30 सितंबर 2026
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रबी सम्मेलन 2026: तिलहन-दलहन उत्पादन बढ़ाने पर जोर, ICAR प्रमुख मांगी लाल जाट ने गिनाई प्राथमिकताएँ

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रबी सम्मेलन 2026: तिलहन-दलहन उत्पादन बढ़ाने पर जोर, ICAR प्रमुख मांगी लाल जाट ने गिनाई प्राथमिकताएँ

सारांश

रबी सीजन 2026 की तैयारी के लिए नई दिल्ली में हुए दो-दिवसीय कृषि सम्मेलन में तिलहन-दलहन में आत्मनिर्भरता, उर्वरक के संतुलित उपयोग और जलवायु अनुकूल खेती को एजेंडे में सबसे ऊपर रखा गया। ICAR प्रमुख मांगी लाल जाट ने किसानों तक योजनाओं का लाभ पहुँचाने और पश्चिम एशिया संकट के बीच सब्सिडी बोझ घटाने की ज़रूरत पर बल दिया।

मुख्य बातें

ICAR महानिदेशक मांगी लाल जाट की अध्यक्षता में 29 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में दो-दिवसीय रबी कृषि सम्मेलन संपन्न हुआ।
सम्मेलन में तिलहन और दलहन उत्पादन बढ़ाने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई; राज्यों को तत्काल कार्ययोजना बनाने के निर्देश।
जिला स्तर पर उर्वरक उपयोग की सिफारिशें संशोधित की गईं; संतुलित उपयोग से किसानों की लागत, मिट्टी की सेहत और सरकारी व्यय तीनों पर सकारात्मक असर पड़ेगा।
पश्चिम एशिया संकट के कारण उर्वरक सब्सिडी का बोझ बढ़ने की बात सामने आई; विवेकपूर्ण उपयोग पर जोर।
पंजाब ने केंद्र सरकार से डीएपी (DAP) की समय पर उपलब्धता और आवश्यक धनराशि जारी करने की माँग की।
टिकाऊ कृषि, डिजिटल कृषि और जलवायु अनुकूल खेती भी सम्मेलन के प्रमुख विषयों में शामिल रहे।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक मांगी लाल जाट ने 29 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित रबी कृषि सम्मेलन के बाद पत्रकारों को बताया कि इस दो-दिवसीय सम्मेलन का केंद्रीय उद्देश्य राज्यों के साथ मिलकर एक ऐसी कार्ययोजना तैयार करना था, जिससे किसानों को आगामी रबी सीजन में समय पर बीज, फसल और उर्वरक संबंधी सुविधाएँ उपलब्ध हो सकें। सम्मेलन में तिलहन, दलहन और उर्वरक के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के साथ-साथ टिकाऊ कृषि, डिजिटल खेती और जलवायु अनुकूल कृषि पद्धतियों पर विस्तृत विमर्श हुआ।

सम्मेलन की मुख्य प्राथमिकताएँ

सम्मेलन में सभी राज्यों के कृषि अधिकारियों और मंत्रियों ने भाग लिया। जाट ने बताया कि प्रत्येक राज्य की भौगोलिक और कृषि संबंधी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यह मंथन किया गया कि किस क्षेत्र में कौन-सी फसल और कौन-सी किस्म किसानों के लिए सबसे उपयुक्त रहेगी। उन्होंने विशेष जोर दिया कि कोई भी किसान सरकारी योजनाओं और कृषि सुविधाओं से वंचित न रहे।

तिलहन और दलहन उत्पादन को बढ़ाना इस सम्मेलन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक रहा। राज्यों को निर्देश दिया गया कि वे अपनी स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार कार्ययोजना तैयार करें और उसका तत्काल क्रियान्वयन सुनिश्चित करें। यह ऐसे समय में आया है जब भारत खाद्य तेल और दालों के आयात पर भारी निर्भरता कम करने की दिशा में प्रयासरत है।

उर्वरक उपलब्धता और संतुलित उपयोग पर जोर

मांगी लाल जाट ने बताया कि किसानों की प्रमुख चिंताओं में उर्वरकों की समय पर उपलब्धता शामिल है। इसके लिए न केवल पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने, बल्कि उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर भी विशेष बल दिया गया। उन्होंने बताया कि जिला स्तर पर उर्वरक उपयोग की सिफारिशों को संशोधित किया गया है और किसानों को इन्हीं संशोधित सिफारिशों के आधार पर उर्वरक उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

जाट के अनुसार, इस कदम से किसानों की उत्पादन लागत में कमी आएगी, मिट्टी की सेहत बनी रहेगी और देश के संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा।

