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अल नीनो से आंध्र प्रदेश में 50.7% कम बारिश, CM चंद्रबाबू नायडू ने की समीक्षा बैठक

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अल नीनो से आंध्र प्रदेश में 50.7% कम बारिश, CM चंद्रबाबू नायडू ने की समीक्षा बैठक

सारांश

आंध्र प्रदेश में अल नीनो के कारण 50.7% कम बारिश, खरीफ बुआई 79% तक सिमटी। CM चंद्रबाबू नायडू ने टेलीकांफ्रेंस कर अधिकारियों को कीमतें नियंत्रित रखने, किसानों तक बीमा पहुँचाने और किचन गार्डन बढ़ावा देने के सख्त निर्देश दिए।

मुख्य बातें

आंध्र प्रदेश में अल नीनो के कारण राज्यभर में 50.7% की वर्षा कमी दर्ज की गई है।
सबसे अधिक प्रभावित जिले: प्रकाशम , अन्नमय्या और सत्य साईं ।
खरीफ सीजन में 30.84 लाख हेक्टेयर में से केवल 79% भूमि पर बुआई हो पाई है।
CM नायडू ने चावल, प्याज, पाम ऑयल और अरहर दाल की कीमतें नियंत्रित रखने के निर्देश दिए।
फसल नुकसान होने पर बीमा राशि सीधे किसानों तक पहुँचाने की गारंटी दी गई।
किचन गार्डन और स्वयं-सहायता समूहों के ज़रिए सब्जियाँ उगाने को प्रोत्साहन दिया जाएगा।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने रविवार, 20 सितंबर 2026 को अमरावती से अल नीनो के प्रभावों की उच्चस्तरीय समीक्षा की और राज्य के सभी विभागों को इस मौसमी चुनौती से सुनियोजित तरीके से निपटने का आह्वान किया। राज्य में 50.7 प्रतिशत की वर्षा कमी दर्ज की गई है, जिससे कृषि और खाद्य आपूर्ति दोनों पर दबाव बढ़ रहा है।

टेलीकांफ्रेंस के ज़रिए समीक्षा

मुख्यमंत्री नायडू ने विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों, जिला कलेक्टरों और रायथु सेवा केंद्रों के कर्मियों के साथ टेलीकांफ्रेंस के माध्यम से संवाद किया। उन्होंने अल नीनो के असर, स्थिति से निपटने के आवश्यक उपायों और कार्य योजना के कार्यान्वयन की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने कम अवधि और मध्यम अवधि — दोनों प्रकार की योजनाएं अपनाने का सुझाव दिया।

मुख्य घटनाक्रम — कृषि पर असर

वर्षा की सबसे अधिक कमी प्रकाशम, अन्नमय्या और सत्य साईं जिलों में दर्ज की गई है। खरीफ सीजन में 30.84 लाख हेक्टेयर भूमि पर खेती की योजना बनाई गई थी, लेकिन अल नीनो के प्रभाव के चलते अब तक केवल 79 प्रतिशत भूमि पर ही बुआई संभव हो पाई है। दालों की खेती अपेक्षाकृत संतोषजनक है, जबकि तिलहन की बुआई कम रही है।

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब खरीफ सीजन की फसल से राज्य की खाद्य सुरक्षा और किसानों की आय दोनों जुड़ी हैं। अल नीनो का असर केवल कृषि तक सीमित नहीं — इसका प्रभाव सभी क्षेत्रों पर पड़ता है, यह बात स्वयं मुख्यमंत्री ने रेखांकित की।

कीमतें नियंत्रित करने के निर्देश

नायडू ने अधिकारियों को चावल, प्याज, पाम ऑयल और अरहर दाल की कीमतों को नियंत्रित रखने के स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि चावल के स्टॉक की जाँच की जाए और बाजार में आपूर्ति बनाए रखने के लिए स्टॉक जारी किया जाए। प्याज की कीमतें थामने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों से खरीद की जा रही है और भविष्य की माँग को ध्यान में रखते हुए इसकी खेती को प्रोत्साहित करने की बात कही गई।

