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हेमलता बाली का जन्मदिन: 'अंखियों के झरोखों से' की आवाज़ ने 38 भाषाओं में गाए 5,000 से अधिक गीत

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हेमलता बाली का जन्मदिन: 'अंखियों के झरोखों से' की आवाज़ ने 38 भाषाओं में गाए 5,000 से अधिक गीत

सारांश

मखमली आवाज़ की मल्लिका हेमलता बाली ने 13 साल की उम्र से शुरू हुए सफ़र में 38 भाषाओं में 5,000 से अधिक गीत गाए। 'अंखियों के झरोखों से' से घर-घर पहचानी जाने वाली इस गायिका ने 1977 में फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार जीता और भारतीय सिने-संगीत में एक अमिट छाप छोड़ी।

मुख्य बातें

हेमलता बाली का जन्म 16 अगस्त 1954 को हैदराबाद में हुआ; असली नाम लता भट्ट ।
उन्होंने 38 भाषाओं में 5,000 से अधिक गीत गाए, जो उन्हें भारत के सबसे बहुभाषी गायकों में शामिल करता है।
1977 में फ़िल्म 'चितचोर' के लिए फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ महिला पार्श्व गायिका पुरस्कार जीता; 1977–81 के बीच पाँच बार नामांकित।
शास्त्रीय संगीत की शिक्षा पिता पंडित जयचंद भट्ट से ली; मात्र 13 वर्ष की आयु में गायन शुरू किया।
पति योगेश बाली का 1988 में निधन; पुत्र आदित्य बाली अभिनय में कदम रखने की तैयारी में।

बॉलीवुड की मखमली आवाज़ हेमलता बाली का जन्म 16 अगस्त 1954 को हैदराबाद में हुआ था। शास्त्रीय संगीत में पारंगत इस प्लेबैक सिंगर ने अपने करियर में 38 भाषाओं में 5,000 से अधिक गीत गाए और भारतीय सिने-संगीत में एक अमिट छाप छोड़ी। उनका कालजयी गीत 'अंखियों के झरोखों से' आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में जीवित है।

शुरुआती जीवन और संगीत की नींव

हेमलता का असली नाम लता भट्ट है। वे एक मारवाड़ी ब्राह्मण परिवार में पैदा हुईं, जो मूल रूप से राजस्थान के चुरू जिले के सेहला गाँव से संबंध रखता है। उनका बचपन कोलकाता (तत्कालीन कलकत्ता) में बीता, जहाँ संगीत के प्रति उनका अनुराग बचपन से ही प्रस्फुटित हो गया था।

संगीत की औपचारिक शिक्षा उन्होंने अपने पिता और गुरु पंडित जयचंद भट्ट से ली। शास्त्रीय संगीत की इस गहरी नींव ने उन्हें कव्वाली, ग़ज़ल, भजन और हल्के-फुल्के गीतों जैसी विविध शैलियों में समान दक्षता दी। मात्र 13 वर्ष की आयु में उन्होंने गायन के क्षेत्र में पहला कदम रखा।

मुंबई में संघर्ष और करियर की उड़ान

कोलकाता से मुंबई आने के बाद हेमलता ने लंबे संघर्ष का सामना किया। अंततः उन्होंने कल्याणजी-आनंदजी और लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल जैसे दिग्गज संगीतकारों के साथ काम करते हुए अपनी पहचान बनाई। उनकी आवाज़ में मोहम्मद रफ़ी, किशोर कुमार, मुकेश, लता मंगेशकर और आशा भोसले के साथ युगल गीत रिकॉर्ड हुए।

संगीतकार रवींद्र जैन के साथ उनकी जोड़ी विशेष रूप से यादगार रही। 1977 में फ़िल्म 'चितचोर' के लिए येसुदास के साथ गाया युगल गीत 'तू जो मेरे सुर में' — जिसकी रचना रवींद्र जैन ने की थी — उनके करियर का एक मील का पत्थर साबित हुआ।

फ़िल्मफ़ेयर नामांकन और पुरस्कार

1977 से 1981 के बीच हेमलता को पाँच बार फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ महिला पार्श्व गायिका पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया। 1977 में फ़िल्म 'चितचोर' के लिए उन्होंने यह प्रतिष्ठित पुरस्कार जीता। यह नामांकनों की निरंतरता उस दौर में उनकी अपरिहार्य उपस्थिति को दर्शाती है जब लता मंगेशकर और आशा भोसले जैसी दिग्गज गायिकाएँ अपने शिखर पर थीं।

