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आंध्र प्रदेश में डॉक्टर दंपति ने दिव्यांग बेटी की हत्या के बाद आत्महत्या की

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आंध्र प्रदेश में डॉक्टर दंपति ने दिव्यांग बेटी की हत्या के बाद आत्महत्या की

सारांश

आंध्र प्रदेश के एक डॉक्टर दंपति ने अपनी दिव्यांग बेटी की हत्या करने के बाद आत्महत्या कर ली। इस घटना ने समाज में गहरा दुख और चिंता पैदा कर दिया है।

मुख्य बातें

मानसिक स्वास्थ्य: इस घटना ने मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को उजागर किया।
परिवार का दबाव: दंपति ने अपने दिव्यांग बच्चे की स्थिति के कारण आत्महत्या का कदम उठाया।
समाज की जिम्मेदारी: समाज को ऐसी घटनाओं के प्रति संवेदनशील होना चाहिए।

अमरावती, 30 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। आंध्र प्रदेश के एक डॉक्टर और उनकी पत्नी ने अपने दिव्यांग बच्चे की हत्या करने के बाद आत्महत्या कर ली। उनकी तीन साल की बेटी मानसिक और शारीरिक रूप से दिव्यांग थी।

दंपति ने जहरीला इंजेक्शन लगाकर अपनी बेटी को मारने के बाद खुद भी आत्महत्या करने का निर्णय लिया।

भोपाल के ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एआईआईएमएस) में डॉ. के. गोपी एक एनेस्थेटिस्ट थे, और उनकी पत्नी शंकरा कुमारी (30) उसी अस्पताल में नर्स के रूप में कार्यरत थीं।

के. गोपी और उनकी पत्नी शंकरा कुमारी ने रविवार को आंध्र प्रदेश के पालनाडु जिले के नरसारावपेट में एक लॉज में जहरीला पदार्थ का इंजेक्शन लगाकर आत्महत्या करने का प्रयास किया। शंकरा कुमारी और मौनिका की मृत्यु रविवार को हो गई, जबकि डॉ. गोपी ने सोमवार को नरसारावपेट के एक निजी अस्पताल में दम तोड़ दिया।

पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि इस दंपति ने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि वे अपनी बेटी की स्थिति से अत्यधिक परेशान थे।

गोपी, जो सतलुरु गांव के निवासी हैं, और शंकरा कुमारी, जो श्री सत्य साई जिले के धर्मवरम की निवासी हैं, का प्रेम विवाह हुआ था। मानसिक और शारीरिक रूप से दिव्यांग मोनिका के जन्म के बाद दोनों अवसादग्रस्त हो गए थे।

शंकरा कुमारी अपनी बेटी के साथ 20 दिन पहले अपने पैतृक गांव में अपने माता-पिता से मिलने आई थीं। गोपी भी दो दिन पहले भोपाल से आए थे। उन्होंने शनिवार को पत्नी और बेटी को नरसारावपेट बुलाया और वे दिनेश ग्रैंड लॉज में ठहरे।

रविवार सुबह गोपी ने अपनी बहन को व्हाट्सएप पर एक संदेश और कुछ तस्वीरें भेजीं, जिसमें उसने बताया कि वे आत्महत्या कर रहे हैं। बहन ने परिवार के अन्य सदस्यों को सूचित किया, जो तुरंत लॉज पहुंचे और तीनों को बेहोश पाया। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां शंकरा कुमारी और मोनिका ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।

गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती गोपी ने सोमवार तड़के दम तोड़ दिया। पुलिस ने लॉज से कुछ बेहोशी की गोलियां, सिरिंज और अन्य सामग्री बरामद की। सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद दंपति और उनकी बेटी के शव परिवार को सौंप दिए गए। पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो परिवारों को प्रभावित कर सकते हैं। समाज को इस दिशा में जागरूक होना होगा ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति से बचा जा सके।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दंपति की बेटी की उम्र क्या थी?
उनकी बेटी की उम्र तीन साल थी।
पुलिस ने क्या कार्रवाई की?
पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और घटनास्थल से सामग्री बरामद की।
दंपति का पेशा क्या था?
डॉ. के. गोपी एक एनेस्थेटिस्ट थे और उनकी पत्नी एक नर्स थीं।
क्या दंपति के पास कोई मानसिक स्वास्थ्य समस्या थी?
जानकारी के अनुसार, दंपति अपनी बेटी की स्थिति को लेकर अत्यधिक परेशान थे।
राष्ट्र प्रेस
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