पश्चिम एशिया संकट और उर्वरक सब्सिडी का बोझ

जाट ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी हालिया संकट के कारण उर्वरक सब्सिडी का बोझ सरकार पर पहले से अधिक बढ़ा है। ऐसे में उर्वरकों के विवेकपूर्ण और आवश्यकतानुसार उपयोग की ज़रूरत और अधिक बढ़ गई है। उनके अनुसार, अनावश्यक उर्वरक उपयोग में कमी आने से सरकारी व्यय घटेगा, भूमि स्वास्थ्य सुधरेगा और किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव भी नहीं पड़ेगा।

गौरतलब है कि भारत उर्वरकों के लिए आयात पर काफी हद तक निर्भर है और वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल इसकी कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला दोनों को सीधे प्रभावित करती है।

पंजाब ने उठाई डीएपी आपूर्ति की माँग

पंजाब के प्रतिनिधि ने सम्मेलन में राज्य के कृषि योगदान का उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार से माँग की कि किसानों की ज़रूरतों, विशेष रूप से डीएपी (DAP) जैसे उर्वरकों की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए समय पर आवश्यक धनराशि जारी की जाए। यह माँग इस बात का संकेत देती है कि उर्वरक वितरण में केंद्र-राज्य समन्वय अभी भी एक महत्वपूर्ण चुनौती बना हुआ है।

आगे की राह

सम्मेलन के निष्कर्षों के आधार पर राज्यों को अपनी-अपनी रबी कार्ययोजनाएँ शीघ्र अंतिम रूप देने का निर्देश दिया गया है। ICAR और कृषि मंत्रालय मिलकर राज्य-स्तरीय क्रियान्वयन की निगरानी करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि तिलहन और दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए न केवल बेहतर बीज और उर्वरक आपूर्ति, बल्कि जलवायु अनुकूल खेती के व्यापक प्रसार की भी आवश्यकता होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी भारत खाद्य तेल आयात पर सालाना अरबों डॉलर खर्च करता है। असली सवाल यह है कि जिला-स्तरीय उर्वरक सिफारिशों के संशोधन और राज्यों को दिए गए निर्देशों को ज़मीन पर लागू करने की निगरानी का तंत्र कितना मज़बूत है। पंजाब की डीएपी माँग यह भी उजागर करती है कि केंद्र-राज्य समन्वय में अभी भी गंभीर खामियाँ हैं। पश्चिम एशिया संकट का हवाला देकर सब्सिडी विवेक की बात तो ठीक है, लेकिन छोटे किसानों पर इसके असर की स्वतंत्र समीक्षा ज़रूरी होगी।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रबी कृषि सम्मेलन 2026 में क्या-क्या तय हुआ?
29 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में हुए दो-दिवसीय रबी सम्मेलन में तिलहन-दलहन उत्पादन बढ़ाने, उर्वरकों के संतुलित उपयोग और टिकाऊ व डिजिटल खेती को प्रमुख एजेंडे पर रखा गया। सभी राज्यों के अधिकारियों और मंत्रियों की भागीदारी में स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए गए।
ICAR महानिदेशक मांगी लाल जाट ने उर्वरकों के बारे में क्या कहा?
ICAR महानिदेशक मांगी लाल जाट ने कहा कि जिला स्तर पर उर्वरक उपयोग की सिफारिशें संशोधित की गई हैं और किसानों को इन्हीं के आधार पर उर्वरक इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि पश्चिम एशिया संकट के कारण उर्वरक सब्सिडी का बोझ बढ़ा है, इसलिए विवेकपूर्ण उपयोग और भी ज़रूरी हो गया है।
तिलहन और दलहन उत्पादन बढ़ाना क्यों ज़रूरी है?
भारत खाद्य तेल और दालों के आयात पर बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च करता है। घरेलू तिलहन और दलहन उत्पादन बढ़ाने से आयात निर्भरता कम होगी, किसानों की आय बढ़ेगी और देश खाद्य सुरक्षा के मामले में अधिक आत्मनिर्भर बनेगा।
पंजाब ने सम्मेलन में क्या माँग रखी?
पंजाब के प्रतिनिधि ने केंद्र सरकार से माँग की कि किसानों की ज़रूरतों, विशेष रूप से डीएपी (DAP) जैसे उर्वरकों की उपलब्धता को सुनिश्चित करने के लिए समय पर आवश्यक धनराशि जारी की जाए। यह माँग उर्वरक वितरण में केंद्र-राज्य समन्वय की ज़रूरत को रेखांकित करती है।
रबी सीजन के लिए किसानों को अब क्या उम्मीद है?
सम्मेलन के निर्देशों के आधार पर राज्य अपनी-अपनी रबी कार्ययोजनाएँ शीघ्र अंतिम रूप देंगे। किसानों को समय पर उन्नत बीज, उचित उर्वरक सिफारिशें और सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा; ICAR और कृषि मंत्रालय राज्य-स्तरीय क्रियान्वयन की निगरानी करेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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