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लता मंगेशकर ने मुकेश के निधन के बाद नितिन मुकेश को दिया अंतरराष्ट्रीय मंच, बदल गई पूरी जिंदगी

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लता मंगेशकर ने मुकेश के निधन के बाद नितिन मुकेश को दिया अंतरराष्ट्रीय मंच, बदल गई पूरी जिंदगी

सारांश

पिता मुकेश के निधन के बाद जब लता मंगेशकर ने नितिन मुकेश को अंतरराष्ट्रीय मंच पर साथ लिया, तो वह सिर्फ एक गायक का नहीं — एक विरासत का परिचय था। उस एक फैसले ने नितिन को वैश्विक पहचान दी और हिंदी फिल्म संगीत में उनकी अलग जगह बनाई।

मुख्य बातें

नितिन मुकेश का जन्म 27 जून 1950 को हुआ; वह महान गायक मुकेश के पुत्र हैं।
मुकेश के निधन के बाद लता मंगेशकर ने पूर्व-निर्धारित अंतरराष्ट्रीय शो में नितिन मुकेश को अपने साथ मंच पर उतारा।
लता मंगेशकर ने मंच से दर्शकों को बताया कि वह मुकेश के सुपुत्र के साथ यह संगीत यात्रा जारी रख रही हैं।
1980 और 1990 के दशक में नितिन मुकेश ने 'माय नेम इज लखन' , 'ज़िंदगी हर कदम' समेत कई लोकप्रिय गीत गाए।
बर्मन , लक्ष्मीकांत–प्यारेलाल , बप्पी लहरी जैसे दिग्गज संगीतकारों के साथ काम किया।

गायक नितिन मुकेश का करियर उस मोड़ से शुरू हुआ जो किसी के लिए भी कल्पना से परे था — जब उनके पिता, महान गायक मुकेश, के असमय निधन के बाद स्वर-साम्राज्ञी लता मंगेशकर ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने साथ खड़ा किया। यह एक ऐसा फैसला था जिसने न केवल नितिन मुकेश की जिंदगी बदली, बल्कि भारतीय संगीत की एक विरासत को भी जीवंत रखा।

पिता की विरासत और संगीत की नींव

नितिन मुकेश का जन्म 27 जून 1950 को हुआ था। वह भारतीय सिनेमा के महान पार्श्वगायक मुकेश के पुत्र हैं। बचपन से ही उन्होंने अपने पिता की छत्रछाया में गायकी की बारीकियाँ सीखीं और एक पार्श्वगायक बनने का सपना संजोया। पिता की आवाज़ का जादू उनके घर की हवा में घुला हुआ था, और नितिन ने उसी परंपरा को आत्मसात किया।

मुकेश के निधन के बाद का संकट

मुकेश के अचानक निधन ने भारतीय संगीत जगत को गहरे शोक में डुबो दिया। इस खालीपन का असर लता मंगेशकर पर भी पड़ा, जिन्होंने मुकेश के साथ कई अंतरराष्ट्रीय शो पहले से तय किए हुए थे। शुरुआत में वह इन कार्यक्रमों को रद्द करने पर विचार कर रही थीं। लेकिन अपनी पेशेवर प्रतिबद्धता और मुकेश के प्रति श्रद्धा को ध्यान में रखते हुए उन्होंने एक साहसी निर्णय लिया।

लता मंगेशकर का ऐतिहासिक फैसला

लता मंगेशकर ने तय किया कि वह इन अंतरराष्ट्रीय शो में अकेली नहीं जाएँगी — बल्कि मुकेश के बेटे नितिन मुकेश को अपने साथ मंच पर ले जाएँगी। बताया जाता है कि उन्होंने मंच से दर्शकों को बताया कि मुकेश अब इस दुनिया में नहीं हैं, और इसीलिए वह उनके सुपुत्र के साथ यह संगीत यात्रा आगे बढ़ा रही हैं। यह क्षण नितिन मुकेश के लिए जीवन का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ। यहीं से उनके अंतरराष्ट्रीय मंच पर सफर की शुरुआत हुई।

