अराघची की बगदाद यात्रा: ईरान-अमेरिका एमओयू और होर्मुज तनाव पर इराकी नेताओं से मंत्रणा
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने 29 जून 2026 को बगदाद में इराकी राष्ट्रपति निजार अमेदी और प्रधानमंत्री अली अल-जैदी से अलग-अलग बैठकें कीं। इन बैठकों में ईरान-अमेरिका समझौता ज्ञापन (एमओयू) और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव की पृष्ठभूमि में क्षेत्रीय स्थिरता पर विस्तृत चर्चा हुई।
मुख्य घटनाक्रम
इराकी राष्ट्रपति कार्यालय के आधिकारिक बयान के अनुसार, राष्ट्रपति अमेदी ने एक अधिक स्थिर क्षेत्रीय माहौल बनाने और लंबित विवादों को सुलझाने में कूटनीतिक संवाद की अहमियत पर जोर दिया। उन्होंने स्थायी समझ की दिशा में ठोस कदम उठाने की आवश्यकता रेखांकित की।
इराकी राष्ट्रपति के मीडिया कार्यालय के बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री अल-जैदी ने कहा कि इराक युद्धों को समाप्त करने को प्राथमिकता देता है और क्षेत्र में स्थिरता सुदृढ़ करने के लिए बातचीत का समर्थन करता है, ताकि क्षेत्र के लोगों के लिए विकास और समृद्धि के अधिक अवसर सुनिश्चित हो सकें।
अराघची का रुख और ईरान की प्रतिबद्धता
अराघची ने संकटों को नियंत्रित करने और मतभेदों को सुलझाने में इराक की भूमिका के लिए तेहरान की सराहना व्यक्त की। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने अपने अरब पड़ोसियों के साथ संबंध प्रगाढ़ करने और द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने के लिए इराक के साथ घनिष्ठ समन्वय बनाए रखने की ईरान की प्रतिबद्धता को दोहराया।
होर्मुज संकट और सैन्य आदान-प्रदान की पृष्ठभूमि
ये बैठकें ऐसे नाजुक दौर में हुईं जब अमेरिका ने शुक्रवार और शनिवार को ईरानी ठिकानों पर हमले किए थे। अमेरिका ने इन हमलों के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजरानी के विरुद्ध ईरान के कथित लगातार हमलों का हवाला दिया। जवाब में ईरान ने इस क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला किया।
यह ऐसे समय में आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य — जिससे विश्व का लगभग एक-पाँचवाँ तेल निर्यात होता है — पर भू-राजनीतिक दबाव चरम पर है। गौरतलब है कि यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत संवेदनशील माना जाता है।
दोहा में बातचीत का नया केंद्र
अमेरिकी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और ईरान परस्पर हमले रोकने और होर्मुज विवाद सुलझाने के लिए मंगलवार को कतर की राजधानी दोहा में वार्ता करने पर सहमत हो गए हैं। एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया गया कि दोनों पक्ष फिलहाल पीछे हटेंगे और तकनीकी बातचीत जारी रहने तक जहाजों का निर्बाध आवागमन सुनिश्चित किया जाएगा।
रिपोर्टों के अनुसार, मूल रूप से यह वार्ता स्विट्जरलैंड में होनी थी और इसका मुख्य मुद्दा ईरान का परमाणु कार्यक्रम था। हालाँकि, होर्मुज में नए तनाव के कारण वार्ता स्थल दोहा में स्थानांतरित कर दिया गया, जिससे शिपिंग सुरक्षा का मुद्दा केंद्र में आ गया।
आगे क्या
दोहा वार्ता की सफलता या विफलता यह तय करेगी कि क्षेत्र में तनाव घटेगा या बढ़ेगा। इराक की मध्यस्थ भूमिका एक बार फिर उजागर हुई है, और बगदाद की कूटनीतिक सक्रियता इस संकट के प्रबंधन में निर्णायक साबित हो सकती है।