15 जुलाई 2026
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मुद्रगाडा पद्मनाभम के निधन पर बेटी क्रांति को पार्थिव शरीर छूने से रोका, किर्लामपुडी में तनाव

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मुद्रगाडा पद्मनाभम के निधन पर बेटी क्रांति को पार्थिव शरीर छूने से रोका, किर्लामपुडी में तनाव

सारांश

राजनीतिक मतभेद अब पारिवारिक दरार बन गए — पूर्व मंत्री मुद्रगाडा पद्मनाभम की कथित अंतिम इच्छा थी कि बेटी क्रांति अंतिम संस्कार में न आएँ। 2024 चुनाव में पवन कल्याण को समर्थन देने से शुरू हुई यह दूरी मृत्यु के बाद भी नहीं मिटी। किर्लामपुडी में पुलिस सुरक्षा के बीच क्रांति दो मिनट रुककर लौट गईं।

मुख्य बातें

पूर्व मंत्री मुद्रगाडा पद्मनाभम का मंगलवार, 15 जुलाई को हैदराबाद में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया।
उनकी बेटी बरलापुडी क्रांति को किर्लामपुडी स्थित आवास पर पार्थिव शरीर को छूने की अनुमति नहीं दी गई।
पिता-पुत्री के बीच दूरी 2024 विधानसभा चुनाव में क्रांति द्वारा पवन कल्याण को खुला समर्थन देने से गहरी हुई थी।
कथित तौर पर पद्मनाभम ने परिवार से इच्छा जताई थी कि बेटी को अंतिम संस्कार में शामिल न होने दिया जाए।
चंद्रबाबू नायडू और उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण की बातचीत के बाद राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार का निर्णय लिया गया।
पद्मनाभम चार बार विधायक , एक बार लोकसभा सांसद और राज्य मंत्री रह चुके थे।

आंध्र प्रदेश के काकीनाडा जिले के किर्लामपुडी में बुधवार, 15 जुलाई को उस समय गहरा तनाव उत्पन्न हो गया, जब कापू समुदाय के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री मुद्रगाडा पद्मनाभम के निधन के बाद उनकी बेटी बरलापुडी क्रांति पिता के आवास पर अंतिम दर्शन के लिए पहुंचीं। परिवार के सदस्यों और समर्थकों ने उन्हें पार्थिव शरीर को छूने से रोक दिया और उनके विरुद्ध नारेबाजी भी की गई। पुलिस सुरक्षा के बीच क्रांति लगभग दो मिनट वहाँ रुकीं, किंतु उन्हें फ्रीजर कॉफिन में रखे अपने पिता के पार्थिव शरीर को स्पर्श करने की अनुमति नहीं मिली।

पृष्ठभूमि: पिता-पुत्री में दूरी की जड़ें

बताया जाता है कि मुद्रगाडा पद्मनाभम और उनकी बेटी क्रांति के बीच मतभेद 2024 के आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान खुलकर सामने आए थे। क्रांति ने जन सेना पार्टी के नेता पवन कल्याण का सार्वजनिक रूप से समर्थन किया था और उन्हें कापू समुदाय का प्रतिनिधि नेता बताया था।

इसके विपरीत, पद्मनाभम ने यह बयान दिया था कि यदि वे पिथापुरम विधानसभा सीट से पवन कल्याण को पराजित नहीं कर सके, तो वे अपना नाम बदलकर 'पद्मनाभम रेड्डी' रख लेंगे। पवन कल्याण की जीत के बाद उन्होंने अपना वादा निभाते हुए नाम बदलकर 'पद्मनाभ रेड्डी' कर लिया था। यह राजनीतिक मतभेद पारिवारिक दरार का कारण बना।

कथित अंतिम इच्छा और पुलिस की भूमिका

कथित तौर पर मंगलवार को हैदराबाद में निधन से पूर्व पद्मनाभम ने परिवार से इच्छा जताई थी कि उनकी बेटी को अंतिम संस्कार में शामिल न होने दिया जाए। परिवार और समर्थकों ने इसी आधार पर पुलिस से अनुरोध किया कि क्रांति को पार्थिव शरीर के पास न आने दिया जाए।

