23 अक्टूबर 2026
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बिशन सिंह बेदी की तीसरी पुण्यतिथि: बेटे अंगद बेदी ने इमोशनल नोट शेयर कर किया याद

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बिशन सिंह बेदी की तीसरी पुण्यतिथि: बेटे अंगद बेदी ने इमोशनल नोट शेयर कर किया याद

सारांश

तीसरी पुण्यतिथि पर अंगद बेदी ने एक मार्मिक राज उजागर किया — पिता की 'फेवरेट कोलोन' आज भी उनके पास है। दौड़, यादें और वो अनमोल शब्द जो बिशन सिंह बेदी ने दिए थे — यह श्रद्धांजलि बताती है कि एक महान खिलाड़ी की असली विरासत मैदान से परे उसके परिवार में जीती है।

मुख्य बातें

अभिनेता अंगद बेदी ने 23 अक्टूबर 2026 को पिता बिशन सिंह बेदी की तीसरी पुण्यतिथि पर इंस्टाग्राम पर भावनात्मक नोट और वीडियो साझा किए।
अंगद ने पिता की याद में रनिंग सेशन किया और बचपन में 6 साल की उम्र में साथ दौड़ने की यादें साझा कीं।
उन्होंने बताया कि पिता की 'फेवरेट कोलोन' वे उनके ड्रॉअर से ले आए थे और पुण्यतिथि पर वही लगाई।
बिशन सिंह बेदी भारतीय स्पिन चौकड़ी के प्रमुख सदस्य थे और 1960-70 के दशक में भारतीय क्रिकेट के महान स्पिनर रहे।
2023 में उम्र संबंधी बीमारियों के कारण बिशन सिंह बेदी का निधन हुआ था।

अभिनेता अंगद बेदी ने 23 अक्टूबर 2026 को अपने दिवंगत पिता और भारतीय क्रिकेट के महान बाएं हाथ के स्पिन गेंदबाज बिशन सिंह बेदी की तीसरी पुण्यतिथि पर एक गहरे भावनात्मक संदेश के साथ उन्हें श्रद्धांजलि दी। अंगद ने इस विशेष दिन अपने पिता की स्मृति में दौड़ लगाई और सोशल मीडिया पर एक मार्मिक नोट साझा किया।

इंस्टाग्राम पर साझा किए पुराने पल

अंगद बेदी ने इंस्टाग्राम पर अपने पिता के साथ के कुछ पुराने वीडियो पोस्ट किए, जिनमें बिशन सिंह बेदी बैठकर एक किस्सा सुना रहे हैं और अंगद उन्हें ध्यान से सुनते हुए उस अनमोल पल को रिकॉर्ड कर रहे हैं। ये वीडियो परिवार के उस अंतरंग बंधन की झलक देते हैं जो पिता-पुत्र के बीच था।

पिता की 'फेवरेट कोलोन' और भावुक स्वीकारोक्ति

अपने भावनात्मक नोट में अंगद ने एक खास बात कबूल की। उन्होंने लिखा, 'पता नहीं कैसे कहूं, लेकिन मुझे एक बात बतानी है। पिछली बार घर आने पर मैं आपके ड्रॉअर से आपकी फेवरेट कोलोन चुरा लाया था। आज वही लगा रहा हूं।' यह छोटी-सी बात उस गहरी तड़प को बयाँ करती है जो एक बेटे को अपने पिता की अनुपस्थिति में होती है।

उन्होंने आगे लिखा, '23 अक्टूबर, पिताजी आपके शब्द थे — भागते-भागते जागते रहना और जागते-जागते भागते रहना। आज आपकी याद में मैंने एक प्यारा रनिंग सेशन किया। जब मैं सिर्फ 6 साल का था, तब आपके साथ ऐसे ही दौड़ लगाया करता था, वही यादें आज ताजा हो गईं।' पिता की सीख और साथ की वे यादें आज भी अंगद के साथ दौड़ती हैं।

