आंध्र प्रदेश: वाईएसआरसीपी एमएलसी अनंत बाबू की जमानत रद्द, दलित ड्राइवर हत्याकांड में गवाहों को धमकाने का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
राजमहेंद्रवरम की विशेष अदालत ने वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के विधान परिषद सदस्य अनंत उदय भास्कर (जिन्हें अनंत बाबू के नाम से जाना जाता है) की जमानत 13 मई 2026 को रद्द कर दी। यह फैसला दलित ड्राइवर विधि सुब्रह्मण्यम हत्याकांड से जुड़े गवाहों को धमकाने और बयान बदलने के लिए रिश्वत देने की कोशिश के गंभीर आरोपों के मद्देनज़र आया। फिलहाल अनंत बाबू राजमहेंद्रवरम सेंट्रल जेल में बंद हैं।
मुख्य घटनाक्रम
अनंत बाबू को 24 अप्रैल को राजमहेंद्रवरम में उस वक्त गिरफ्तार किया गया, जब वे जमानत रद्द करने की याचिका पर सुनवाई के बाद अदालत परिसर से बाहर निकल रहे थे। उन्हें सर्वोच्च न्यायालय से पहले जमानत मिली हुई थी, लेकिन विशेष लोक अभियोजक मुप्पाला सुब्बाराव ने अदालत में याचिका दायर कर कहा कि जमानत की शर्तों का स्पष्ट उल्लंघन हुआ है और गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश अदालत के आदेशों के विरुद्ध है।
इस मामले में 20 अप्रैल को काकीनाडा के सरपवरम पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। हत्या मामले के चार प्रमुख गवाहों ने शिकायत की थी कि एमएलसी ने उन्हें बयान बदलने के लिए बड़ी रकम देने की पेशकश की और मना करने पर जान से मारने की धमकी दी।
गवाहों पर दबाव के आरोप
तीन गवाहों के अनुसार, अनंत बाबू के समर्थकों ने उन्हें एक अपार्टमेंट में जबरन बंद रखा और पुराने बयान वापस लेने तथा अदालत में झूठी गवाही देने के लिए दबाव बनाया। इन आरोपों के आधार पर पुलिस ने एमएलसी के खिलाफ गवाहों को प्रभावित करने और आपराधिक धमकी देने का अलग मामला दर्ज किया।
गौरतलब है कि यह मामला केवल हत्या तक सीमित नहीं रहा — इसमें न्यायिक प्रक्रिया को बाधित करने के प्रयासों ने एक नया आपराधिक आयाम जोड़ दिया है।
हत्याकांड की पृष्ठभूमि
19 मई 2022 को काकीनाडा में 34 वर्षीय दलित ड्राइवर विधि सुब्रह्मण्यम की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। आरोप है कि अनंत बाबू खुद रात 2 बजे शव को कार में लेकर पीड़ित के घर पहुँचे और इसे सड़क हादसा बताने की कोशिश की। परिवार ने हत्या की आशंका जताते हुए शव लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद दलित संगठनों और परिजनों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
इस घटना के बाद वाईएसआरसीपी ने अनंत बाबू को पार्टी से निलंबित कर दिया था। चार्जशीट 90 दिनों के भीतर दाखिल न होने के कारण दिसंबर 2022 में उन्हें डिफॉल्ट बेल मिल गई थी।
जाँच का पुनरारंभ और अदालती आदेश
जून 2024 में सत्ता में आई तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) गठबंधन सरकार ने मामले की दोबारा जाँच का फैसला लिया। जुलाई 2025 में एससी/एसटी विशेष अदालत ने पुनः जाँच के आदेश दिए, जिसके बाद मामले ने नई रफ्तार पकड़ी।
यह ऐसे समय में आया है जब आंध्र प्रदेश में दलित उत्पीड़न से जुड़े मामलों पर न्यायिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर दबाव बढ़ा है।
आगे क्या होगा
अनंत बाबू अब राजमहेंद्रवरम सेंट्रल जेल में न्यायिक हिरासत में हैं। उनके विरुद्ध हत्या के मूल मामले के साथ-साथ गवाहों को धमकाने और प्रभावित करने का अलग मामला भी चल रहा है। अदालती कार्यवाही आगे बढ़ने के साथ यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि क्या पुनर्जाँच में नए साक्ष्य सामने आते हैं और क्या उच्च न्यायालय में जमानत की नई अर्जी दायर की जाती है।