अंतरराष्ट्रीय पहचान और फिल्मी सफर

इसके बाद नितिन मुकेश को लता मंगेशकर के साथ दुनिया के कई देशों में प्रस्तुति देने का अवसर मिला, जिसने उन्हें वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई। 1980 और 1990 के दशक में उन्होंने हिंदी फिल्म संगीत में भी अपनी मज़बूत उपस्थिति दर्ज कराई। 'माय नेम इज लखन', 'सो गया ये जहाँ', 'ज़िंदगी हर कदम', 'वफा ना रास आई' और 'तेरी झील सी गहरी आँखें' जैसे गीत आज भी श्रोताओं के दिलों में बसे हैं।

दिग्गज संगीतकारों के साथ काम

नितिन मुकेश ने अपने करियर में आर. डी. बर्मन, लक्ष्मीकांत–प्यारेलाल, बप्पी लहरी, खय्याम और आनंद–मिलिंद जैसे दिग्गज संगीतकारों के साथ काम किया। इसके अलावा उन्होंने लता मंगेशकर, आशा भोसले और अलका याज्ञिक जैसी प्रमुख गायिकाओं के साथ अनेक यादगार युगल गीत भी गाए। यह सफर इस बात का प्रमाण है कि संकट की घड़ी में मिला एक अवसर किसी की पूरी तकदीर बदल सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारतीय संगीत की उस परंपरा की है जहाँ वरिष्ठ कलाकार नई पीढ़ी को थामते हैं। लता मंगेशकर का यह निर्णय व्यावसायिक नहीं, मानवीय था — और यही इसे असाधारण बनाता है। यह उस दौर की याद दिलाता है जब फिल्म उद्योग में गुरु-शिष्य परंपरा केवल रिवाज नहीं, एक जीवंत व्यवस्था थी। आज जब नए गायकों को रियलिटी शो के ज़रिए पहचान मिलती है, तब यह प्रसंग यह सवाल भी उठाता है कि क्या वह व्यक्तिगत संरक्षण की संस्कृति अब भी उतनी ही सक्रिय है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नितिन मुकेश कौन हैं और उनका जन्म कब हुआ?
नितिन मुकेश भारत के प्रसिद्ध पार्श्वगायक और महान गायक मुकेश के पुत्र हैं। उनका जन्म 27 जून 1950 को हुआ था और उन्होंने 1980-90 के दशक में हिंदी फिल्म संगीत में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई।
लता मंगेशकर ने नितिन मुकेश को मौका क्यों दिया?
मुकेश के निधन के बाद लता मंगेशकर के कई अंतरराष्ट्रीय शो पहले से तय थे। अपनी पेशेवर प्रतिबद्धता और मुकेश के प्रति श्रद्धा को ध्यान में रखते हुए उन्होंने मुकेश के बेटे नितिन मुकेश को अपने साथ मंच पर लेने का फैसला किया, जिससे नितिन को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली।
नितिन मुकेश के सबसे लोकप्रिय गाने कौन से हैं?
नितिन मुकेश ने 'माय नेम इज लखन', 'सो गया ये जहाँ', 'ज़िंदगी हर कदम', 'वफा ना रास आई' और 'तेरी झील सी गहरी आँखें' जैसे कई लोकप्रिय गीत गाए। ये गाने आज भी श्रोताओं के बीच पसंद किए जाते हैं।
नितिन मुकेश ने किन संगीतकारों के साथ काम किया?
नितिन मुकेश ने आर. डी. बर्मन, लक्ष्मीकांत–प्यारेलाल, बप्पी लहरी, खय्याम और आनंद–मिलिंद जैसे दिग्गज संगीतकारों के साथ काम किया। उन्होंने लता मंगेशकर, आशा भोसले और अलका याज्ञिक के साथ कई यादगार युगल गीत भी गाए।
नितिन मुकेश के करियर का सबसे बड़ा मोड़ क्या था?
नितिन मुकेश के करियर का सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब लता मंगेशकर ने उनके पिता मुकेश के निधन के बाद उन्हें अंतरराष्ट्रीय शो में अपने साथ मंच पर उतारा। इस अनुभव ने उन्हें वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई और उनके हिंदी फिल्म करियर की नींव रखी।
राष्ट्र प्रेस
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