हेमलता बाली का जन्मदिन: 'अंखियों के झरोखों से' की आवाज़ ने 38 भाषाओं में गाए 5,000 से अधिक गीत
सारांश
मुख्य बातें
बॉलीवुड की मखमली आवाज़ हेमलता बाली का जन्म 16 अगस्त 1954 को हैदराबाद में हुआ था। शास्त्रीय संगीत में पारंगत इस प्लेबैक सिंगर ने अपने करियर में 38 भाषाओं में 5,000 से अधिक गीत गाए और भारतीय सिने-संगीत में एक अमिट छाप छोड़ी। उनका कालजयी गीत 'अंखियों के झरोखों से' आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में जीवित है।
शुरुआती जीवन और संगीत की नींव
हेमलता का असली नाम लता भट्ट है। वे एक मारवाड़ी ब्राह्मण परिवार में पैदा हुईं, जो मूल रूप से राजस्थान के चुरू जिले के सेहला गाँव से संबंध रखता है। उनका बचपन कोलकाता (तत्कालीन कलकत्ता) में बीता, जहाँ संगीत के प्रति उनका अनुराग बचपन से ही प्रस्फुटित हो गया था।
संगीत की औपचारिक शिक्षा उन्होंने अपने पिता और गुरु पंडित जयचंद भट्ट से ली। शास्त्रीय संगीत की इस गहरी नींव ने उन्हें कव्वाली, ग़ज़ल, भजन और हल्के-फुल्के गीतों जैसी विविध शैलियों में समान दक्षता दी। मात्र 13 वर्ष की आयु में उन्होंने गायन के क्षेत्र में पहला कदम रखा।
मुंबई में संघर्ष और करियर की उड़ान
कोलकाता से मुंबई आने के बाद हेमलता ने लंबे संघर्ष का सामना किया। अंततः उन्होंने कल्याणजी-आनंदजी और लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल जैसे दिग्गज संगीतकारों के साथ काम करते हुए अपनी पहचान बनाई। उनकी आवाज़ में मोहम्मद रफ़ी, किशोर कुमार, मुकेश, लता मंगेशकर और आशा भोसले के साथ युगल गीत रिकॉर्ड हुए।
संगीतकार रवींद्र जैन के साथ उनकी जोड़ी विशेष रूप से यादगार रही। 1977 में फ़िल्म 'चितचोर' के लिए येसुदास के साथ गाया युगल गीत 'तू जो मेरे सुर में' — जिसकी रचना रवींद्र जैन ने की थी — उनके करियर का एक मील का पत्थर साबित हुआ।
फ़िल्मफ़ेयर नामांकन और पुरस्कार
1977 से 1981 के बीच हेमलता को पाँच बार फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ महिला पार्श्व गायिका पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया। 1977 में फ़िल्म 'चितचोर' के लिए उन्होंने यह प्रतिष्ठित पुरस्कार जीता। यह नामांकनों की निरंतरता उस दौर में उनकी अपरिहार्य उपस्थिति को दर्शाती है जब लता मंगेशकर और आशा भोसले जैसी दिग्गज गायिकाएँ अपने शिखर पर थीं।
उनके चर्चित गीतों में 'अंखियों के झरोखों से', 'कौन दिशा में लेके चला रे बटोहिया' और 'तू इस तरह से मेरी ज़िंदगी में' शामिल हैं, जो दशकों बाद भी संगीत प्रेमियों के बीच लोकप्रिय हैं।
व्यक्तिगत जीवन
हेमलता का विवाह योगेश बाली से हुआ था, जो अभिनेत्री योगिता बाली के छोटे भाई थे। 1988 में लंबी बीमारी के बाद पति के निधन के बाद उन्होंने अपने पुत्र आदित्य बाली की परवरिश अकेले की। आदित्य अब अभिनय की दुनिया में कदम रखने की तैयारी में हैं।
विरासत और आगे का सफ़र
हेमलता ने भारतीय फ़िल्मों, टीवी धारावाहिकों और संगीत एल्बमों को अपनी आवाज़ दी। 38 भाषाओं में गायन की यह उपलब्धि उन्हें भारतीय संगीत के सबसे बहुभाषी कलाकारों में शुमार करती है। अपने करियर के साथ-साथ जीवन के दूसरे अध्याय में भी वे उतनी ही सक्रिय हैं — और उनकी आवाज़ की विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।