तेलंगाना आरटीसी हड़ताल: तीसरे दिन भी 40,000 कर्मचारी बेपटरी, ड्राइवर शंकर गौड़ की मौत से तनाव
सारांश
Key Takeaways
- तेलंगाना आरटीसी हड़ताल लगातार तीसरे दिन जारी, 40,000 कर्मचारी काम से दूर।
- आरटीसी ड्राइवर शंकर गौड़ (55) की 24 अप्रैल को हैदराबाद के अपोलो डीआरडीओ अस्पताल में मौत, 80%25 जल गए थे।
- उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क की अध्यक्षता में कैबिनेट उपसमिति कर्मचारी नेताओं से वार्ता करेगी।
- बीआरएस नेता पेड्डी सुदर्शन रेड्डी को पुलिस ने हिरासत में लिया, मुथुपेट में झड़प।
- एमजीबीएस और जेबीएस से आंशिक बस सेवाएं जारी, मेट्रो और एमएमटीएस में भारी भीड़।
- कर्मचारी जेएसी ने आपात बैठक बुलाई, आगे की रणनीति बातचीत के नतीजे पर निर्भर।
हैदराबाद, 24 अप्रैल: तेलंगाना राज्य सड़क परिवहन निगम (टीजीएसआरटीसी) के करीब 40,000 कर्मचारियों की हड़ताल शुक्रवार को लगातार तीसरे दिन भी जारी रही, जिससे पूरे राज्य में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था चरमरा गई है। इस बीच वारंगल जिले में आत्मदाह करने वाले आरटीसी ड्राइवर शंकर गौड़ (55) की हैदराबाद के अपोलो डीआरडीओ अस्पताल में मौत ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। सरकार ने बातचीत का रास्ता खुला रखते हुए उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क की अगुवाई में कैबिनेट उपसमिति गठित की है।
शंकर गौड़ की मौत से भड़का आक्रोश
शंकर गौड़ ने वारंगल जिले के नरसंपेट डिपो के पास प्रदर्शन के दौरान खुद को आग लगा ली थी। वह करीब 80 प्रतिशत तक जल गए थे और उपचार के दौरान शुक्रवार सुबह उनका निधन हो गया। उनकी मौत की खबर फैलते ही मुथुपेट इलाके में तनाव का माहौल बन गया।
कर्मचारी शंकर गौड़ के शव को नरसंपेट डिपो ले जाना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने इसे रोक दिया। इससे प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हो गई। गुरुवार को कुछ अन्य कर्मचारियों ने भी आत्मदाह की कोशिश की थी, लेकिन साथियों और पुलिस ने उन्हें समय रहते रोक लिया।
बीआरएस का समर्थन, नेता हिरासत में
विपक्षी दल भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के नेता हड़ताली कर्मचारियों के समर्थन में खुलकर सामने आए। बीआरएस नेता और पूर्व विधायक पेड्डी सुदर्शन रेड्डी को पुलिस ने हिरासत में लेकर थाने भेज दिया। राज्यभर के आरटीसी डिपो पर सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं ताकि किसी और अप्रिय घटना को रोका जा सके।
सरकार की प्रतिक्रिया और बातचीत की उम्मीद
गुरुवार शाम हुई कैबिनेट बैठक में सरकार ने कर्मचारियों से हड़ताल समाप्त करने और संयम बनाए रखने की अपील की। सरकार ने आश्वासन दिया कि बातचीत के जरिए सभी मांगों का समाधान किया जाएगा। उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क की अध्यक्षता में बनी कैबिनेट उपसमिति शीघ्र ही कर्मचारी नेताओं से वार्ता करेगी।
शंकर गौड़ की मौत के बाद कर्मचारियों की संयुक्त कार्रवाई समिति (जेएसी) ने आपात बैठक बुलाई है, जिसमें आगे की रणनीति तय की जा रही है। जेएसी का रुख बातचीत पर निर्भर करेगा।
आम जनता पर असर
तीन दिनों से जारी इस हड़ताल ने तेलंगाना के लाखों दैनिक यात्रियों, छात्रों, सरकारी-निजी कर्मचारियों और दिहाड़ी मजदूरों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। राज्य की अधिकांश बसें डिपो में खड़ी हैं। हैदराबाद मेट्रो और एमएमटीएस ट्रेनों में असामान्य भीड़ देखी जा रही है।
टीजीएसआरटीसी के अनुसार किराये की, निजी और इलेक्ट्रिक बसों के जरिए आंशिक सेवाएं संचालित की जा रही हैं। महात्मा गांधी बस स्टेशन (एमजीबीएस) और जुबली बस स्टेशन (जेबीएस) से कुछ बसें चलाई जा रही हैं। आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र के लिए भी सीमित अंतरराज्यीय सेवाएं उपलब्ध हैं।
गहरा संदर्भ: यह पहली बार नहीं
गौरतलब है कि तेलंगाना आरटीसी में कर्मचारी असंतोष कोई नई बात नहीं है। 2019 में भी आरटीसी कर्मचारियों ने लंबी हड़ताल की थी, जो तत्कालीन मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव की सरकार के दौरान हुई थी और उसमें भी कर्मचारियों को भारी कीमत चुकानी पड़ी थी। अब कांग्रेस सरकार के सामने वही पुरानी चुनौती फिर खड़ी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी परिवहन निगमों में वेतन विसंगति, सेवा शर्तों की अनदेखी और नियमितीकरण की मांग जैसी समस्याएं देशभर में एक साझा पैटर्न बन चुकी हैं। शंकर गौड़ जैसी दुखद घटनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि कर्मचारियों में हताशा किस हद तक पहुंच चुकी है।
अब सबकी नजरें जेएसी और कैबिनेट उपसमिति की बातचीत पर टिकी हैं। यदि सरकार ठोस आश्वासन नहीं देती, तो हड़ताल और लंबी खिंच सकती है, जिसका असर राज्य की अर्थव्यवस्था और आगामी स्थानीय निकाय चुनावों पर भी पड़ सकता है।