एमएमडीआर संशोधन अधिनियम के विरोध में ओडिशा विधानसभा में तीसरे दिन भी हंगामा, बीजेडी ने दिया आर्थिक नाकेबंदी का अल्टीमेटम
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा विधानसभा के मानसून सत्र में 24 सितंबर 2026 को लगातार तीसरे दिन कार्यवाही बाधित रही, जब विपक्षी बीजू जनता दल (बीजेडी) और कांग्रेस के विधायकों ने एमएमडीआर संशोधन अधिनियम, 2026 को रद्द करने की माँग को लेकर सदन में ज़ोरदार विरोध प्रदर्शन किया। डिप्टी स्पीकर भबानी शंकर भोई को विपक्ष के हंगामे के बीच कार्यवाही शाम 4 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।
सदन में क्या हुआ
मानसून सत्र के तीसरे दिन कार्यवाही शुरू होते ही बीजेडी और कांग्रेस के विधायक स्पीकर के आसन के निकट पोस्टर और बैनर लेकर पहुँच गए और सरकार-विरोधी नारे लगाने लगे। इस हंगामे के बावजूद डिप्टी स्पीकर ने कार्यवाही जारी रखने का प्रयास किया और प्रश्नकाल के दौरान मंत्री मुकेश महालिंग तथा सुरेश पुजारी ने प्रश्नों के उत्तर दिए।
गौरतलब है कि बीजेडी विधायक पिछले दो दिनों से स्कूली किताबों में छपाई की गलतियों को लेकर स्कूल और जन शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड के इस्तीफे की माँग कर रहे थे। तीसरे दिन उनका विरोध एमएमडीआर संशोधन अधिनियम की ओर केंद्रित हो गया, जिससे सदन में अवरोध और तेज हो गया।
ओएमसी दफ्तर तक मार्च और आर्थिक नाकेबंदी की चेतावनी
सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद बीजेडी विधायकों ने विधानसभा परिसर से ओडिशा माइनिंग कॉर्पोरेशन (ओएमसी) के दफ्तर तक मार्च निकाला और उसका घेराव किया। वरिष्ठ बीजेडी नेता एवं विधायक अरुण साहू ने मीडिया से कहा कि यह विरोध प्रदर्शन एमएमडीआर संशोधन अधिनियम के विरुद्ध आर्थिक नाकेबंदी की शुरुआत है।
साहू ने कहा, 'बीजेडी ने सरकार और केंद्र को कानून वापस लेने का अल्टीमेटम दिया है। माँग पूरी नहीं हुई, तो पार्टी अपना आंदोलन तेज करेगी और पूरे राज्य में आर्थिक नाकेबंदी शुरू करेगी।' उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी लोगों को एकजुट कर इस कानून के विरुद्ध अभियान को व्यापक बनाएगी।
वहीं, कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के समीप अलग से विरोध प्रदर्शन किया।
विपक्ष के आरोप: ओडिशा को ₹1.10 लाख करोड़ का नुकसान
कांग्रेस नेता तारा प्रसाद बाहिनीपति ने आरोप लगाया कि एमएमडीआर संशोधन अधिनियम लागू होने के कारण ओडिशा को प्रतिवर्ष होने वाले ₹1,000 करोड़ के नुकसान के अतिरिक्त कुल ₹1.10 लाख करोड़ का नुकसान हुआ है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि उसने उन ओडिशा के मतदाताओं के साथ धोखा किया जिन्होंने 2024 के आम चुनावों में उन्हें सत्ता दी थी।
बीजेडी नेताओं का भी कहना है कि इस संशोधन से ओडिशा को खनिज संसाधनों में उसका वाजिब हिस्सा नहीं मिल पाएगा और राज्य के समग्र हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
पृष्ठभूमि: एमएमडीआर संशोधन विवाद क्यों गहराया
यह ऐसे समय में आया है जब ओडिशा देश के प्रमुख खनिज-संपन्न राज्यों में से एक है और खनन राजस्व राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। आलोचकों का कहना है कि एमएमडीआर संशोधन अधिनियम, 2026 ने खनिज वितरण और राजस्व साझेदारी की शर्तें इस प्रकार बदली हैं जिससे राज्यों की हिस्सेदारी घटती है।
यह तीसरा लगातार दिन है जब विधानसभा की कार्यवाही बाधित हुई है, जो इस मुद्दे की गंभीरता और विपक्ष की एकजुटता को रेखांकित करता है। आगे के सत्र दिनों में क्या रुख अपनाया जाएगा, यह देखने वाली बात होगी।