7 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मौलाना साजिद रशीदी की कांवड़ टिप्पणी पर सियासी घमासान: भाजपा का हमला, सपा ने झाड़े हाथ

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मौलाना साजिद रशीदी की कांवड़ टिप्पणी पर सियासी घमासान: भाजपा का हमला, सपा ने झाड़े हाथ

सारांश

मौलाना साजिद रशीदी की कांवड़ यात्रा पर टिप्पणी ने सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। भाजपा ने इसे सनातन आस्था का अपमान बताते हुए कड़ा हमला बोला, तो सपा ने चतुराई से किनारा कर लिया। सावन के चरम पर यह विवाद धार्मिक और राजनीतिक दोनों तापमान बढ़ा रहा है।

मुख्य बातें

मौलाना साजिद रशीदी की कांवड़ यात्रा और कांवड़ियों पर की गई टिप्पणी ने 7 अगस्त को राजनीतिक विवाद को जन्म दिया।
दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा ने बयान को सनातन भक्तों के प्रति अपमानजनक करार दिया और मौलाना को आत्ममंथन की सलाह दी।
प्रतापगढ़ के भाजपा विधायक राजेंद्र कुमार मौर्य ने इसे तुष्टिकरण की मानसिकता का प्रतीक बताया।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने कहा कि पार्टी किसी धार्मिक नेता के बयान पर प्रतिक्रिया नहीं देती।
विवाद सावन माह में कांवड़ यात्रा के चरम पर उभरा, जब लाखों श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए निकले हुए हैं।

कांवड़ यात्रा और कांवड़ियों को लेकर मौलाना साजिद रशीदी की विवादास्पद टिप्पणी ने 7 अगस्त को राजनीतिक हलकों में तीखी बहस छेड़ दी। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस बयान को सनातन आस्था का अपमान करार देते हुए कड़ी निंदा की, जबकि समाजवादी पार्टी (सपा) ने इस विवाद से पल्ला झाड़ते हुए सभी धर्मों के सम्मान और शांतिपूर्ण धार्मिक गतिविधियों की वकालत की।

भाजपा की तीखी प्रतिक्रिया

दिल्ली सरकार में मंत्री कपिल मिश्रा ने मौलाना रशीदी के बयान पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि आतंकवादियों को छोड़कर उन्हें सभी लोग आतंकवादी दिखाई देते हैं। मिश्रा के अनुसार, 26/11 मुंबई हमले के आतंकवादी अजमल कसाब, बुरहान वानी या 9/11 हमलों के आतंकवादी उन्हें नज़र नहीं आते और ऐसे मामलों में कहा जाता है कि 'आतंकवाद का कोई मज़हब नहीं होता।' मिश्रा ने आगे कहा, 'लेकिन जब कोई भोलेनाथ का भक्त, राम भक्त या जगदंबा का भक्त सामने आता है, तो उसके लिए अपमानजनक और भद्दी भाषा का इस्तेमाल किया जाता है।'

मिश्रा ने यह भी कहा कि मौलाना को आत्ममंथन करना चाहिए और दुनिया के बड़े आतंकवादियों की सूची देखकर वास्तविकता को समझना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भोलेनाथ के भक्तों पर इस प्रकार सवाल उठाए जाएंगे तो यह 'गलत जगह छेड़ने जैसा होगा और यह उन्हें महंगा पड़ेगा।'

भाजपा विधायक की आलोचना

प्रतापगढ़ से भाजपा विधायक राजेंद्र कुमार मौर्य ने भी मौलाना रशीदी की टिप्पणी की निंदा की। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान तुष्टिकरण की मानसिकता को उजागर करते हैं। मौर्य ने रेखांकित किया कि उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार कांवड़ यात्रियों के सम्मान और सुविधा के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान जगह-जगह भंडारों का आयोजन होता है, श्रद्धालुओं के पैरों को धोकर उनका सम्मान किया जाता है और प्रशासन व स्वयंसेवी संगठन मिलकर यह सुनिश्चित करते हैं कि कांवड़ियों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।

