15 जुलाई 2026
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झारखंड में 54% तक कम बारिश: सूखे की आशंका, सरकार ने वैकल्पिक खेती और राहत योजनाओं की तैयारी तेज की

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झारखंड में 54% तक कम बारिश: सूखे की आशंका, सरकार ने वैकल्पिक खेती और राहत योजनाओं की तैयारी तेज की

सारांश

अल नीनो और कमज़ोर मानसून की दोहरी मार से झारखंड के अधिकांश जिलों में 54% तक कम बारिश हुई है। धान की रोपनी ठप है और सरकार मड़ुआ-मूंग जैसी वैकल्पिक फसलों व राहत योजनाओं के ज़रिए किसानों को संकट से उबारने की कोशिश में जुटी है।

मुख्य बातें

झारखंड में जून-जुलाई 2026 के दौरान सामान्य से 42 से 54 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई है।
गढ़वा, पलामू, चतरा, हजारीबाग, गोड्डा और साहिबगंज में वर्षा की कमी 60 प्रतिशत तक पहुँची।
राज्य के 16 जिलों में 20 से 59 प्रतिशत तक वर्षा कम रही; केवल सिमडेगा, पूर्वी और पश्चिमी सिंहभूम में स्थिति सामान्य।
सरकार ने मड़ुआ, उड़द, मूंग, अरहर और सोयाबीन की खेती को बढ़ावा देने के लिए मिलेट मिशन के तहत पंजीकरण अभियान शुरू किया।
मुख्यमंत्री सूखा राहत योजना और झारखंड राज्य फसल राहत योजना के तहत किसान पंजीकरण और आर्थिक सहायता की प्रक्रिया शुरू।
कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा — जुलाई अंत तक बारिश नहीं हुई तो राहत का दायरा और बढ़ाया जाएगा।

झारखंड में अल नीनो के प्रभाव और कमज़ोर मानसून के चलते सूखे की आशंका गहराती जा रही है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जून से जुलाई 2026 के शुरुआती हफ्तों में राज्य में सामान्य से 42 से 54 प्रतिशत तक कम वर्षा दर्ज की गई है, जिससे खरीफ फसलों — विशेषकर धान की रोपनी — पर सीधा असर पड़ा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने राहत उपायों और वैकल्पिक कृषि योजनाओं को तेज़ी से लागू करना शुरू कर दिया है।

जिलेवार वर्षा की स्थिति

मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पलामू प्रमंडल के गढ़वा, पलामू और चतरा के साथ-साथ हजारीबाग, गोड्डा और साहिबगंज जैसे जिलों में सामान्य से 60 प्रतिशत तक कम बारिश हुई है। रांची, लोहरदगा, गुमला, लातेहार, धनबाद, बोकारो, गिरिडीह और देवघर सहित 16 जिलों में 20 से 59 प्रतिशत तक वर्षा की कमी दर्ज की गई है। केवल सिमडेगा, पूर्वी सिंहभूम और पश्चिमी सिंहभूम में बारिश सामान्य के करीब बनी हुई है।

धान की रोपनी पर असर

कम वर्षा के कारण जुलाई के मध्य तक भी राज्य के बड़े हिस्से में धान की रोपनी अपेक्षित गति नहीं पकड़ सकी है। यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड की कृषि आर्थिकी पहले से ही अनिश्चित मानसून पर निर्भर रहती है, और राज्य के अधिकांश किसान वर्षा-आधारित खेती करते हैं। गौरतलब है कि झारखंड में सिंचाई का बुनियादी ढाँचा सीमित है, जिससे मानसून की विफलता का असर और गहरा हो जाता है।

वैकल्पिक खेती की पहल

राज्य सरकार ने किसानों को कम पानी में उगने वाली फसलों की ओर प्रोत्साहित करना शुरू किया है। मड़ुआ (रागी), उड़द, मूंग, अरहर और सोयाबीन जैसी फसलों को बढ़ावा दिया जा रहा है। मिलेट मिशन के तहत पंचायत स्तर पर पंजीकरण अभियान चलाया जा रहा है। किसानों तक नई तकनीक और वैकल्पिक खेती की जानकारी पहुँचाने के लिए कृषि रथ का परिचालन और खरीफ मेलों के आयोजन के निर्देश दिए गए हैं।