बुधवार सुबह पुलिस ने क्रांति और उनके समर्थकों के वाहनों को प्रतिपाडु में रोक लिया। क्रांति के अंतिम दर्शन का अनुरोध करने पर पुलिस ने उन्हें समर्थकों के बिना और सीमित वाहनों के साथ किर्लामपुडी जाने की सलाह दी। पुलिस उन्हें आवास तक ले गई, जहाँ परिवार ने उनके प्रवेश का विरोध किया। इस दौरान उनकी माँ ने भी नाराजगी जताई और पति की मृत्यु के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया।

राजनीतिक जीवन और विरासत

मुद्रगाडा पद्मनाभम आंध्र प्रदेश के एक प्रभावशाली कापू नेता थे जो चार बार विधायक, एक बार लोकसभा सांसद और राज्य सरकार में मंत्री रह चुके थे। उन्होंने कापू समुदाय के लिए आरक्षण की माँग को लेकर दीर्घकालिक आंदोलन का नेतृत्व किया था। 2024 के विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले उन्होंने वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) की सदस्यता ग्रहण की थी। मंगलवार को हैदराबाद में लंबी बीमारी के बाद उनका निधन हुआ, जिसके बाद उनका पार्थिव शरीर मंगलवार रात किर्लामपुडी लाया गया।

राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार

आंध्र प्रदेश सरकार ने पूर्व मंत्री का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ कराने का निर्णय लिया। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण के बीच टेलीफोन पर हुई बातचीत के बाद यह निर्णय लिया गया। उनका अंतिम संस्कार बुधवार शाम किर्लामपुडी में राजकीय सम्मान के साथ संपन्न किया जाएगा। उनके चार दशकों से अधिक के सार्वजनिक जीवन और कापू समुदाय की आवाज़ उठाने में उनकी भूमिका को देखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया।

यह घटना राजनीतिक मतभेदों के पारिवारिक रिश्तों पर पड़ने वाले गहरे असर को रेखांकित करती है और आने वाले समय में कापू समुदाय की राजनीति पर इसके प्रभाव को लेकर चर्चाएँ जारी रहेंगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुद्रगाडा पद्मनाभम कौन थे?
मुद्रगाडा पद्मनाभम आंध्र प्रदेश के वरिष्ठ कापू नेता थे जो चार बार विधायक, एक बार लोकसभा सांसद और राज्य सरकार में मंत्री रह चुके थे। उन्होंने कापू समुदाय के लिए आरक्षण की माँग को लेकर दीर्घकालिक आंदोलन का नेतृत्व किया था।
बेटी क्रांति को पार्थिव शरीर छूने से क्यों रोका गया?
कथित तौर पर मुद्रगाडा पद्मनाभम ने निधन से पूर्व परिवार से इच्छा जताई थी कि उनकी बेटी बरलापुडी क्रांति को अंतिम संस्कार में शामिल न होने दिया जाए। परिवार और समर्थकों ने इसी आधार पर पुलिस से अनुरोध किया और आवास पर उनके प्रवेश का विरोध किया।
पिता-पुत्री में विवाद की शुरुआत कब और कैसे हुई?
2024 के आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान क्रांति ने जन सेना पार्टी के नेता पवन कल्याण का खुलकर समर्थन किया, जबकि उनके पिता पद्मनाभम पवन कल्याण को पिथापुरम से हराने की कोशिश में थे। पवन कल्याण की जीत के बाद पद्मनाभम ने अपना नाम 'पद्मनाभ रेड्डी' रख लिया और पिता-पुत्री के बीच दूरी और बढ़ गई।
क्या राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार हुआ?
हाँ, आंध्र प्रदेश सरकार ने मुद्रगाडा पद्मनाभम का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ कराने का निर्णय लिया। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण के बीच टेलीफोन पर हुई बातचीत के बाद यह निर्णय लिया गया और बुधवार शाम किर्लामपुडी में अंतिम संस्कार संपन्न किया गया।
इस घटना में पुलिस की क्या भूमिका रही?
पुलिस ने पहले क्रांति और उनके समर्थकों के वाहनों को प्रतिपाडु में रोका और उन्हें सीमित वाहनों के साथ जाने की सलाह दी। बाद में पुलिस सुरक्षा में क्रांति को आवास तक पहुँचाया गया, जहाँ वे लगभग दो मिनट रुकीं, लेकिन पार्थिव शरीर को छूने की अनुमति नहीं मिली।
राष्ट्र प्रेस
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