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बिशन सिंह बेदी: 67 टेस्ट में 266 विकेट, पाकिस्तान की नापाक हरकत पर बल्लेबाज बुला लिए थे वापस

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बिशन सिंह बेदी: 67 टेस्ट में 266 विकेट, पाकिस्तान की नापाक हरकत पर बल्लेबाज बुला लिए थे वापस

सारांश

बिशन सिंह बेदी सिर्फ एक गेंदबाज़ नहीं थे — वे एक सिद्धांत थे। 67 टेस्ट में 266 विकेट और 1978 में पाकिस्तान की विवादास्पद अंपायरिंग के खिलाफ बल्लेबाज़ों को वापस बुलाने का साहसी निर्णय — उनका करियर मैदान पर कला और बाहर अदम्य साहस की कहानी है।

मुख्य बातें

बिशन सिंह बेदी का जन्म 25 सितंबर 1946 को अमृतसर, पंजाब में हुआ; महज़ 15 साल में उत्तर पंजाब टीम में चयन।
भारत के लिए 67 टेस्ट में 266 विकेट ; 10 वनडे में 7 विकेट ।
फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में 370 मैचों में 1,560 विकेट ; 106 बार एक पारी में 5+ विकेट ।
1978 में पाकिस्तान दौरे पर तीसरे निर्णायक वनडे में पाकिस्तानी अंपायरों की संदिग्ध अंपायरिंग के विरोध में बल्लेबाज़ों को मैदान से वापस बुलाया।
प्रसन्ना, चंद्रशेखर और वेंकटराघवन के साथ मिलकर 1970 के दशक की विश्वप्रसिद्ध भारतीय स्पिन चौकड़ी का हिस्सा रहे।

बिशन सिंह बेदी — भारतीय क्रिकेट इतिहास का वह नाम जिसने 1970 के दशक में दुनिया के बड़े-से-बड़े बल्लेबाज़ों को अपनी रहस्यमयी बाईं हाथ की स्पिन गेंदबाज़ी से बेबस कर दिया। 67 टेस्ट मैचों में 266 विकेट और 370 फर्स्ट-क्लास मैचों में 1,560 विकेट — उनका करियर आँकड़ों से कहीं बढ़कर था।

अमृतसर से अंतरराष्ट्रीय मंच तक

बिशन सिंह बेदी का जन्म 25 सितंबर 1946 को पंजाब के अमृतसर में हुआ। बचपन से ही गेंद को जादुई तरीके से घुमाने की कला उनमें नैसर्गिक थी। महज़ 15 वर्ष की आयु में उन्हें उत्तर पंजाब की राज्य टीम में चुना गया और 1961 में उन्होंने घरेलू क्रिकेट में पदार्पण किया।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहली बार उन्हें 1967 में वेस्टइंडीज के विरुद्ध भारतीय टीम की ओर से खेलने का मौका मिला। उस मैच में वे केवल 2 विकेट ही ले सके, लेकिन यह शुरुआत भर थी — आगे उनकी गेंदबाज़ी ने एक अलग ही इतिहास रचा।

अजेय स्पिन चौकड़ी का हिस्सा

बिशन बेदी, ई.ए.एस. प्रसन्ना, बी.एस. चंद्रशेखर और एस. वेंकटराघवन की चौकड़ी को 1970 के दशक में विश्व क्रिकेट की सबसे अबूझ पहेली माना जाता था। दुनिया के शीर्षतम बल्लेबाज़ भी इस चतुष्टय के सामने असहाय दिखते थे।

बेदी की बाएँ हाथ की ऑर्थोडॉक्स स्पिन में एक अद्भुत लय थी — गेंद इतनी सहजता से घूमती कि बल्लेबाज़ उसे पढ़ ही नहीं पाते थे। गौरतलब है कि उन्होंने फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में 106 बार एक पारी में 5 या उससे अधिक विकेट लेने का असाधारण कारनामा किया।

पाकिस्तान दौरे पर ऐतिहासिक विरोध

1978 में कप्तान बिशन सिंह बेदी की अगुआई में भारतीय टीम पाकिस्तान के दौरे पर थी। सीरीज़ के तीसरे और निर्णायक वनडे मुकाबले में पाकिस्तान ने पहले बल्लेबाज़ी करते हुए 40 ओवर में 7 विकेट खोकर 205 रन बनाए।

भारतीय टीम 183 रन के स्कोर पर मात्र 2 विकेट खोकर मैच जीतने की ओर तेज़ी से बढ़ रही थी। तब पाकिस्तान के कप्तान मुश्ताक मोहम्मद और तेज़ गेंदबाज़ सरफ़राज़ नवाज़ ने मिलकर एक विवादास्पद रणनीति अपनाई — नवाज़ ने पारी के 38वें ओवर में लगातार चार बाउंसर फेंकी, परंतु दोनों पाकिस्तानी अंपायरों — जावेद अख्तर और खिज़र हयात — ने एक भी गेंद को वाइड नहीं दिया।

