कांग्रेस सांसद इमरान मसूद का साजिद रशीदी पर हमला: 'मौलाना नहीं, दलाली करते हैं'
सारांश
मुख्य बातें
सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने 10 अगस्त को ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष साजिद रशीदी पर तीखा हमला बोला, जिन्होंने कांवड़ यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं को लेकर विवादित बयान दिया था। मसूद ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि रशीदी को 'मौलाना' कहलाने का कोई अधिकार नहीं है और उन पर आर्थिक लाभ के लिए 'दलाली' करने का आरोप लगाया।
रशीदी का विवादित बयान
रशीदी ने कांवड़ यात्रा को लेकर जो टिप्पणी की, उसने देशभर में आक्रोश की लहर पैदा कर दी। उन्होंने कहा था, 'आप उन लोगों को भगवान शिव का भक्त कहते हैं जो सड़कों पर बैठकर शराब और नशीले पदार्थों का सेवन करते हैं? आप उन लोगों को शिव भक्त कहते हैं जो वर्दी में पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट करते हैं? आप उन लोगों को शिव भक्त कहते हैं जो स्कूल वैन की खिड़कियाँ तोड़ते हैं और बच्चों को घायल करते हैं? आप उन लोगों को भी शिव भक्त कहते हैं जो मरीज को ले जा रही एंबुलेंस को रोकते हैं और लोगों को 'जय श्री राम' का नारा लगाने के लिए मजबूर करते हैं? वे शिव भक्त नहीं हैं; वे आतंकवादी हैं।'
रशीदी का यह बयान ऐसे समय में आया जब पूरे देश में पवित्र सावन माह के दौरान लाखों श्रद्धालु कांवड़ यात्रा में हिस्सा ले रहे हैं और भगवान शिव की आराधना में लीन हैं।
मसूद की कड़ी प्रतिक्रिया
रशीदी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए इमरान मसूद ने कहा, 'वह मौलाना नहीं हैं। पहले मैं यह स्पष्ट कर दूं। उन्हें मौलाना नहीं कहा जा सकता। वह इस तरह की दलाली में शामिल रहते हैं। वह टीआरपी के खेल में शामिल हैं, चैनलों से पैसे लेते हैं या टेलीविजन चैनलों पर आने के लिए भुगतान किया जाता है। उनका इस्लाम से कोई लेना-देना नहीं है। वह नफरत का एजेंडा फैलाने की कोशिश करते हैं।'
गौरतलब है कि मसूद स्वयं मुस्लिम समुदाय से आते हैं और उनकी यह टिप्पणी रशीदी के बयान की न केवल राजनीतिक बल्कि धार्मिक आधार पर भी निंदा करती है।
कानूनी कार्रवाई और व्यापक आलोचना
रशीदी की आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर मुजफ्फरनगर जिले के सिविल लाइंस थाने में उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। कई राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने भी उनके बयान की आलोचना की है। यह ऐसे समय में हुआ है जब सांप्रदायिक सौहार्द को लेकर संवेदनशीलता चरम पर है।
सहारनपुर में सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश
मसूद ने इस विवाद के बीच सहारनपुर में एकता का संदेश देने की कोशिश की। उन्होंने एक कांवड़ सेवा शिविर में श्रद्धालुओं का फूल बरसाकर स्वागत किया और उनके बीच 'प्रसाद' वितरित किया।
उन्होंने कहा, 'यही सहारनपुर की संस्कृति है और यह हमारी परंपरा का हिस्सा है कि हम सभी त्योहारों को मिलकर मनाते हैं। हर साल की तरह इस साल भी हमारे सहयोगियों ने कई कांवड़ शिविर लगाए हैं। ऐसे शिविर पूरे सहारनपुर में आयोजित किए जाते हैं।'
आगे क्या
रशीदी के खिलाफ दर्ज मामले में अब जाँच जारी है। रशीदी के बयान पर विभिन्न पक्षों की ओर से आलोचना का सिलसिला जारी है और यह विवाद सावन माह के समापन तक राजनीतिक चर्चा में बना रह सकता है।