होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की कड़ी चेतावनी: 30 दिन ईरानी नियंत्रण में, चुनौती से बढ़ेगा तनाव
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बगदाद दौरे के दौरान 28 जून 2026 को स्पष्ट किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान के नियंत्रण को चुनौती देने की कोई भी कोशिश क्षेत्रीय तनाव को और गहरा करेगी। यह बयान ऐसे नाज़ुक समय पर आया है जब मध्य पूर्व में जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए शांति वार्ता सक्रिय रूप से चल रही है।
अराघची का बगदाद में बयान
बगदाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए अराघची ने कहा, 'ईरान इस्लामिक गणराज्य द्वारा किए जा रहे मौजूदा प्रबंधों से अलग किसी भी नए या अलग समझौते को अपनाने की कोशिश केवल स्थिति को और जटिल बनाएगी, होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने में देरी करेगी और तनाव बढ़ाएगी, जैसा कि हमने पिछली दो रातों में देखा है।' उन्होंने सभी पक्षों से समझौता ज्ञापन (एमओयू) का पालन करने और इसे तय रास्ते से न भटकने देने की अपील की।
30 दिन ईरानी निगरानी में
ईरानी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, अराघची ने घोषणा की कि अगले 30 दिनों तक होर्मुज जलडमरूमध्य की पूरी निगरानी और प्रबंधन ईरान के नियंत्रण में रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी अन्य पक्ष की एकतरफा कार्रवाई जलमार्ग को दोबारा खोलने में देरी का कारण बन सकती है। उनके शब्दों में, 'सभी बाधाएं हटने के बाद जलमार्ग की पूरी क्षमता बहाल कर दी जाएगी।'
नए क्षेत्रीय सुरक्षा ढाँचे का आह्वान
अराघची ने मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों पर ईरानी हमलों के बाद खाड़ी देशों के साथ एक नए 'सुरक्षा ढाँचे' की स्थापना का आह्वान किया। उन्होंने कहा, 'हमें एक ऐसे नए ढाँचे तक पहुँचना चाहिए जिसमें क्षेत्र के सभी देश शामिल हों और क्षेत्र के बाहर किसी भी देश की मौजूदगी या हस्तक्षेप न हो।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने स्वीकार किया है कि उसने बहरीन और कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला किया, जिसकी दोनों खाड़ी देशों ने निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन करार दिया।
इराक की मध्यस्थता की पेशकश
इराक के विदेश मंत्री फुआद हुसैन ने क्षेत्र में तनाव कम करने और स्थिरता बहाल करने के लिए खाड़ी सहयोग परिषद के आठ देशों, ईरान और इराक के बीच मध्यस्थता की पेशकश की। गौरतलब है कि अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच हुए संघर्ष तथा होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने के कारण इराक सर्वाधिक प्रभावित देशों में रहा है — सैन्य अभियान के दौरान यह संघर्ष का दूसरा मोर्चा बन गया था।
आगे क्या होगा
शांति वार्ता की दिशा अब इस बात पर निर्भर करेगी कि सभी पक्ष एमओयू की शर्तों का पालन करते हैं या नहीं। विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अत्यंत संवेदनशील बिंदु है और इसके बंद रहने से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाज़ारों पर दबाव लगातार बना हुआ है। अराघची का यह दौरा संकेत देता है कि ईरान वार्ता की मेज़ पर होते हुए भी अपनी रणनीतिक स्थिति से पीछे हटने को तैयार नहीं है।