आरोप है कि कप्तान मुश्ताक और दोनों अंपायरों के बीच सांठगांठ थी। ड्रेसिंग रूम में बैठे कप्तान बेदी ने जब यह देखा तो वे बेहद क्रोधित हो गए। उन्होंने तत्काल निर्णय लिया और अपने बल्लेबाज़ों को मैदान से वापस बुला लिया। भारत ने आगे बल्लेबाज़ी करने से इनकार कर दिया और पाकिस्तान को विजेता घोषित किया गया — यह एक साहसी किंतु विवादास्पद निर्णय था जो क्रिकेट इतिहास में दर्ज हो गया।

करियर के आँकड़े

बेदी ने भारत के लिए 67 टेस्ट मैच खेले और 266 विकेट चटकाए। 10 वनडे मैचों में उन्होंने 7 विकेट लिए। फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में 370 मैचों में 1,560 विकेट का रिकॉर्ड उनकी महानता को रेखांकित करता है।

यह ऐसे समय में आया है जब 25 सितंबर को उनकी जयंती पर क्रिकेट जगत उन्हें याद करता है — एक ऐसे गेंदबाज़ के रूप में जिन्होंने मैदान पर कला और मैदान के बाहर साहस, दोनों का परिचय दिया।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उसमें एक स्पष्ट संदेश था: खेल भावना से समझौता नहीं। यह ऐसे दौर में विशेष रूप से प्रासंगिक है जब क्रिकेट में अंपायरिंग विवाद और खेल-भावना की चर्चाएँ आज भी जारी हैं। 370 फर्स्ट-क्लास मैचों में 1,560 विकेट का आँकड़ा बताता है कि वे सिर्फ भारतीय नहीं, विश्व क्रिकेट के सर्वकालिक महान गेंदबाज़ों में से एक थे — फिर भी उन्हें उतनी वैश्विक पहचान नहीं मिली जिसके वे हकदार थे।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिशन सिंह बेदी का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर कैसा रहा?
बिशन सिंह बेदी ने भारत के लिए 67 टेस्ट मैचों में 266 विकेट और 10 वनडे मैचों में 7 विकेट लिए। 1967 में वेस्टइंडीज के खिलाफ उनका अंतरराष्ट्रीय पदार्पण हुआ और वे 1970 के दशक की अजेय भारतीय स्पिन चौकड़ी के अहम स्तंभ बने।
1978 में पाकिस्तान के खिलाफ बेदी ने बल्लेबाज़ों को वापस क्यों बुलाया?
1978 के निर्णायक वनडे में पाकिस्तानी तेज़ गेंदबाज़ सरफ़राज़ नवाज़ ने लगातार चार बाउंसर फेंकी, जिन्हें दोनों पाकिस्तानी अंपायरों — जावेद अख्तर और खिज़र हयात — ने वाइड नहीं करार दिया। कप्तान मुश्ताक मोहम्मद और अंपायरों के बीच सांठगांठ का आरोप लगाते हुए बेदी ने भारतीय बल्लेबाज़ों को मैदान से वापस बुला लिया और मैच छोड़ दिया।
बिशन सिंह बेदी का फर्स्ट-क्लास क्रिकेट रिकॉर्ड क्या है?
फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में बिशन सिंह बेदी ने 370 मैचों में 1,560 विकेट लिए। उन्होंने 106 बार एक पारी में 5 या अधिक विकेट लेने का असाधारण कारनामा किया, जो उनकी गेंदबाज़ी की श्रेष्ठता को प्रमाणित करता है।
बिशन सिंह बेदी का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
बिशन सिंह बेदी का जन्म 25 सितंबर 1946 को पंजाब के अमृतसर में हुआ था। बचपन से ही क्रिकेट के प्रति लगन के चलते महज 15 साल की उम्र में उन्हें उत्तर पंजाब की राज्य टीम में जगह मिली और 1961 में उन्होंने घरेलू क्रिकेट में पदार्पण किया।
भारतीय स्पिन चौकड़ी में कौन-कौन से खिलाड़ी शामिल थे?
1970 के दशक की विश्वप्रसिद्ध भारतीय स्पिन चौकड़ी में बिशन सिंह बेदी, ई.ए.एस. प्रसन्ना, बी.एस. चंद्रशेखर और एस. वेंकटराघवन शामिल थे। इस चौकड़ी ने विश्व के शीर्षतम बल्लेबाज़ों को बेबस किया और भारतीय टेस्ट क्रिकेट को नई ऊँचाई दी।
राष्ट्र प्रेस
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