उनके चर्चित गीतों में 'अंखियों के झरोखों से', 'कौन दिशा में लेके चला रे बटोहिया' और 'तू इस तरह से मेरी ज़िंदगी में' शामिल हैं, जो दशकों बाद भी संगीत प्रेमियों के बीच लोकप्रिय हैं।

व्यक्तिगत जीवन

हेमलता का विवाह योगेश बाली से हुआ था, जो अभिनेत्री योगिता बाली के छोटे भाई थे। 1988 में लंबी बीमारी के बाद पति के निधन के बाद उन्होंने अपने पुत्र आदित्य बाली की परवरिश अकेले की। आदित्य अब अभिनय की दुनिया में कदम रखने की तैयारी में हैं।

विरासत और आगे का सफ़र

हेमलता ने भारतीय फ़िल्मों, टीवी धारावाहिकों और संगीत एल्बमों को अपनी आवाज़ दी। 38 भाषाओं में गायन की यह उपलब्धि उन्हें भारतीय संगीत के सबसे बहुभाषी कलाकारों में शुमार करती है। अपने करियर के साथ-साथ जीवन के दूसरे अध्याय में भी वे उतनी ही सक्रिय हैं — और उनकी आवाज़ की विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

सिर्फ़ आवाज़ मिलती थी — फिर भी वे पीढ़ियों के दिलों में बस जाते थे। लता मंगेशकर और आशा भोसले के वर्चस्व के बावजूद पाँच फ़िल्मफ़ेयर नामांकन हासिल करना उनकी असाधारण प्रतिभा का प्रमाण है। 38 भाषाओं में गायन की उपलब्धि आज के स्ट्रीमिंग युग में भी दुर्लभ है, जब अधिकांश कलाकार दो-तीन भाषाओं में सिमटे हैं। उनकी विरासत इस बात की भी याद दिलाती है कि भारतीय संगीत उद्योग ने अपने सबसे बहुमुखी कलाकारों को वह दीर्घकालिक मान्यता नहीं दी जिसके वे हक़दार थे।
RashtraPress
15 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हेमलता बाली कौन हैं और उन्हें किस गीत से प्रसिद्धि मिली?
हेमलता बाली बॉलीवुड की एक शास्त्रीय संगीत-प्रशिक्षित प्लेबैक सिंगर हैं, जिनका जन्म 16 अगस्त 1954 को हैदराबाद में हुआ था। उन्हें सबसे अधिक प्रसिद्धि 'अंखियों के झरोखों से' गीत से मिली और उन्होंने अपने करियर में 38 भाषाओं में 5,000 से अधिक गीत गाए।
हेमलता बाली ने फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार कब और किस फ़िल्म के लिए जीता?
हेमलता बाली ने 1977 में फ़िल्म 'चितचोर' के लिए फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ महिला पार्श्व गायिका पुरस्कार जीता। इस फ़िल्म में उन्होंने येसुदास के साथ युगल गीत 'तू जो मेरे सुर में' गाया था, जिसकी रचना रवींद्र जैन ने की थी। 1977 से 1981 के बीच वे इस पुरस्कार के लिए पाँच बार नामांकित हुईं।
हेमलता बाली का असली नाम और परिवार क्या है?
हेमलता बाली का असली नाम लता भट्ट है। वे राजस्थान के चुरू जिले के सेहला गाँव से संबंधित एक मारवाड़ी ब्राह्मण परिवार से हैं। उनके पिता पंडित जयचंद भट्ट उनके पहले संगीत गुरु थे। उनके पति योगेश बाली का 1988 में निधन हो गया और उनके पुत्र आदित्य बाली अभिनय क्षेत्र में कदम रखने की तैयारी में हैं।
हेमलता बाली ने किन-किन संगीतकारों और गायकों के साथ काम किया?
हेमलता ने कल्याणजी-आनंदजी और लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल जैसे प्रमुख संगीतकारों के साथ काम किया। उन्होंने मोहम्मद रफ़ी, किशोर कुमार, मुकेश, लता मंगेशकर और आशा भोसले के साथ युगल गीत गाए। संगीतकार रवींद्र जैन के साथ उनकी जोड़ी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही।
हेमलता बाली के सबसे लोकप्रिय गीत कौन से हैं?
हेमलता बाली के सबसे लोकप्रिय गीतों में 'अंखियों के झरोखों से', 'कौन दिशा में लेके चला रे बटोहिया', और 'तू इस तरह से मेरी ज़िंदगी में' शामिल हैं। ये गीत दशकों बाद भी संगीत प्रेमियों के बीच उतने ही लोकप्रिय हैं।
राष्ट्र प्रेस
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