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सुनिधि चौहान: 5 साल में मंच, 13 में लता मंगेशकर का सम्मान, 18 में तलाक — और फिर बॉलीवुड की सबसे दमदार आवाज़

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सुनिधि चौहान: 5 साल में मंच, 13 में लता मंगेशकर का सम्मान, 18 में तलाक — और फिर बॉलीवुड की सबसे दमदार आवाज़

सारांश

5 साल की उम्र में मंच, 13 में लता मंगेशकर के हाथों ट्रॉफी, 18 में तलाक और आर्थिक संकट — सुनिधि चौहान की कहानी सिर्फ एक गायिका की नहीं, बल्कि हर रुकावट को आवाज़ में बदल देने वाली एक इंसान की है।

मुख्य बातें

सुनिधि चौहान का जन्म 14 अगस्त 1983 को नई दिल्ली में हुआ; मूल नाम निधि चौहान ।
5 साल की उम्र से स्थानीय मंचों पर गाना शुरू; 11 साल की उम्र में परिवार मुंबई आया और कल्याणजी-आनंदजी की अकादमी से जुड़ीं।
1996 में दूरदर्शन शो 'मेरी आवाज़ सुनो' जीता; विजेता ट्रॉफी लता मंगेशकर के हाथों मिली।
2002 में 18 साल की उम्र में बॉबी खान से विवाह, लगभग एक साल बाद तलाक; बाद में संगीतकार हितेश सोनिक से शादी।
करियर में तीन फिल्मफेयर पुरस्कार सहित कई सम्मान; 'बीड़ी' और 'शीला की जवानी' के लिए फिल्मफेयर बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर ।
संगीतकार अनु मलिक ने कठिन दौर में साथ दिया; आलोचकों की 'मर्दाना आवाज़' की टिप्पणी को सुनिधि ने अपनी सबसे बड़ी पहचान में बदला।

सुनिधि चौहान का नाम आज बॉलीवुड की सबसे प्रभावशाली पार्श्वगायिकाओं में शुमार है, लेकिन यह मुकाम उन्होंने संघर्ष, आलोचना और निजी टूटन से गुज़रकर हासिल किया। 14 अगस्त 1983 को नई दिल्ली में जन्मी सुनिधि — जिनका मूल नाम निधि चौहान था — ने महज 5 साल की उम्र में स्थानीय मंचों पर गाना शुरू कर दिया था, और तब से उनका सफर कभी नहीं रुका।

बचपन और संगीत की नींव

सुनिधि के पिता थिएटर से जुड़े थे, इसलिए घर में संगीत का माहौल स्वाभाविक था। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि बचपन में वह मंच के पीछे खड़ी रहती थीं और उनके पिता इशारा करके उन्हें स्टेज पर भेजते थे — उस उम्र में उन्हें यह भी ठीक से पता नहीं था कि मंच पर जाने का मतलब क्या होता है। करीब 11 साल की उम्र में परिवार दिल्ली से मुंबई आ गया। यहाँ उनकी मुलाकात मशहूर संगीतकार कल्याणजी से हुई और वह उनकी संगीत अकादमी से जुड़ गईं। जल्द ही वह कल्याणजी-आनंदजी के बच्चों के ग्रुप 'लिटिल वंडर्स' की प्रमुख गायिका बन गईं।

लता मंगेशकर से मिला पहला बड़ा सम्मान

1996 में 13 साल की उम्र में सुनिधि ने दूरदर्शन के सिंगिंग शो 'मेरी आवाज़ सुनो' में हिस्सा लिया और विजेता बनीं। इस प्रतियोगिता की ट्रॉफी उन्हें स्वयं लता मंगेशकर ने प्रदान की — वही लता मंगेशकर जिन्हें सुनिधि अपना आदर्श मानती थीं। उन्होंने बाद में बताया कि उस दिन अपनी आदर्श के सामने गाते समय वह बहुत घबरा गई थीं। उसी वर्ष फिल्म 'शस्त्र' के गाने 'लड़की दीवानी देखो' से उनका फिल्मी करियर भी शुरू हो गया।

करियर की उड़ान और आलोचनाओं का सामना

1999 में फिल्म 'मस्त' का गाना 'रुकी रुकी सी ज़िंदगी' उनकी पहचान का पहला बड़ा पड़ाव बना। इसके बाद 'फ़िज़ा' का 'महबूब मेरे', 'धूम' का 'धूम मचाले', 'ओमकारा' का 'बीड़ी', 'डॉन' का 'ये मेरा दिल', 'फ़ैशन' का 'देशी गर्ल', 'तीस मार खान' का 'शीला की जवानी' और 'धूम 3' का 'कमली' जैसे गानों ने उन्हें एक अलग ही ऊँचाई पर पहुँचाया। यह ऐसे समय में आया जब उन्हें उद्योग के भीतर से ही कड़ी आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा था। एक इंटरव्यू में उन्होंने खुलासा किया कि कुछ संगीतकार उनकी आवाज़ को 'मर्दाना' कहते थे और उन्हें रोमांटिक गाने देने से मना किया गया था — एक समय वह विशेष किस्म के गीतों या आइटम गानों तक सीमित कर दी गई थीं। संगीतकार अनु मलिक ने, उनके अनुसार, इस कठिन दौर में उनका साथ दिया और उन्हें विविध गाने दिलाने में मदद की। यही 'दमदार आवाज़' आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी पहचान बनी।