सरकारी राहत योजनाओं की तैयारी

राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री सूखा राहत योजना और झारखंड राज्य फसल राहत योजना के तहत तैयारियाँ तेज कर दी हैं। सूखा प्रभावित प्रखंडों के किसानों को आर्थिक सहायता देने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। फसल राहत योजना के पोर्टल पर किसानों का पंजीकरण कराया जा रहा है, ताकि प्राकृतिक आपदा की स्थिति में उन्हें समय पर राहत मिल सके।

कृषि मंत्री का बयान और आगे की राह

कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा है कि सरकार मानसून की स्थिति पर लगातार नज़र रखे हुए है। उन्होंने कहा कि यदि जुलाई के अंत तक पर्याप्त बारिश नहीं होती, तो प्रभावित क्षेत्रों में राहत उपायों का दायरा और बढ़ाया जाएगा। आने वाले हफ्ते मानसून की दिशा और किसानों की स्थिति दोनों के लिए निर्णायक साबित होंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

2014 और 2019 में भी गंभीर सूखे झेल चुका है, लेकिन हर बार राहत तंत्र प्रतिक्रियाशील रहा है, न कि पूर्व-तैयार। इस बार मिलेट मिशन और फसल राहत पोर्टल जैसे कदम सकारात्मक हैं, परंतु असली सवाल यह है कि पंजीकरण से भुगतान तक की प्रक्रिया कितनी तेज़ और पारदर्शी होगी। आलोचकों का कहना है कि झारखंड में सिंचाई बुनियादी ढाँचे में दशकों की उपेक्षा ने राज्य को मानसून के सामने लाचार बना दिया है। जब तक दीर्घकालिक जल-प्रबंधन में निवेश नहीं होता, हर सूखे में यही राहत-और-प्रतीक्षा का चक्र दोहराता रहेगा।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड में 2026 में कितनी कम बारिश हुई है?
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जून और जुलाई 2026 के शुरुआती हफ्तों में झारखंड में सामान्य से 42 से 54 प्रतिशत तक कम वर्षा दर्ज की गई है। पलामू प्रमंडल और कुछ अन्य जिलों में यह कमी 60 प्रतिशत तक पहुँच गई है।
झारखंड में सूखे का धान की खेती पर क्या असर पड़ा है?
कम बारिश के कारण जुलाई के मध्य तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में धान की रोपनी अपेक्षित गति से नहीं हो सकी है। झारखंड की खेती मुख्यतः वर्षा पर निर्भर है, इसलिए मानसून की विफलता का सीधा असर खरीफ उत्पादन पर पड़ता है।
झारखंड सरकार किसानों की मदद के लिए क्या कर रही है?
सरकार ने मुख्यमंत्री सूखा राहत योजना और झारखंड राज्य फसल राहत योजना के तहत पंजीकरण और आर्थिक सहायता की प्रक्रिया शुरू की है। इसके साथ ही मड़ुआ, उड़द, मूंग, अरहर और सोयाबीन जैसी कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा देने के लिए मिलेट मिशन के तहत पंचायत स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है।
कौन से जिले सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं?
गढ़वा, पलामू, चतरा, हजारीबाग, गोड्डा और साहिबगंज में सामान्य से 60 प्रतिशत तक कम बारिश हुई है। रांची, लोहरदगा, गुमला, लातेहार, धनबाद, बोकारो, गिरिडीह और देवघर सहित 16 जिलों में 20 से 59 प्रतिशत तक वर्षा की कमी है।
झारखंड में सूखे की स्थिति आगे कैसी रहेगी?
कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की के अनुसार, यदि जुलाई के अंत तक पर्याप्त बारिश नहीं होती, तो प्रभावित क्षेत्रों में राहत उपायों का दायरा और बढ़ाया जाएगा। सरकार मानसून की स्थिति पर लगातार नज़र रखे हुए है।
राष्ट्र प्रेस
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