लक्ष्मी दुर्गा एसआईटी के समक्ष पेश, ड्राइवर हत्या केस में जांच जारी

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लक्ष्मी दुर्गा एसआईटी के समक्ष पेश, ड्राइवर हत्या केस में जांच जारी

सारांश

आंध्र प्रदेश के एमएलसी अनंता उदय भास्कर की पत्नी लक्ष्मी दुर्गा ने हत्या मामले में एसआईटी के सामने पेश होकर जांच का सामना किया। जानिए इस विवादास्पद मामले में क्या नया हुआ है।

मुख्य बातें

लक्ष्मी दुर्गा ने हत्या के मामले में एसआईटी के सामने बयान दिया।
अनंता उदय भास्कर मुख्य आरोपी हैं।
मामले की दोबारा जांच का आदेश दिया गया।
पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर टिप्पणियां की हैं।

अमरावती, 16 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। आंध्र प्रदेश विधान परिषद (एमएलसी) के सदस्य अनंता उदय भास्कर की पत्नी लक्ष्मी दुर्गा सोमवार को उनके पूर्व ड्राइवर की हत्या के मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) के समक्ष पेश हुईं।

आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश पर वह काकीनाडा में जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित हुईं। अनंता उदय भास्कर उन्हें उप मंडल पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) कार्यालय तक छोड़ने पहुंचे, जहां जांच अधिकारी मनीष पाटिल देवराज ने उनसे पूछताछ की।

उच्च न्यायालय ने उन्हें 16 मार्च से 30 मार्च के बीच रोजाना सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक एसआईटी के सामने पेश होने का निर्देश दिया था। यह आदेश उस याचिका पर दिया गया था, जिसमें उन्होंने राजमहेंद्रवरम की विशेष एससी/एसटी अदालत द्वारा जारी गैर-जमानती वारंट को रद्द करने की मांग की थी।

पिछले महीने दाखिल पूरक आरोपपत्र में एसआईटी ने कहा था कि 2022 में दलित युवक वीधी सुब्रह्मण्यम की हत्या में लक्ष्मी दुर्गा की भी भूमिका थी। इसके बाद उन्हें मामले में दूसरा आरोपी बनाया गया और एक सप्ताह पहले उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया।

इस मामले में एमएलसी अनंता उदय भास्कर, जिन्हें अनंता बाबू के नाम से भी जाना जाता है, मुख्य आरोपी हैं। उन पर अपने पूर्व ड्राइवर सुब्रह्मण्यम की हत्या करने और बाद में शव को पीड़ित के घर पहुंचाने का आरोप है।

34 वर्षीय सुब्रह्मण्यम 19 मई 2022 को काकीनाडा में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाए गए थे। उस समय सत्तारूढ़ वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के एमएलसी अनंता बाबू रात करीब दो बजे अपने निजी वाहन से शव को पीड़ित के माता-पिता के घर ले गए थे और दावा किया था कि यह सड़क दुर्घटना है।

हालांकि परिजनों ने हत्या की आशंका जताते हुए शव लेने से इनकार कर दिया था। इस घटना के बाद परिजनों और दलित संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया था।

आरोप है कि बहस के दौरान अनंता बाबू ने सुब्रह्मण्यम को धक्का दिया, जिससे वह गिर पड़े और उनकी मौत हो गई। बाद में मौत को सड़क दुर्घटना दिखाने के लिए शव पर अतिरिक्त चोटें भी पहुंचाई गईं।

घटना के बाद एमएलसी को गिरफ्तार किया गया था और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने उन्हें निलंबित कर दिया था।

हालांकि पुलिस 90 दिनों के भीतर आरोपपत्र दाखिल नहीं कर सकी, जिसके कारण अनंता बाबू को दिसंबर 2022 में डिफॉल्ट जमानत मिल गई थी।

जून 2024 में सत्ता में आने के बाद टीडीपी के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार ने मामले की दोबारा जांच कराने का फैसला किया। इसके बाद आईपीएस अधिकारी और वर्तमान काकीनाडा डीएसपी मनीष देवराज पाटिल को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया।

जुलाई 2025 में एससी/एसटी विशेष अदालत ने मामले की दोबारा जांच का आदेश दिया था। एमएलसी ने इस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी, लेकिन अदालत ने निचली अदालत के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें 90 दिनों के भीतर पूरक आरोपपत्र दाखिल करने को कहा गया था।

पूरक आरोपपत्र में एसआईटी ने कहा कि काकीनाडा के कई स्थानों से जुटाए गए सीसीटीवी फुटेज में अनंता बाबू और उनकी पत्नी को उस गेस्ट हाउस के पास देखा गया, जहां कथित तौर पर हत्या हुई थी।

जांचकर्ताओं के मुताबिक एमएलसी की गाड़ी एक गेस्ट हाउस के पास अंधेरे इलाके में एक घंटे से अधिक समय तक संदिग्ध रूप से रुकी रही थी।

पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा था कि इसमें “पुलिस और सत्ता के बीच स्पष्ट गठजोड़” नजर आता है और पुलिस ने अनंता उदय भास्कर को जमानत दिलाने में मदद करने की कोशिश की थी।

इसके बाद राज्य सरकार ने जांच में लापरवाही के आरोप में चार पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया था।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहां एक राजनीतिक व्यक्ति और उनकी पत्नी पर हत्या के गंभीर आरोप लगे हैं। जनता और मीडिया की निगाहें इस मामले पर हैं, और यह साफ है कि कानून का पालन होना चाहिए।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लक्ष्मी दुर्गा को एसआईटी के सामने क्यों पेश होना पड़ा?
उन्हें पूर्व ड्राइवर की हत्या के मामले में जांच के लिए एसआईटी के सामने पेश होना पड़ा।
क्या अनंता उदय भास्कर पर भी आरोप हैं?
हां, उन पर अपने पूर्व ड्राइवर की हत्या का आरोप लगाया गया है।
इस मामले में कितने आरोपियों की पहचान हुई है?
इस मामले में लक्ष्मी दुर्गा को दूसरा आरोपी माना गया है।
क्या इस मामले की दोबारा जांच हो रही है?
जी हां, टीडीपी के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार ने इस मामले की दोबारा जांच कराने का आदेश दिया है।
क्या इस मामले में पुलिस की भूमिका संदिग्ध है?
सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस और सत्ता के बीच गठजोड़ का संकेत दिया है, जिससे उनकी भूमिका संदिग्ध बन गई है।
राष्ट्र प्रेस
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