निजी ज़िंदगी: तलाक और नई शुरुआत

2002 में महज 18 साल की उम्र में सुनिधि ने कोरियोग्राफर और निर्देशक बॉबी खान से विवाह किया। यह विवाह लगभग एक साल ही चला और दोनों अलग हो गए। उस दौरान परिवार के साथ भी संबंध तनावपूर्ण हो गए थे। तलाक के बाद उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपने काम पर ध्यान केंद्रित किया और धीरे-धीरे करियर को नई ऊँचाई दी। बाद में उन्होंने संगीतकार हितेश सोनिक से विवाह किया। दोनों का एक बेटा है।

पुरस्कार और विरासत

सुनिधि को उनके करियर में कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिले। फिल्म 'मस्त' के लिए उन्हें आर.डी. बर्मन अवॉर्ड मिला। 'बीड़ी' और 'शीला की जवानी' — दोनों के लिए उन्होंने फिल्मफेयर बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर का पुरस्कार जीता। उनके नाम कुल तीन फिल्मफेयर पुरस्कार और फिल्मफेयर अवॉर्ड साउथ सहित कई सम्मान दर्ज हैं। सिंगिंग रियलिटी शो में जज के रूप में भी उन्होंने काम किया, हालाँकि बाद में उन्होंने इससे दूरी बना ली। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि रियलिटी शो का माहौल अब उनके लिए सही जगह नहीं है और वह उससे खुद को जुड़ा हुआ महसूस नहीं करतीं। आज भी उनकी आवाज़ बॉलीवुड के सबसे ऊर्जावान और बहुआयामी स्वरों में गिनी जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि विशेषता। जिस आवाज़ को 'मर्दाना' कहकर रोमांटिक गानों से दूर रखा गया, उसी ने 'धूम मचाले' से 'शीला की जवानी' तक पूरी पीढ़ी को थिरकाया — यह विरोधाभास उद्योग की संकीर्ण सोच का प्रमाण है। 18 साल की उम्र में तलाक और आर्थिक संकट के बावजूद करियर को नई ऊँचाई देना बताता है कि प्रतिभा को परिस्थितियाँ नहीं, दृढ़ता आगे ले जाती है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर उनके गानों की चमक तक सिमटी रहती है — उन संरचनात्मक पूर्वाग्रहों की चर्चा कम होती है जिनसे लड़कर यह चमक हासिल हुई।
RashtraPress
13 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुनिधि चौहान का असली नाम क्या है और उनका जन्म कब हुआ?
सुनिधि चौहान का मूल नाम निधि चौहान है और उनका जन्म 14 अगस्त 1983 को नई दिल्ली में हुआ था। उनके पिता थिएटर से जुड़े थे, जिससे बचपन से ही संगीत का माहौल मिला।
सुनिधि चौहान को लता मंगेशकर से पुरस्कार कब मिला?
1996 में 13 साल की उम्र में सुनिधि ने दूरदर्शन के शो 'मेरी आवाज़ सुनो' में जीत हासिल की और विजेता ट्रॉफी स्वयं लता मंगेशकर ने उन्हें प्रदान की। सुनिधि ने बताया कि अपनी आदर्श के सामने गाते समय वह बहुत घबरा गई थीं।
सुनिधि चौहान की पहली शादी किससे और कब हुई थी?
2002 में 18 साल की उम्र में सुनिधि ने कोरियोग्राफर और निर्देशक बॉबी खान से विवाह किया, जो लगभग एक साल बाद टूट गया। तलाक के बाद उन्होंने आर्थिक कठिनाइयों का सामना किया और बाद में संगीतकार हितेश सोनिक से विवाह किया।
सुनिधि चौहान के सबसे मशहूर गाने कौन से हैं?
'रुकी रुकी सी ज़िंदगी' (मस्त, 1999), 'धूम मचाले' (धूम), 'बीड़ी' (ओमकारा), 'शीला की जवानी' (तीस मार खान) और 'कमली' (धूम 3) उनके सबसे चर्चित गानों में शामिल हैं। इन गानों ने उन्हें बॉलीवुड की शीर्ष पार्श्वगायिकाओं में स्थापित किया।
सुनिधि चौहान को कितने फिल्मफेयर पुरस्कार मिले हैं?
सुनिधि चौहान के नाम तीन फिल्मफेयर पुरस्कार दर्ज हैं — 'बीड़ी' और 'शीला की जवानी' के लिए फिल्मफेयर बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर, साथ ही फिल्मफेयर अवॉर्ड साउथ सहित कई अन्य सम्मान। 'मस्त' के लिए उन्हें आर.डी. बर्मन अवॉर्ड भी मिला।
राष्ट्र प्रेस
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