मुकेश की 103वीं जयंती पर भावुक हुए नितिन मुकेश, बोले — 'आपका गीत और विरासत हमेशा जीवित रहेगी'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय सिनेमा के अमर पार्श्व गायक मुकेश चंद माथुर की 103वीं जयंती पर बुधवार, 22 जुलाई को उनके सुपुत्र और वरिष्ठ पार्श्व गायक नितिन मुकेश ने भावुक श्रद्धांजलि अर्पित की। नितिन मुकेश ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर पिता की दुर्लभ श्वेत-श्याम तस्वीरें साझा करते हुए एक हृदयस्पर्शी संदेश लिखा, जिसने लाखों संगीत-प्रेमियों को भावनाओं में डुबो दिया।
नितिन मुकेश का भावभीना संदेश
नितिन मुकेश ने अपनी पोस्ट में लिखा कि आज उनके प्यारे पिताजी की 103वीं जयंती है। उन्होंने कहा — 'पिता जी, जिस तरह आपका न होना आपके अपनों को हमेशा दुख देता रहेगा, उसी तरह इस धरती पर आपके होने का एहसास भी हमेशा हमारे साथ रहेगा। आपकी प्यारी बातें और यादें हमेशा हमारे दिलों में जिंदा रहेंगी — जग में रह जाएंगे प्यारे तेरे बोल।'
उन्होंने संदेश के अंत में लिखा — 'आपका गीत और आपकी विरासत हमेशा जीवित रहेगी। जीना इसी का नाम है!!! जब तक हम फिर से किसी बेहतर जगह, एक बेहतर दुनिया में नहीं मिलते, तब तक हमें अपना आशीर्वाद देते रहिए। आपसे बहुत प्यार है पापा।'
मुकेश की अमिट पहचान
मुकेश चंद माथुर हिंदी सिनेमा के उन चुनिंदा गायकों में से थे जिनकी आवाज़ में दर्द और करुणा का अनूठा संगम था। दिल्ली में जन्मे मुकेश को हिंदी फिल्म जगत में 'राज कपूर की आवाज़' और 'दर्द भरे नगमों के बेताज बादशाह' के रूप में जाना जाता है। उनकी आवाज़ ने दशकों तक करोड़ों श्रोताओं के दिलों को छुआ।
करियर की शुरुआत और पहली बड़ी सफलता
मुकेश ने 1941 में फिल्म 'निर्दोष' से अभिनेता और गायक के रूप में अपने करियर की नींव रखी। पार्श्व गायन में उनकी पहली बड़ी सफलता 1945 में आई, जब फिल्म 'पहली नजर' का गीत 'दिल जलता है तो जलने दे' ने उन्हें रातोंरात पहचान दिलाई।
गौरतलब है कि मुकेश की प्रतिभा को सबसे पहले अभिनेता मोतीलाल ने एक विवाह समारोह में पहचाना था। मोतीलाल न केवल उनकी क्षमता को भाँप सके, बल्कि उन्हें अपने साथ बंबई लेकर आए और उनके करियर को एक निर्णायक दिशा दी — यह संयोग हिंदी संगीत के इतिहास में एक यादगार मोड़ बन गया।
विरासत जो आज भी जीवित है
मुकेश की जयंती पर हर वर्ष उनके चाहने वाले और परिजन उन्हें श्रद्धापूर्वक याद करते हैं। यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक हो जाता है जब हिंदी सिनेमा का संगीत तेज़ी से बदल रहा है — फिर भी मुकेश के गीत पीढ़ी-दर-पीढ़ी उतनी ही गहराई से महसूस किए जाते हैं। नितिन मुकेश की यह भावुक पोस्ट इस बात का प्रमाण है कि असली विरासत वह होती है जो दिलों में जीती है।