कौन थे बिशन सिंह बेदी

बिशन सिंह बेदी भारत के महानतम बाएं हाथ के स्पिन गेंदबाजों में गिने जाते हैं, जिन्होंने 1960 और 1970 के दशक में भारतीय क्रिकेट को नई ऊँचाइयाँ दीं। वे अपनी विशिष्ट रंगीन पगड़ी और क्रिकेट के मुद्दों पर बेबाक व निडर राय के लिए प्रसिद्ध थे।

बेदी प्रसिद्ध भारतीय स्पिन चौकड़ी — बेदी, प्रसन्ना, चंद्रशेखर और वेंकटराघवन — के अगुआ सदस्य थे। गेंद को हवा में उड़ाने की अपनी अनूठी कला और सटीक नियंत्रण से उन्होंने विश्व के बड़े-बड़े बल्लेबाजों को परेशान किया। 2023 में उम्र संबंधी बीमारियों के कारण उनका निधन हो गया था।

आम जनता और क्रिकेट जगत पर असर

बिशन सिंह बेदी केवल एक क्रिकेटर नहीं, बल्कि एक युग के प्रतीक थे। उनकी पुण्यतिथि पर अंगद का यह संदेश क्रिकेट प्रेमियों और आम लोगों दोनों को भावनात्मक रूप से छू गया। गौरतलब है कि बेदी की विरासत आज भी भारतीय स्पिन गेंदबाजी की चर्चा में जीवित रहती है।

अंगद बेदी की यह श्रद्धांजलि बताती है कि एक महान खिलाड़ी की पहचान मैदान से परे उसके परिवार और इंसानी रिश्तों में भी उतनी ही गहरी होती है। पिता की विरासत को जीवित रखते हुए अंगद हर साल इस दिन उन्हें याद करते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

प्रसन्ना, चंद्रशेखर, वेंकटराघवन — किसी बड़े बजट या IPL की उपज नहीं थी, बल्कि शुद्ध शिल्प और समर्पण की देन थी।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिशन सिंह बेदी का निधन कब हुआ था?
बिशन सिंह बेदी का निधन 2023 में उम्र संबंधी बीमारियों के कारण हुआ था। 23 अक्टूबर 2026 को उनकी तीसरी पुण्यतिथि मनाई गई।
अंगद बेदी ने पुण्यतिथि पर क्या किया?
अंगद बेदी ने अपने पिता की याद में एक रनिंग सेशन किया और इंस्टाग्राम पर पुराने वीडियो के साथ एक भावनात्मक नोट साझा किया। उन्होंने बताया कि वे पिता की 'फेवरेट कोलोन' उनके ड्रॉअर से ले आए थे और पुण्यतिथि पर वही लगाई।
बिशन सिंह बेदी भारतीय क्रिकेट में क्यों प्रसिद्ध थे?
बिशन सिंह बेदी भारत के महानतम बाएं हाथ के स्पिन गेंदबाजों में एक थे, जो 1960 और 1970 के दशक में सक्रिय रहे। वे भारतीय स्पिन चौकड़ी — बेदी, प्रसन्ना, चंद्रशेखर और वेंकटराघवन — के प्रमुख सदस्य थे और अपनी रंगीन पगड़ी तथा बेबाक राय के लिए भी जाने जाते थे।
अंगद बेदी ने पिता के बारे में क्या लिखा?
अंगद ने लिखा कि उनके पिता का मंत्र था — 'भागते-भागते जागते रहना और जागते-जागते भागते रहना।' उन्होंने बचपन में 6 साल की उम्र में पिता के साथ दौड़ने की यादें साझा कीं और पुण्यतिथि पर उनकी याद में दौड़ लगाई।
भारतीय स्पिन चौकड़ी कौन-कौन से खिलाड़ियों की थी?
भारतीय स्पिन चौकड़ी में बिशन सिंह बेदी, ईरापल्ली प्रसन्ना, भागवत चंद्रशेखर और श्रीनिवासराघवन वेंकटराघवन शामिल थे। इन चारों ने मिलकर 1960-70 के दशक में भारतीय गेंदबाजी को विश्व स्तर पर एक अलग पहचान दिलाई।
राष्ट्र प्रेस
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