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अल नीनो प्रभावित 225 जिलों के लिए केंद्र की आपातकालीन रबी योजना, ICAR का नया कृषि डैशबोर्ड करेगा बुवाई में मदद

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अल नीनो प्रभावित 225 जिलों के लिए केंद्र की आपातकालीन रबी योजना, ICAR का नया कृषि डैशबोर्ड करेगा बुवाई में मदद

सारांश

अल नीनो के कारण रबी बुवाई पिछले साल से 46% पीछे है और 225 जिले प्रभावित हैं। ICAR अब एक गतिशील डैशबोर्ड से इस संकट का जवाब देने की तैयारी में है — जो IMD पूर्वानुमान, जल आंकड़े और एग्रीस्टैक को जोड़ेगा। यह पहला मौका है जब आकस्मिक योजना को रियल-टाइम डेटा से संचालित किया जाएगा।

मुख्य बातें

केंद्र सरकार ने अल नीनो से प्रभावित 225 जिलों में रबी सीजन 2026-27 के लिए विशेष आपातकालीन योजना तैयार की।
30 अक्टूबर 2026 तक रबी बुवाई केवल 38 लाख हेक्टेयर में हुई — पिछले वर्ष की तुलना में 46% कम ।
ICAR का नया डैशबोर्ड IMD के साप्ताहिक पूर्वानुमान, जल निकाय डेटा और 15 दिनों के अनुमान एकीकृत करेगा।
डैशबोर्ड को भविष्य में एग्रीस्टैक पहल से जोड़ने की योजना है।
अगले 2 से 4 महीनों में अलग मृदा स्वास्थ्य नीति लागू होने की उम्मीद।
जहाँ गेहूं के लिए नमी अपर्याप्त है, वहाँ किसानों को तिलहन और दलहन की खेती का सुझाव।

केंद्र सरकार ने अल नीनो मौसम प्रणाली के कारण इस वर्ष अनियमित मानसून से प्रभावित देशभर के 225 जिलों में रबी सीजन 2026-27 की बुवाई को सुगम बनाने के लिए एक विशेष आपातकालीन योजना तैयार की है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) इस योजना के तहत एक गतिशील कृषि डैशबोर्ड विकसित कर रही है, जो जिला स्तर पर वास्तविक समय की जानकारी उपलब्ध कराएगा।

नया कृषि डैशबोर्ड क्या करेगा

ICAR के महानिदेशक एमएल जाट ने पत्रकारों को बताया, 'हम एक गतिशील डैशबोर्ड विकसित करके आकस्मिक योजना को एक नए स्तर पर ले जा रहे हैं। यह डैशबोर्ड भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के साप्ताहिक पूर्वानुमानों, जल निकायों से संबंधित आंकड़ों और अन्य प्रासंगिक जानकारियों को एकीकृत करेगा, जिससे अधिकारियों को स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर निर्णय लेने में मदद मिलेगी।'

यह प्लेटफॉर्म केवल आपातकालीन योजना के लिए चिन्हित 225 जिलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे देश को कवर करेगा। डैशबोर्ड सामान्य कृषि परिस्थितियों में भी किसानों और अधिकारियों को सलाह देने में सक्षम होगा।

रबी बुवाई की मौजूदा स्थिति

30 अक्टूबर 2026 तक लगभग 38 लाख हेक्टेयर में रबी की फसलें — जिनमें गेहूं प्रमुख है — बोई जा चुकी हैं। यह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में लगभग 46 प्रतिशत कम है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, यह गिरावट आंशिक रूप से गेहूं उत्पादक क्षेत्रों में बेमौसम बारिश के कारण हुई देरी से है और आने वाले हफ्तों में बुवाई में तेजी आने की उम्मीद है।

गौरतलब है कि अल नीनो वर्षों में मानसून की अनिश्चितता के चलते खरीफ के बाद रबी सीजन की शुरुआत अक्सर बाधित होती है। यह ऐसे समय में आया है जब सरकार खाद्य सुरक्षा और किसानों की आय को लेकर विशेष सतर्कता बरत रही है।

सूखाग्रस्त जिलों के आकलन में बदलाव

महानिदेशक जाट ने स्पष्ट किया कि जिस जिले को पहले सूखाग्रस्त श्रेणी में रखा गया था, आने वाले दिनों में पर्याप्त वर्षा होने पर वह उस श्रेणी से बाहर निकल सकता है। उन्होंने कहा कि IMD के ताजा पूर्वानुमानों और बारिश के आंकड़ों — जिनमें अगले 15 दिनों के अनुमान भी शामिल हैं — का उपयोग करके आकलन को नियमित रूप से संशोधित किया जाएगा।

