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मुकेश की 103वीं जयंती पर भावुक हुए नितिन मुकेश, बोले — 'आपका गीत और विरासत हमेशा जीवित रहेगी'

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मुकेश की 103वीं जयंती पर भावुक हुए नितिन मुकेश, बोले — 'आपका गीत और विरासत हमेशा जीवित रहेगी'

सारांश

103वीं जयंती पर नितिन मुकेश का भावुक संदेश — 'जग में रह जाएंगे प्यारे तेरे बोल।' दर्द भरे नगमों के बेताज बादशाह मुकेश चंद माथुर की आवाज़ आज भी करोड़ों दिलों में ज़िंदा है। बेटे की पोस्ट ने संगीत-प्रेमियों को भावनाओं में डुबो दिया।

मुख्य बातें

पार्श्व गायक मुकेश चंद माथुर की 103वीं जयंती 22 जुलाई को मनाई गई।
बेटे नितिन मुकेश ने इंस्टाग्राम पर श्वेत-श्याम तस्वीरें और भावुक संदेश साझा किया।
मुकेश को हिंदी सिनेमा में 'राज कपूर की आवाज़' और 'दर्द भरे नगमों के बेताज बादशाह' के रूप में जाना जाता है।
मुकेश ने 1941 में फिल्म 'निर्दोष' से करियर शुरू किया; 1945 में 'दिल जलता है तो जलने दे' से पहचान मिली।
अभिनेता मोतीलाल ने मुकेश की प्रतिभा पहचानी और उन्हें बंबई लेकर आए।

भारतीय सिनेमा के अमर पार्श्व गायक मुकेश चंद माथुर की 103वीं जयंती पर बुधवार, 22 जुलाई को उनके सुपुत्र और वरिष्ठ पार्श्व गायक नितिन मुकेश ने भावुक श्रद्धांजलि अर्पित की। नितिन मुकेश ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर पिता की दुर्लभ श्वेत-श्याम तस्वीरें साझा करते हुए एक हृदयस्पर्शी संदेश लिखा, जिसने लाखों संगीत-प्रेमियों को भावनाओं में डुबो दिया।

नितिन मुकेश का भावभीना संदेश

नितिन मुकेश ने अपनी पोस्ट में लिखा कि आज उनके प्यारे पिताजी की 103वीं जयंती है। उन्होंने कहा — 'पिता जी, जिस तरह आपका न होना आपके अपनों को हमेशा दुख देता रहेगा, उसी तरह इस धरती पर आपके होने का एहसास भी हमेशा हमारे साथ रहेगा। आपकी प्यारी बातें और यादें हमेशा हमारे दिलों में जिंदा रहेंगी — जग में रह जाएंगे प्यारे तेरे बोल।'

उन्होंने संदेश के अंत में लिखा — 'आपका गीत और आपकी विरासत हमेशा जीवित रहेगी। जीना इसी का नाम है!!! जब तक हम फिर से किसी बेहतर जगह, एक बेहतर दुनिया में नहीं मिलते, तब तक हमें अपना आशीर्वाद देते रहिए। आपसे बहुत प्यार है पापा।'

मुकेश की अमिट पहचान

मुकेश चंद माथुर हिंदी सिनेमा के उन चुनिंदा गायकों में से थे जिनकी आवाज़ में दर्द और करुणा का अनूठा संगम था। दिल्ली में जन्मे मुकेश को हिंदी फिल्म जगत में 'राज कपूर की आवाज़' और 'दर्द भरे नगमों के बेताज बादशाह' के रूप में जाना जाता है। उनकी आवाज़ ने दशकों तक करोड़ों श्रोताओं के दिलों को छुआ।

करियर की शुरुआत और पहली बड़ी सफलता

मुकेश ने 1941 में फिल्म 'निर्दोष' से अभिनेता और गायक के रूप में अपने करियर की नींव रखी। पार्श्व गायन में उनकी पहली बड़ी सफलता 1945 में आई, जब फिल्म 'पहली नजर' का गीत 'दिल जलता है तो जलने दे' ने उन्हें रातोंरात पहचान दिलाई।

गौरतलब है कि मुकेश की प्रतिभा को सबसे पहले अभिनेता मोतीलाल ने एक विवाह समारोह में पहचाना था। मोतीलाल न केवल उनकी क्षमता को भाँप सके, बल्कि उन्हें अपने साथ बंबई लेकर आए और उनके करियर को एक निर्णायक दिशा दी — यह संयोग हिंदी संगीत के इतिहास में एक यादगार मोड़ बन गया।

विरासत जो आज भी जीवित है

मुकेश की जयंती पर हर वर्ष उनके चाहने वाले और परिजन उन्हें श्रद्धापूर्वक याद करते हैं। यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक हो जाता है जब हिंदी सिनेमा का संगीत तेज़ी से बदल रहा है — फिर भी मुकेश के गीत पीढ़ी-दर-पीढ़ी उतनी ही गहराई से महसूस किए जाते हैं। नितिन मुकेश की यह भावुक पोस्ट इस बात का प्रमाण है कि असली विरासत वह होती है जो दिलों में जीती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भावनात्मक सच्चाई पर भरोसा किया। जब आज की पीढ़ी AI-जनित संगीत की ओर बढ़ रही है, तब मुकेश जैसे गायकों की स्मृति यह सवाल उठाती है — क्या हम वह आत्मा खो रहे हैं जो संगीत को सिर्फ मनोरंजन से ऊपर उठाती थी?
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुकेश चंद माथुर कौन थे?
मुकेश चंद माथुर हिंदी सिनेमा के महान पार्श्व गायक थे, जिन्हें 'राज कपूर की आवाज़' और 'दर्द भरे नगमों के बेताज बादशाह' के रूप में जाना जाता है। दिल्ली में जन्मे मुकेश ने 1941 से अपने करियर की शुरुआत की और हिंदी फिल्म संगीत को अपनी भावपूर्ण आवाज़ से समृद्ध किया।
मुकेश की 103वीं जयंती पर नितिन मुकेश ने क्या लिखा?
नितिन मुकेश ने इंस्टाग्राम पर लिखा कि पिता की यादें और प्यारी बातें हमेशा दिलों में जिंदा रहेंगी और उनका गीत व विरासत अमर है। उन्होंने पुरानी श्वेत-श्याम तस्वीरें साझा करते हुए लिखा — 'आपसे बहुत प्यार है पापा।'
मुकेश ने अपने करियर की शुरुआत कब और कैसे की?
मुकेश ने 1941 में फिल्म 'निर्दोष' से अभिनेता और गायक के रूप में करियर शुरू किया। पार्श्व गायन में उनकी पहली बड़ी सफलता 1945 में फिल्म 'पहली नजर' के गीत 'दिल जलता है तो जलने दे' से मिली।
अभिनेता मोतीलाल का मुकेश के करियर में क्या योगदान था?
अभिनेता मोतीलाल ने एक विवाह समारोह में मुकेश की गायन प्रतिभा को पहचाना और उन्हें अपने साथ बंबई लेकर आए। मोतीलाल के इस सहयोग ने मुकेश के करियर को निर्णायक दिशा दी।
नितिन मुकेश कौन हैं?
नितिन मुकेश महान गायक मुकेश चंद माथुर के पुत्र और स्वयं एक वरिष्ठ पार्श्व गायक हैं। उन्होंने हिंदी सिनेमा में अनेक यादगार गीत गाए हैं और अपने पिता की संगीत विरासत को आगे बढ़ाया है।
राष्ट्र प्रेस
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