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होर्मुज स्ट्रेट अब पहले जैसा नहीं रहेगा: ईरानी विदेश मंत्री अराघची का बड़ा बयान

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होर्मुज स्ट्रेट अब पहले जैसा नहीं रहेगा: ईरानी विदेश मंत्री अराघची का बड़ा बयान

सारांश

ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने साफ कर दिया — होर्मुज स्ट्रेट अब पहले जैसा नहीं रहेगा। युद्ध के बाद पश्चिम एशिया में आए 'मौलिक और रणनीतिक' बदलावों का हवाला देते हुए ईरान ने जलमार्ग के प्रबंधन में नई व्यवस्था के संकेत दिए हैं, जो वैश्विक ऊर्जा बाजारों के लिए एक बड़ी चेतावनी है।

मुख्य बातें

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने 25 अक्टूबर 2026 को कहा कि होर्मुज स्ट्रेट का नौवहन मार्ग और प्रबंधन युद्ध-पूर्व स्थिति में नहीं लौटेगा।
अराघची ने तेहरान समारोह में कहा कि अमेरिका-इजरायल युद्ध के बाद पश्चिम एशिया में 'मौलिक और रणनीतिक' बदलाव हुए हैं।
ईरान ने विदेशी सैन्य बलों की उपस्थिति को क्षेत्र में असुरक्षा का कारण बताया और क्षेत्रीय देशों से सहयोग की बात कही।
सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका-इजरायल के हमलों से हुए नुकसान के मुआवजे के लिए गंभीर प्रयासों पर जोर दिया।
न्यायपालिका प्रमुख गुलामहुसैन मोहसेनी-एजेई के साथ बैठक में न्यायिक सुधार और भ्रष्टाचार विरोधी अभियान पर विशेष ध्यान दिया गया।

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने 25 अक्टूबर 2026 को तेहरान में एक समारोह के दौरान स्पष्ट किया कि होर्मुज स्ट्रेट में नौवहन मार्ग और इस रणनीतिक जलमार्ग का प्रबंधन युद्ध-पूर्व स्थिति में वापस नहीं लौटेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका-इजरायल युद्ध के बाद पश्चिम एशिया में 'मौलिक और रणनीतिक' बदलाव आ चुके हैं जिन्हें नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता।

मुख्य घटनाक्रम

अराघची ने तेहरान समारोह में कहा, 'हमें स्वीकार करना होगा कि नई वास्तविकताएं सामने आई हैं। होर्मुज स्ट्रेट में मार्ग पहले जैसा नहीं रहेगा और स्ट्रेट का प्रबंधन भी पहले जैसा नहीं रहेगा।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि इन मुद्दों पर बातचीत जारी है और आगे भी जारी रहेगी। यह बयान ऐसे समय में आया है जब इस क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव अभी भी उच्च स्तर पर बने हुए हैं।

क्षेत्रीय सुरक्षा पर ईरान का रुख

विदेश मंत्री अराघची ने यह भी रेखांकित किया कि पश्चिम एशिया की सुरक्षा को क्षेत्रीय देशों द्वारा ही सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विदेशी सैन्य बल, जो अपने हितों की रक्षा और इजरायल की सुरक्षा के उद्देश्य से क्षेत्र में उपस्थित हैं, उनकी निरंतर मौजूदगी से समूचे क्षेत्र में असुरक्षा ही बढ़ेगी। ईरान ने स्पष्ट किया कि वह सभी क्षेत्रीय देशों के साथ सहयोग के लिए तैयार है।

सर्वोच्च नेता का रुख और न्यायिक सुधार

इसी बीच, ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने ईरानी नागरिकों के अधिकारों को आगे बढ़ाने और अमेरिका-इजरायल के हमलों से हुए नुकसान के मुआवजे को सुनिश्चित करने पर जोर दिया। शनिवार को प्रकाशित एक बयान के अनुसार, यह विचार-विमर्श खामेनेई और देश के न्यायपालिका प्रमुख गुलामहुसैन मोहसेनी-एजेई के बीच हुई बैठक में हुआ।

