अल नीनो प्रभावित 225 जिलों के लिए केंद्र की आपातकालीन रबी योजना, ICAR का नया कृषि डैशबोर्ड करेगा बुवाई में मदद
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने अल नीनो मौसम प्रणाली के कारण इस वर्ष अनियमित मानसून से प्रभावित देशभर के 225 जिलों में रबी सीजन 2026-27 की बुवाई को सुगम बनाने के लिए एक विशेष आपातकालीन योजना तैयार की है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) इस योजना के तहत एक गतिशील कृषि डैशबोर्ड विकसित कर रही है, जो जिला स्तर पर वास्तविक समय की जानकारी उपलब्ध कराएगा।
नया कृषि डैशबोर्ड क्या करेगा
ICAR के महानिदेशक एमएल जाट ने पत्रकारों को बताया, 'हम एक गतिशील डैशबोर्ड विकसित करके आकस्मिक योजना को एक नए स्तर पर ले जा रहे हैं। यह डैशबोर्ड भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के साप्ताहिक पूर्वानुमानों, जल निकायों से संबंधित आंकड़ों और अन्य प्रासंगिक जानकारियों को एकीकृत करेगा, जिससे अधिकारियों को स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर निर्णय लेने में मदद मिलेगी।'
यह प्लेटफॉर्म केवल आपातकालीन योजना के लिए चिन्हित 225 जिलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे देश को कवर करेगा। डैशबोर्ड सामान्य कृषि परिस्थितियों में भी किसानों और अधिकारियों को सलाह देने में सक्षम होगा।
रबी बुवाई की मौजूदा स्थिति
30 अक्टूबर 2026 तक लगभग 38 लाख हेक्टेयर में रबी की फसलें — जिनमें गेहूं प्रमुख है — बोई जा चुकी हैं। यह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में लगभग 46 प्रतिशत कम है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, यह गिरावट आंशिक रूप से गेहूं उत्पादक क्षेत्रों में बेमौसम बारिश के कारण हुई देरी से है और आने वाले हफ्तों में बुवाई में तेजी आने की उम्मीद है।
गौरतलब है कि अल नीनो वर्षों में मानसून की अनिश्चितता के चलते खरीफ के बाद रबी सीजन की शुरुआत अक्सर बाधित होती है। यह ऐसे समय में आया है जब सरकार खाद्य सुरक्षा और किसानों की आय को लेकर विशेष सतर्कता बरत रही है।
सूखाग्रस्त जिलों के आकलन में बदलाव
महानिदेशक जाट ने स्पष्ट किया कि जिस जिले को पहले सूखाग्रस्त श्रेणी में रखा गया था, आने वाले दिनों में पर्याप्त वर्षा होने पर वह उस श्रेणी से बाहर निकल सकता है। उन्होंने कहा कि IMD के ताजा पूर्वानुमानों और बारिश के आंकड़ों — जिनमें अगले 15 दिनों के अनुमान भी शामिल हैं — का उपयोग करके आकलन को नियमित रूप से संशोधित किया जाएगा।
फसल विविधता और मृदा स्वास्थ्य पर जोर
ICAR ने धान की कटाई के बाद खाली पड़ी जमीनों में तिलहन और दलहन की खेती बढ़ाने के अवसरों का अध्ययन करने के लिए एक विशेष कार्य बल का गठन किया है। जाट के अनुसार, 'जिन स्थानों पर गेहूं के लिए मिट्टी में नमी अपर्याप्त है, वहाँ किसान उपयुक्त तिलहन और दलहन की फसलें उगाने पर विचार कर सकते हैं।'
इसके अलावा, अगले दो से चार महीनों में एक अलग मृदा स्वास्थ्य नीति लागू किए जाने की उम्मीद है, जो किसानों को पोषक तत्वों की कमी के आधार पर उर्वरकों के कुशल उपयोग की योजना बनाने में सक्षम बनाएगी।
एग्रीस्टैक से एकीकरण का लक्ष्य
ICAR का दीर्घकालिक उद्देश्य इस डैशबोर्ड को सरकार की एग्रीस्टैक पहल के साथ एकीकृत करना है, ताकि विभिन्न कृषि स्रोतों की जानकारी एक ही मंच पर उपलब्ध हो सके। यदि यह एकीकरण सफल होता है, तो यह भारतीय कृषि नीति-निर्माण में डेटा-संचालित निर्णयों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।