में इमरजेंसी लगाने पर गंभीरता से विचार कर रही है, क्योंकि प्रांत में आतंकवाद तेज़ी से बढ़ा है।' उन्होंने यह भी कहा कि 'केपी सरकार आतंकवाद को रोकने के संघीय सरकार के प्रयासों में बाधा बन गई थी।' मंत्री के अनुसार, कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिम्मेदार सुरक्षाकर्मी अपनी जान गँवा रहे हैं।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और पीटीआई का लॉन्ग मार्च
यह बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) 4 अक्टूबर को इस्लामाबाद की ओर बड़े लॉन्ग मार्च की तैयारी कर रही है। पार्टी ने यह मार्च पहले 27 सितंबर को निर्धारित किया था, जिसे बाद में 4 अक्टूबर तक के लिए स्थगित कर दिया गया। पीटीआई अपने जेल में बंद संस्थापक और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई और संवैधानिक सर्वोच्चता की 'बहाली' की माँग कर रही है।
गौरतलब है कि केपी में पीटीआई की सरकार है, जो संघीय सरकार की प्रमुख विरोधी पार्टी भी है। ऐसे में संघीय सरकार द्वारा इमरजेंसी के विचार को राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील माना जा रहा है।
सरकार की राजनीतिक कीमत चुकाने की तैयारी
चौधरी ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित इमरजेंसी का निर्णय पीटीआई के साथ राजनीतिक मतभेदों के कारण नहीं बल्कि सुरक्षा कारणों से लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि संघीय सरकार एक बड़े राष्ट्रीय उद्देश्य के लिए किसी भी राजनीतिक परिणाम का सामना करने को तैयार है।
बलूचिस्तान से तुलना और पीपीपी का समर्थन
मंत्री ने बलूचिस्तान से तुलना करते हुए कहा कि वहाँ भी आतंकवाद है, लेकिन वहाँ के मुख्यमंत्री इसे रोकने के लिए ठोस कदम उठा रहे हैं, जो केपी में नहीं हो रहा। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) ने हमेशा आतंकवाद का पूरी ताकत से मुकाबला किया है और यदि केपी में इमरजेंसी लगाई जाती है, तो पीपीपी सरकार का साथ देगी।
आगे क्या होगा
फिलहाल संघीय सरकार ने इमरजेंसी लगाने की कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है। शहबाज सरकार ने कहा है कि 4 अक्टूबर के प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। इस घटनाक्रम से आने वाले दिनों में पाकिस्तान की राजनीतिक और सुरक्षा स्थिति और जटिल होने की संभावना है।