बैठक में न्याय को बढ़ावा देने, भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रभावी लड़ाई, न्यायिक मामलों के त्वरित निपटारे और न्यायिक व्यवस्था में व्यापक बदलाव लाने जैसे मुद्दों पर विशेष बल दिया गया। इसके साथ ही, अमेरिका-इजरायल के कथित हमलों से हुए भौतिक और अभौतिक नुकसान के मुआवजे के लिए गंभीर कूटनीतिक प्रयास करने की आवश्यकता भी रेखांकित की गई।

होर्मुज स्ट्रेट का वैश्विक महत्व

गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया का लगभग एक-पाँचवाँ हिस्से का कच्चा तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) गुजरती है। इस जलमार्ग पर किसी भी प्रकार का व्यवधान वैश्विक ऊर्जा बाजारों को सीधे प्रभावित करता है। ईरान के इस बयान को भारत सहित उन तमाम देशों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है जो इस मार्ग से अपना ऊर्जा आयात करते हैं।

क्या होगा आगे

अराघची के इस बयान से संकेत मिलता है कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट के प्रशासन में एक नई व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। क्षेत्रीय देशों के साथ बातचीत जारी रहने की बात कहकर ईरान ने स्पष्ट किया है कि यह मुद्दा कूटनीतिक एजेंडे पर बना रहेगा। आने वाले हफ्तों में इस विषय पर क्षेत्रीय स्तर पर किस प्रकार की नई कूटनीतिक पहल होती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

और ईरान यह संदेश देना चाहता है कि युद्ध के बाद की नई व्यवस्था में उसकी शर्तें बदल गई हैं। लेकिन विरोधाभास यह है कि ईरान 'क्षेत्रीय सुरक्षा' की बात करते हुए खुद एक ऐसे गठबंधन की तलाश में है जो उसे इस जलमार्ग पर नियंत्रण दे सके। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है वह यह है कि होर्मुज पर नई व्यवस्था का सीधा असर भारत के ऊर्जा आयात, बीमा दरों और शिपिंग रूट पर पड़ेगा — एक ऐसा आयाम जिस पर नई दिल्ली को अभी से नजर रखनी होगी।
RashtraPress
26 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

होर्मुज स्ट्रेट के बारे में ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने क्या कहा?
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने 25 अक्टूबर 2026 को तेहरान में कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में नौवहन मार्ग और इसका प्रबंधन युद्ध-पूर्व स्थिति में वापस नहीं लौटेगा। उन्होंने अमेरिका-इजरायल युद्ध के बाद पश्चिम एशिया में 'मौलिक और रणनीतिक' बदलावों का हवाला दिया।
होर्मुज स्ट्रेट इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे व्यस्त समुद्री ऊर्जा मार्ग है, जिससे वैश्विक कच्चे तेल और LNG व्यापार का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। इस पर किसी भी व्यवधान का असर भारत, चीन, जापान सहित दर्जनों देशों की ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों पर सीधे पड़ता है।
ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने क्या निर्देश दिए?
सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने ईरानी नागरिकों के अधिकारों की बहाली और अमेरिका-इजरायल के हमलों से हुए भौतिक व अभौतिक नुकसान के मुआवजे के लिए गंभीर प्रयासों पर जोर दिया। यह बात न्यायपालिका प्रमुख गुलामहुसैन मोहसेनी-एजेई के साथ हुई बैठक में सामने आई।
ईरान क्षेत्रीय सुरक्षा पर क्या रुख अपना रहा है?
ईरान का स्पष्ट रुख है कि पश्चिम एशिया की सुरक्षा क्षेत्रीय देशों द्वारा ही सुनिश्चित होनी चाहिए। विदेश मंत्री अराघची ने कहा कि विदेशी सैन्य बलों की उपस्थिति से क्षेत्र में असुरक्षा बढ़ती है और ईरान सभी पड़ोसी देशों के साथ सहयोग के लिए तैयार है।
होर्मुज स्ट्रेट के प्रबंधन में बदलाव का भारत पर क्या असर पड़ सकता है?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते आयात करता है। इस जलमार्ग के प्रबंधन में कोई भी बदलाव भारत के ऊर्जा आयात की लागत, शिपिंग बीमा दरों और आपूर्ति की निरंतरता को सीधे प्रभावित कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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