सपा ने किया किनारा

इस पूरे विवाद से समाजवादी पार्टी ने दूरी बनाए रखी। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने स्पष्ट किया कि सपा किसी मौलाना, पंडित या अन्य धार्मिक नेता के बयानों पर प्रतिक्रिया नहीं देती। चांद ने कहा कि पार्टी का मानना है कि सभी नागरिकों के संवैधानिक अधिकार सुरक्षित रहने चाहिए और हर व्यक्ति को अपने धर्म का पालन करने की पूरी स्वतंत्रता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि धार्मिक स्वतंत्रता का प्रयोग हमेशा शांतिपूर्ण और जिम्मेदारीपूर्ण तरीके से होना चाहिए।

आगे क्या

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब सावन माह में कांवड़ यात्रा अपने चरम पर है और लाखों श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए निकले हुए हैं। गौरतलब है कि धार्मिक यात्राओं को लेकर इस तरह के बयान अतीत में भी सियासी तनाव का कारण बनते रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि ऐसे बयान सामाजिक सौहार्द के लिए घातक हो सकते हैं, जबकि भाजपा नेता इसे सनातन धर्म के प्रति एक सुनियोजित दुराग्रह के रूप में देख रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो बहस की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करता है। सपा का 'हम प्रतिक्रिया नहीं देते' वाला रुख राजनीतिक सुरक्षा की दृष्टि से समझ में आता है, लेकिन यह उस वर्ग को नेतृत्व-विहीन छोड़ता है जो स्पष्ट और जिम्मेदार आवाज़ की प्रतीक्षा करता है। असली सवाल यह है कि क्या इस तरह के विवाद सावन में श्रद्धालुओं की वास्तविक सुरक्षा और सुविधा पर ध्यान केंद्रित रहने देते हैं, या सिर्फ टेलीविज़न की बहसें भरते हैं।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मौलाना साजिद रशीदी ने कांवड़ यात्रा पर क्या टिप्पणी की थी?
स्रोत में मौलाना साजिद रशीदी की टिप्पणी का सटीक पाठ उपलब्ध नहीं है, लेकिन उनके बयान को कांवड़ यात्रा और कांवड़ियों के संदर्भ में विवादास्पद बताया गया है। भाजपा नेताओं ने इसे सनातन आस्था का अपमान करार दिया है।
भाजपा ने मौलाना रशीदी के बयान पर क्या कहा?
भाजपा के मंत्री कपिल मिश्रा ने बयान को सनातन भक्तों के प्रति अपमानजनक बताया और मौलाना को आत्ममंथन की सलाह दी। प्रतापगढ़ के भाजपा विधायक राजेंद्र कुमार मौर्य ने इसे तुष्टिकरण की मानसिकता का प्रतीक कहा।
समाजवादी पार्टी ने इस विवाद पर क्या रुख अपनाया?
सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने कहा कि पार्टी किसी भी धार्मिक नेता — चाहे मौलाना हों या पंडित — के बयानों पर प्रतिक्रिया नहीं देती। उन्होंने सभी नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा और शांतिपूर्ण धार्मिक स्वतंत्रता की वकालत की।
यह विवाद कांवड़ यात्रा के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
यह विवाद सावन माह के चरम पर उभरा है, जब लाखों कांवड़िये जलाभिषेक के लिए निकले हुए हैं। उत्तर प्रदेश सरकार यात्रियों की सुविधा के लिए विशेष प्रबंध कर रही है, और इस पृष्ठभूमि में ऐसी टिप्पणियाँ सामाजिक तनाव बढ़ाने की आशंका पैदा करती हैं।
क्या इससे पहले भी कांवड़ यात्रा पर इस तरह के विवाद हुए हैं?
हाँ, अतीत में भी धार्मिक यात्राओं को लेकर बयानों ने सियासी तनाव उत्पन्न किया है। आलोचकों का कहना है कि ऐसे बयान सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुँचाते हैं, जबकि सत्तारूढ़ दल इन्हें आस्था के विरुद्ध षड्यंत्र के रूप में प्रस्तुत करता रहा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 घंटा पहले
  2. 20 घंटे पहले
  3. 21 घंटे पहले
  4. कल
  5. कल
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले