क्या आंध्र प्रदेश में दलित कार्यकर्ता की हत्या के खिलाफ वाईएसआरसीपी नेताओं का धरना प्रभावी होगा?

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क्या आंध्र प्रदेश में दलित कार्यकर्ता की हत्या के खिलाफ वाईएसआरसीपी नेताओं का धरना प्रभावी होगा?

सारांश

आंध्र प्रदेश में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने दलित कार्यकर्ता मंडा सलमान की हत्या पर डीजीपी कार्यालय के बाहर धरना दिया। पूर्व मंत्री और नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर आरोप लगाए। क्या यह आंदोलन न्याय की दिशा में एक कदम साबित होगा?

मुख्य बातें

वाईएसआरसीपी नेताओं ने डीजीपी कार्यालय के बाहर धरना दिया।
सलमान की हत्या को सरकार प्रायोजित हत्या बताया गया।
पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
सीबीआई जांच की मांग की गई है।
वाईएसआरसीपी ने पीआईएल के जरिए न्याय की मांग करने का निर्णय लिया है।

अमरावती, 19 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। आंध्र प्रदेश में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के नेताओं ने दलित कार्यकर्ता मंडा सलमान की क्रूर हत्या के मामले में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से मुलाकात की अनुमति न मिलने पर डीजीपी कार्यालय के समक्ष धरना प्रदर्शन किया।

वाईएसआरसीपी नेताओं का कहना है कि उन्हें डीजीपी हरिश कुमार गुप्ता से मिलने की इजाजत नहीं दी गई, जिसके कारण उन्हें विरोध प्रदर्शन करने पर मजबूर होना पड़ा। बाद में एक अतिरिक्त डीजीपी ने उनकी शिकायत को स्वीकार किया।

पूर्व मंत्री मेरुगु नागार्जुन ने सलमान की हत्या को “सरकार प्रायोजित हत्या” करार देते हुए मामले की सीबीआई जांच की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस ने न केवल हत्या की सही तरीके से एफआईआर दर्ज नहीं की, बल्कि चौंकाने वाली बात यह है कि मृतक सलमान के खिलाफ ही मामला दर्ज कर दिया गया।

उन्होंने यह भी बताया कि पहले पार्टी नेताओं को सलमान का शव देखने की अनुमति नहीं दी गई। पुलिस तब सक्रिय हुई, जब वाईएसआरसीपी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने स्वयं अंतिम संस्कार के लिए आने की घोषणा की। नागार्जुन ने यह सवाल उठाया कि राज्य में क्या हो रहा है, जहां महिलाओं और बच्चों के खिलाफ गंभीर अपराध तक दर्ज नहीं हो रहे हैं और संविधान की जगह ‘रेड बुक शासन’ लागू है।

पूर्व विधायक कासु महेश रेड्डी ने कहा कि आंध्र प्रदेश पूरी तरह से अराजकता की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि दलित कार्यकर्ता की हत्या के बाद भी पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की और उल्टा मृतक के खिलाफ ही केस दर्ज कर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि सलमान के परिवार को धार्मिक रीतियों के अनुसार अंतिम संस्कार करने से रोका गया और यहां तक कि दफनाने के लिए आधार कार्ड तक मांगा गया। उन्होंने यह घोषणा की कि वाईएसआरसीपी इस मामले में जनहित याचिका (पीआईएल) के जरिए हाईकोर्ट का रुख करेगी और न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रखेगी।

पूर्व मंत्री टी.जे.आर. सुधाकर बाबू ने आरोप लगाया कि डीजीपी कार्यालय में वाईएसआरसीपी नेताओं का अपमान किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या डीजीपी जनता के लिए काम कर रहे हैं या चंद्रबाबू नायडू के एजेंट के रूप में। उन्होंने दलितों पर हो रहे हमलों का उल्लेख करते हुए सलमान के परिवार को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने और विधायक यारापतिनेनी श्रीनिवास राव के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

पूर्व मंत्री विददला रजनी ने पुलिस पर संवैधानिक कर्तव्यों की अनदेखी करने और चंद्रबाबू नायडू तथा नारा लोकेश की सेवा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़े वर्ग और अल्पसंख्यकों को कोई सुरक्षा नहीं है, टीडीपी के गुंडे हत्याएं कर रहे हैं और आम नागरिक भी राजनीतिक मंजूरी के बिना थानों में प्रवेश नहीं कर सकते।

एमएलसी मोंडितोका अरुण कुमार ने कहा कि दलित कार्यकर्ता की हत्या ने सरकार का असली चेहरा उजागर कर दिया है और दलितों से तथाकथित “बर्बर शासन” के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया।

पूर्व मंत्री अंबाती रामबाबू ने कहा कि इस मामले में पुलिस का रवैया बेहद विवादास्पद रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिकायत दर्ज कराने के बार-बार प्रयासों को नजरअंदाज किया गया और नेताओं को धरना देने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने उच्चस्तरीय जांच और सलमान के परिवार को तत्काल राहत देने की मांग की।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे राष्ट्रीय स्तर पर गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वाईएसआरसीपी का धरना क्यों हुआ?
वाईएसआरसीपी ने दलित कार्यकर्ता मंडा सलमान की हत्या के मामले में डीजीपी से मिलने की अनुमति न मिलने पर धरना दिया।
क्या सरकार ने इस मामले में कोई कार्रवाई की है?
पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया है कि सरकार ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और पुलिस ने सही तरीके से FIR भी दर्ज नहीं की।
क्या धरने का कोई असर पड़ेगा?
यह देखना होगा कि धरना सरकार और पुलिस की कार्रवाई को प्रभावित करता है या नहीं।
राष्ट्र प्रेस
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