अधिकारियों को यह भी कहा गया कि किचन गार्डन को बढ़ावा दिया जाए और स्वयं-सहायता समूहों (SHG) के ज़रिए सब्जियाँ उगाई जाएं, ताकि सब्जियों की कीमतों पर दबाव न पड़े।

फसल बीमा और एमएसपी पर ज़ोर

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार ने फसल बीमा का इंतज़ाम किया है और यदि फसल का नुकसान होता है, तो यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बीमा राशि सीधे किसानों तक पहुँचे। उन्होंने अधिकारियों से केंद्र सरकार के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तंत्र के साथ समन्वय बनाए रखने को भी कहा।

अधिक जोखिम वाले RSK क्षेत्रों में बागवानी फसलों की सहायता के लिए आवंटित धन का सही उपयोग सुनिश्चित करने की भी ताकीद की गई। उन्होंने बाजार की माँग के अनुसार फसलें उगाने पर विशेष जोर दिया।

आगे की राह

नायडू ने यह भी कहा कि अल नीनो की स्थिति का पहले से अनुमान लगा लिया गया था और सभी विभागों को पूर्व-निर्धारित एक्शन प्लान के अनुसार काम करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि अधिकारियों की लापरवाही के कारण किसानों या उपभोक्ताओं को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए — यह सरकार की प्राथमिक ज़िम्मेदारी है। आने वाले हफ्तों में कार्य योजना के कार्यान्वयन की नियमित समीक्षा जारी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी — विशेषकर जब राज्य के तीन जिलों में वर्षा की कमी सबसे तीव्र है और खरीफ की बुआई पहले ही पिछड़ चुकी है। अल नीनो के असर को 'पहले से भाँप लेने' का दावा उचित है, लेकिन 50.7% वर्षा घाटे के बावजूद बाजार में कीमतें स्थिर रखना एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती होगी। फसल बीमा का इंतज़ाम होना जितना ज़रूरी है, उतना ही ज़रूरी है कि बीमा दावों का निपटारा समयबद्ध हो — जो भारतीय कृषि बीमा प्रणाली में ऐतिहासिक रूप से सबसे कमज़ोर कड़ी रही है।
RashtraPress
21 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आंध्र प्रदेश में अल नीनो का कितना असर हुआ है?
राज्य में औसतन 50.7% की वर्षा कमी दर्ज की गई है। सबसे अधिक प्रभावित जिले प्रकाशम, अन्नमय्या और सत्य साईं हैं, जहाँ खरीफ बुआई भी बुरी तरह प्रभावित हुई है।
खरीफ फसल पर क्या असर पड़ा है?
राज्य में खरीफ सीजन के लिए 30.84 लाख हेक्टेयर में खेती की योजना थी, लेकिन अल नीनो की वजह से अब तक केवल 79% भूमि पर बुआई हो पाई है। दालों की स्थिति संतोषजनक है, जबकि तिलहन की बुआई कम रही।
CM नायडू ने कीमतें नियंत्रित करने के लिए क्या निर्देश दिए?
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को चावल का स्टॉक बाजार में जारी करने, अलग-अलग क्षेत्रों से प्याज की खरीद जारी रखने और पाम ऑयल व अरहर दाल पर पहले से लिए गए फैसलों को तेजी से लागू करने के निर्देश दिए।
किसानों को फसल नुकसान होने पर क्या मदद मिलेगी?
मुख्यमंत्री नायडू ने स्पष्ट किया कि फसल बीमा का इंतज़ाम पहले से किया गया है और नुकसान की स्थिति में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बीमा राशि सीधे किसानों तक पहुँचे।
सब्जियों की कीमतें नियंत्रित रखने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
अधिकारियों को किचन गार्डन को बढ़ावा देने और स्वयं-सहायता समूहों के ज़रिए सब्जियाँ उगाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि स्थानीय स्तर पर आपूर्ति बनाए रखी जा सके और कीमतों पर दबाव कम हो।
राष्ट्र प्रेस
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