बिशन सिंह बेदी: 67 टेस्ट में 266 विकेट, पाकिस्तान की नापाक हरकत पर बल्लेबाज बुला लिए थे वापस
सारांश
मुख्य बातें
बिशन सिंह बेदी — भारतीय क्रिकेट इतिहास का वह नाम जिसने 1970 के दशक में दुनिया के बड़े-से-बड़े बल्लेबाज़ों को अपनी रहस्यमयी बाईं हाथ की स्पिन गेंदबाज़ी से बेबस कर दिया। 67 टेस्ट मैचों में 266 विकेट और 370 फर्स्ट-क्लास मैचों में 1,560 विकेट — उनका करियर आँकड़ों से कहीं बढ़कर था।
अमृतसर से अंतरराष्ट्रीय मंच तक
बिशन सिंह बेदी का जन्म 25 सितंबर 1946 को पंजाब के अमृतसर में हुआ। बचपन से ही गेंद को जादुई तरीके से घुमाने की कला उनमें नैसर्गिक थी। महज़ 15 वर्ष की आयु में उन्हें उत्तर पंजाब की राज्य टीम में चुना गया और 1961 में उन्होंने घरेलू क्रिकेट में पदार्पण किया।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहली बार उन्हें 1967 में वेस्टइंडीज के विरुद्ध भारतीय टीम की ओर से खेलने का मौका मिला। उस मैच में वे केवल 2 विकेट ही ले सके, लेकिन यह शुरुआत भर थी — आगे उनकी गेंदबाज़ी ने एक अलग ही इतिहास रचा।
अजेय स्पिन चौकड़ी का हिस्सा
बिशन बेदी, ई.ए.एस. प्रसन्ना, बी.एस. चंद्रशेखर और एस. वेंकटराघवन की चौकड़ी को 1970 के दशक में विश्व क्रिकेट की सबसे अबूझ पहेली माना जाता था। दुनिया के शीर्षतम बल्लेबाज़ भी इस चतुष्टय के सामने असहाय दिखते थे।
बेदी की बाएँ हाथ की ऑर्थोडॉक्स स्पिन में एक अद्भुत लय थी — गेंद इतनी सहजता से घूमती कि बल्लेबाज़ उसे पढ़ ही नहीं पाते थे। गौरतलब है कि उन्होंने फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में 106 बार एक पारी में 5 या उससे अधिक विकेट लेने का असाधारण कारनामा किया।
पाकिस्तान दौरे पर ऐतिहासिक विरोध
1978 में कप्तान बिशन सिंह बेदी की अगुआई में भारतीय टीम पाकिस्तान के दौरे पर थी। सीरीज़ के तीसरे और निर्णायक वनडे मुकाबले में पाकिस्तान ने पहले बल्लेबाज़ी करते हुए 40 ओवर में 7 विकेट खोकर 205 रन बनाए।
भारतीय टीम 183 रन के स्कोर पर मात्र 2 विकेट खोकर मैच जीतने की ओर तेज़ी से बढ़ रही थी। तब पाकिस्तान के कप्तान मुश्ताक मोहम्मद और तेज़ गेंदबाज़ सरफ़राज़ नवाज़ ने मिलकर एक विवादास्पद रणनीति अपनाई — नवाज़ ने पारी के 38वें ओवर में लगातार चार बाउंसर फेंकी, परंतु दोनों पाकिस्तानी अंपायरों — जावेद अख्तर और खिज़र हयात — ने एक भी गेंद को वाइड नहीं दिया।
आरोप है कि कप्तान मुश्ताक और दोनों अंपायरों के बीच सांठगांठ थी। ड्रेसिंग रूम में बैठे कप्तान बेदी ने जब यह देखा तो वे बेहद क्रोधित हो गए। उन्होंने तत्काल निर्णय लिया और अपने बल्लेबाज़ों को मैदान से वापस बुला लिया। भारत ने आगे बल्लेबाज़ी करने से इनकार कर दिया और पाकिस्तान को विजेता घोषित किया गया — यह एक साहसी किंतु विवादास्पद निर्णय था जो क्रिकेट इतिहास में दर्ज हो गया।
करियर के आँकड़े
बेदी ने भारत के लिए 67 टेस्ट मैच खेले और 266 विकेट चटकाए। 10 वनडे मैचों में उन्होंने 7 विकेट लिए। फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में 370 मैचों में 1,560 विकेट का रिकॉर्ड उनकी महानता को रेखांकित करता है।
यह ऐसे समय में आया है जब 25 सितंबर को उनकी जयंती पर क्रिकेट जगत उन्हें याद करता है — एक ऐसे गेंदबाज़ के रूप में जिन्होंने मैदान पर कला और मैदान के बाहर साहस, दोनों का परिचय दिया।