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क्या पाकिस्तान की एंटी-टेररिज्म कोर्ट ने केपी के सीएम अफरीदी को भगोड़ा घोषित किया?

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क्या पाकिस्तान की एंटी-टेररिज्म कोर्ट ने केपी के सीएम अफरीदी को भगोड़ा घोषित किया?

सारांश

इस्लामाबाद में, एंटी-टेररिज्म कोर्ट ने खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी को भगोड़ा घोषित कर दिया है। यह निर्णय दो लंबित मामलों के आधार पर लिया गया है। क्या यह राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है?

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी को एंटी-टेररिज्म कोर्ट ने भगोड़ा घोषित किया।
कोर्ट ने 30 दिनों में पेश होने का आदेश दिया है।
पीटीआई के कई मंत्री भी इसी मामले में शामिल हैं।

इस्लामाबाद, 17 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने अपनी जिम्मेदारियों से भागने का निर्णय लिया है। यह बात इस देश की एंटी-टेररिज्म कोर्ट (एटीसी) के अनुसार है। उनके खिलाफ एक नहीं, बल्कि दो लंबित मामलों के चलते ये आदेश जारी किया गया है।

स्थानीय समाचारों के मुताबिक, यह कदम पीटीआई के संस्थापक इमरान खान के खिलाफ उठाई जा रही आवाज का नतीजा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, मुख्यमंत्री के साथ-साथ मंत्री मीना खान, शफी जान, अमजद अली और इकबाल अफरीदी को भी इसी मामलों में भगोड़ा घोषित किया गया है।

एटीसी के जज अबुल हसनात मुहम्मद जुल्करनैन ने पुलिस की अर्जी को स्वीकार करते हुए यह प्रक्रिया शुरू की। कोर्ट ने पांचों को 30 दिनों के अंदर पेश होने का निर्देश दिया और चेतावनी दी कि यदि वे ऐसा नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

कोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार, ये मामले 26 नवंबर, 2024 को हुए प्रदर्शनों से संबंधित हैं, जिसके लिए इस्लामाबाद के रमना पुलिस स्टेशन में एक फर्स्ट इंफॉर्मेशन रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज की गई थी। इन आरोपों की सुनवाई आतंकवाद निरोधक कानूनों के तहत की जा रही है।

पुलिस के सूत्रों ने बताया कि पीटीआई के विरोध प्रदर्शनों से जुड़े कई मामले लंबित हैं, और इस्लामाबाद में पीटीआई के लगभग 80 प्रतिशत विधानसभा सदस्यों को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। इस्लामाबाद पुलिस ने लगभग 70 पीटीआई सांसदों की पहचान की है जो विभिन्न मामलों में वांछित हैं।

अधिकारियों ने कहा कि मामलों का विवरण संकलित कर लिया गया है, और अधिकांश आरोपी सांसदों ने किसी भी अदालत से गिरफ्तारी से पहले जमानत नहीं ली है।

मामलों की जांच जारी है, और कोर्ट की 30 दिन की समय सीमा खत्म होने के बाद आगे की कार्रवाई होने की संभावना है।

सोहेल अफरीदी को अक्टूबर 2025 में अली अमीन गंदापुर की जगह केपी का मुख्यमंत्री बनाया गया था। पीटीआई के संस्थापक इमरान खान के निर्देश पर गंदापुर ने इस्तीफा दिया था, और अफरीदी को नया सीएम चुना गया। अफरीदी पीके-70 (खैबर) से पहली बार विधायक बने थे और प्रांतीय कैबिनेट में शामिल थे।

पीटीआई ने इसे राजनीतिक बदला बताया है, जबकि सरकारी पक्ष का कहना है कि कानून सभी के लिए समान है। यदि अफरीदी 30 दिनों में पेश नहीं होते, तो वे आधिकारिक रूप से भगोड़ा घोषित हो सकते हैं, जिससे उनकी गिरफ्तारी और संपत्ति जब्ती आसान हो जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि पूरे खैबर पख्तूनख्वा के लिए भी गंभीर परिणाम ला सकता है। हमें यह समझना होगा कि कानून का शासन सभी के लिए समान है, और राजनीतिक प्रतिशोध की बातें केवल स्थिति को और जटिल बनाएंगी।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या सोहेल अफरीदी को गिरफ्तार किया जा सकता है?
यदि वे 30 दिनों के भीतर कोर्ट में पेश नहीं होते हैं, तो उन्हें भगोड़ा घोषित किया जा सकता है और गिरफ्तारी की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
यह मामला किससे संबंधित है?
यह मामला 26 नवंबर, 2024 को हुए विरोध प्रदर्शनों से संबंधित है।
क्या अन्य मंत्री भी भगोड़ा घोषित हुए हैं?
हाँ, मीना खान, शफी जान, अमजद अली और इकबाल अफरीदी को भी भगोड़ा घोषित किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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