अल नीनो से आंध्र प्रदेश में 50.7% कम बारिश, CM चंद्रबाबू नायडू ने की समीक्षा बैठक
सारांश
मुख्य बातें
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने रविवार, 20 सितंबर 2026 को अमरावती से अल नीनो के प्रभावों की उच्चस्तरीय समीक्षा की और राज्य के सभी विभागों को इस मौसमी चुनौती से सुनियोजित तरीके से निपटने का आह्वान किया। राज्य में 50.7 प्रतिशत की वर्षा कमी दर्ज की गई है, जिससे कृषि और खाद्य आपूर्ति दोनों पर दबाव बढ़ रहा है।
टेलीकांफ्रेंस के ज़रिए समीक्षा
मुख्यमंत्री नायडू ने विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों, जिला कलेक्टरों और रायथु सेवा केंद्रों के कर्मियों के साथ टेलीकांफ्रेंस के माध्यम से संवाद किया। उन्होंने अल नीनो के असर, स्थिति से निपटने के आवश्यक उपायों और कार्य योजना के कार्यान्वयन की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने कम अवधि और मध्यम अवधि — दोनों प्रकार की योजनाएं अपनाने का सुझाव दिया।
मुख्य घटनाक्रम — कृषि पर असर
वर्षा की सबसे अधिक कमी प्रकाशम, अन्नमय्या और सत्य साईं जिलों में दर्ज की गई है। खरीफ सीजन में 30.84 लाख हेक्टेयर भूमि पर खेती की योजना बनाई गई थी, लेकिन अल नीनो के प्रभाव के चलते अब तक केवल 79 प्रतिशत भूमि पर ही बुआई संभव हो पाई है। दालों की खेती अपेक्षाकृत संतोषजनक है, जबकि तिलहन की बुआई कम रही है।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब खरीफ सीजन की फसल से राज्य की खाद्य सुरक्षा और किसानों की आय दोनों जुड़ी हैं। अल नीनो का असर केवल कृषि तक सीमित नहीं — इसका प्रभाव सभी क्षेत्रों पर पड़ता है, यह बात स्वयं मुख्यमंत्री ने रेखांकित की।
कीमतें नियंत्रित करने के निर्देश
नायडू ने अधिकारियों को चावल, प्याज, पाम ऑयल और अरहर दाल की कीमतों को नियंत्रित रखने के स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि चावल के स्टॉक की जाँच की जाए और बाजार में आपूर्ति बनाए रखने के लिए स्टॉक जारी किया जाए। प्याज की कीमतें थामने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों से खरीद की जा रही है और भविष्य की माँग को ध्यान में रखते हुए इसकी खेती को प्रोत्साहित करने की बात कही गई।
अधिकारियों को यह भी कहा गया कि किचन गार्डन को बढ़ावा दिया जाए और स्वयं-सहायता समूहों (SHG) के ज़रिए सब्जियाँ उगाई जाएं, ताकि सब्जियों की कीमतों पर दबाव न पड़े।
फसल बीमा और एमएसपी पर ज़ोर
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार ने फसल बीमा का इंतज़ाम किया है और यदि फसल का नुकसान होता है, तो यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बीमा राशि सीधे किसानों तक पहुँचे। उन्होंने अधिकारियों से केंद्र सरकार के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तंत्र के साथ समन्वय बनाए रखने को भी कहा।
अधिक जोखिम वाले RSK क्षेत्रों में बागवानी फसलों की सहायता के लिए आवंटित धन का सही उपयोग सुनिश्चित करने की भी ताकीद की गई। उन्होंने बाजार की माँग के अनुसार फसलें उगाने पर विशेष जोर दिया।
आगे की राह
नायडू ने यह भी कहा कि अल नीनो की स्थिति का पहले से अनुमान लगा लिया गया था और सभी विभागों को पूर्व-निर्धारित एक्शन प्लान के अनुसार काम करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि अधिकारियों की लापरवाही के कारण किसानों या उपभोक्ताओं को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए — यह सरकार की प्राथमिक ज़िम्मेदारी है। आने वाले हफ्तों में कार्य योजना के कार्यान्वयन की नियमित समीक्षा जारी रहेगी।