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क्या नील ने हीरो की दुनिया को अलविदा कहकर खतरनाक रास्ता चुना है, विलेन बनकर दर्शकों के दिलों में डर पैदा किया?

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क्या नील ने हीरो की दुनिया को अलविदा कहकर खतरनाक रास्ता चुना है, विलेन बनकर दर्शकों के दिलों में डर पैदा किया?

सारांश

नील नितिन मुकेश ने बॉलीवुड में विलेन के रूप में अपनी पहचान बनाई है, जबकि हीरो के रूप में उन्हें वह पहचान नहीं मिली। यह कहानी उनके करियर की जर्नी को दर्शाती है।

मुख्य बातें

नील नितिन मुकेश ने हीरो से विलेन की यात्रा की।
विलेन के किरदार में उनकी पहचान बनी।
समाज सेवा में भी उनका योगदान महत्वपूर्ण है।

मुंबई, 14 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। नील नितिन मुकेश बॉलीवुड के उन कलाकारों में शामिल हैं, जिनकी स्क्रीन पर मौजूदगी हमेशा से अद्वितीय रही है। चाहे वह हीरो का किरदार हो या विलेन का, नील ने अपने अभिनय के जरिए दर्शकों पर गहरा प्रभाव डाला है। हालांकि, फिल्मों में हीरो के रूप में वह ज्यादा प्रसिद्ध नहीं हो पाए, लेकिन विलेन के किरदार में उन्होंने अपनी एक खास पहचान बनाई है। फिल्में जैसे 'वजीर', 'गोलमाल अगेन' और 'साहो' में उनका विलेन अवतार दर्शकों के दिलों में एक विशेष स्थान बना चुका है।

नील नितिन मुकेश का जन्म 15 जनवरी 1982 को मुंबई में हुआ था। उनका असली नाम नील माथुर है, लेकिन उन्होंने अपने पिता और दादा के नाम को जोड़कर नील नितिन मुकेश रखा। उनके पिता नितिन मुकेश एक प्रसिद्ध पार्श्व गायक हैं और उनके दादा मुकेश हिंदी सिनेमा के महान गायक थे। नील का परिवार बचपन से ही संगीत और कला से जुड़ा रहा, जिससे उनकी रचनात्मकता का विकास हुआ।

नील ने अभिनय की शुरुआत बहुत छोटी उम्र में की थी। मात्र छह साल की उम्र में उन्होंने फिल्म 'विजय' में बाल कलाकार के रूप में काम किया। इसके अलावा, उन्होंने 'जैसी करनी वैसी भरनी' में भी ऋषि कपूर और गोविंदा के बचपन का किरदार निभाया। बड़े सुपरस्टार्स के साथ काम करने का अनुभव नील के लिए महत्वपूर्ण रहा, जिससे उनकी फिल्मों के प्रति समझ बढ़ी।

बॉलीवुड में मुख्य अभिनेता के रूप में नील का डेब्यू 2007 में फिल्म 'जॉनी गद्दार' से हुआ। इस थ्रिलर फिल्म में उनके अभिनय की प्रशंसा हुई। इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों में काम किया, जैसे 'आ देखें जरा', 'न्यूयॉर्क', 'लफंगे परिंदे', 'प्लेयर' और '3जी'। इन फिल्मों में उन्होंने हीरो के रूप में काम किया, लेकिन दर्शकों के दिलों में ज्यादा खास स्थान नहीं बना पाए।

नील का करियर एक मोड़ तब आया जब उन्होंने विलेन के किरदार निभाने शुरू किए। उनकी फिल्म 'वजीर' में विलेन का रोल दर्शकों को बहुत पसंद आया। इसके बाद 'गोलमाल अगेन' और 'साहो' में भी उन्होंने विलेन के किरदार में अपने अभिनय का जलबा दिखाया। उनका यह अंदाज इतना प्रभावशाली था कि उन्हें देखकर लोगों के दिलों में डर बैठ जाता था। दर्शक उन्हें हीरो के बजाय विलेन के रूप में याद करने लगे। नील की यह खासियत हमेशा दर्शकों के लिए एक आकर्षक अनुभव रही है।

नील ने केवल हिंदी फिल्मों में ही काम नहीं किया, बल्कि तमिल फिल्म 'कैथी' और तेलुगू फिल्म 'कवचम' में भी अभिनय किया। उनके विलेन अवतार ने उनके करियर को नई दिशा दी और उन्हें बॉलीवुड में अलग पहचान दिलाई।

इसके अलावा, नील नितिन मुकेश ने प्रोड्यूसर के रूप में भी कदम रखा। उनकी फिल्म 'बायपास रोड' में वह मुख्य किरदार के साथ-साथ निर्माता भी थे। फिल्मों के अलावा, नील ने समाज सेवा में भी योगदान दिया। 2009 में उन्होंने अपना एक एनजीओ शुरू किया, जिसमें जरूरतमंद महिलाओं को खाना, रहने की जगह और ट्रेनिंग दी जाती है। यह पहल उनके व्यक्तित्व का एक और पहलू दर्शाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

एक अभिनेता को अपनी पहचान को खोजने के लिए जोखिम उठाने पड़ते हैं।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नील नितिन मुकेश का हीरो से विलेन बनने का सफर कैसे रहा?
नील ने पहले हीरो के रूप में कई फिल्मों में काम किया, लेकिन विलेन के किरदार में उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई।
क्या नील ने समाज सेवा में भी योगदान दिया है?
हाँ, नील ने 2009 में एक एनजीओ की स्थापना की, जो जरूरतमंद महिलाओं की सहायता करता है।
नील की कौन सी फिल्में प्रमुख हैं?
नील की प्रमुख फिल्में 'वजीर', 'गोलमाल अगेन' और 'साहो' हैं।
राष्ट्र प्रेस
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