फसल विविधता और मृदा स्वास्थ्य पर जोर

ICAR ने धान की कटाई के बाद खाली पड़ी जमीनों में तिलहन और दलहन की खेती बढ़ाने के अवसरों का अध्ययन करने के लिए एक विशेष कार्य बल का गठन किया है। जाट के अनुसार, 'जिन स्थानों पर गेहूं के लिए मिट्टी में नमी अपर्याप्त है, वहाँ किसान उपयुक्त तिलहन और दलहन की फसलें उगाने पर विचार कर सकते हैं।'

इसके अलावा, अगले दो से चार महीनों में एक अलग मृदा स्वास्थ्य नीति लागू किए जाने की उम्मीद है, जो किसानों को पोषक तत्वों की कमी के आधार पर उर्वरकों के कुशल उपयोग की योजना बनाने में सक्षम बनाएगी।

एग्रीस्टैक से एकीकरण का लक्ष्य

ICAR का दीर्घकालिक उद्देश्य इस डैशबोर्ड को सरकार की एग्रीस्टैक पहल के साथ एकीकृत करना है, ताकि विभिन्न कृषि स्रोतों की जानकारी एक ही मंच पर उपलब्ध हो सके। यदि यह एकीकरण सफल होता है, तो यह भारतीय कृषि नीति-निर्माण में डेटा-संचालित निर्णयों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या डैशबोर्ड जैसे तकनीकी समाधान ज़मीनी हकीकत में बदल पाएंगे — जहाँ सिंचाई की उपलब्धता, बीज वितरण और बाजार तक पहुँच जैसी बुनियादी चुनौतियाँ अभी भी अनसुलझी हैं। एग्रीस्टैक एकीकरण की घोषणाएँ पहले भी हो चुकी हैं, पर क्रियान्वयन अक्सर पीछे रहा है। मृदा स्वास्थ्य नीति और कार्य बल का गठन स्वागतयोग्य है, लेकिन सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि यह डेटा किसानों तक उनकी भाषा में और समय पर पहुँचे — केवल अधिकारियों के कंप्यूटर स्क्रीन तक नहीं।
RashtraPress
7 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अल नीनो से प्रभावित 225 जिलों के लिए केंद्र की क्या योजना है?
केंद्र सरकार ने इन जिलों में रबी सीजन 2026-27 की बुवाई सुगम बनाने के लिए एक आपातकालीन योजना तैयार की है। ICAR एक गतिशील डैशबोर्ड विकसित कर रही है जो IMD के पूर्वानुमान और जल आंकड़ों के आधार पर जिला स्तर पर निर्णय लेने में मदद करेगा।
इस साल रबी बुवाई इतनी कम क्यों है?
30 अक्टूबर 2026 तक रबी बुवाई पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 46% कम, यानी करीब 38 लाख हेक्टेयर रही। इसके पीछे अल नीनो से उत्पन्न अनियमित मानसून के साथ-साथ गेहूं उत्पादक क्षेत्रों में बेमौसम बारिश से हुई देरी भी जिम्मेदार बताई जा रही है।
ICAR का नया कृषि डैशबोर्ड कैसे काम करेगा?
यह डैशबोर्ड IMD के साप्ताहिक मौसम पूर्वानुमान, जल निकायों के आंकड़े और 15 दिनों के अनुमान को एकीकृत करेगा। इससे अधिकारी और किसान जिला स्तर पर वास्तविक समय की जानकारी के आधार पर फसल संबंधी निर्णय ले सकेंगे।
जहाँ गेहूं के लिए नमी नहीं है वहाँ किसानों को क्या करना चाहिए?
ICAR महानिदेशक एमएल जाट के अनुसार, जिन स्थानों पर गेहूं के लिए मिट्टी में पर्याप्त नमी नहीं है, वहाँ किसान तिलहन और दलहन की उपयुक्त फसलें उगाने पर विचार कर सकते हैं। ICAR ने धान कटाई के बाद खाली जमीन पर फसल विविधता की संभावनाओं के अध्ययन के लिए एक कार्य बल भी गठित किया है।
मृदा स्वास्थ्य नीति कब तक आएगी?
ICAR महानिदेशक के अनुसार अगले दो से चार महीनों में एक अलग मृदा स्वास्थ्य नीति लागू होने की उम्मीद है। यह नीति किसानों को पोषक तत्वों की कमी के आधार पर उर्वरकों के कुशल और लक्षित उपयोग की योजना बनाने में सहायक होगी।
राष्ट्र प्रेस
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