गाजीपुर दुष्कर्म पर डिंपल यादव का बड़ा बयान — प्रशासन के असंवेदनशील रवैये पर उठाए तीखे सवाल
सारांश
Key Takeaways
- सपा सांसद डिंपल यादव ने गाजीपुर दुष्कर्म मामले को 23 अप्रैल को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
- पीड़ित परिवार से मिलने गए सपा प्रतिनिधिमंडल के साथ प्रशासन का व्यवहार असंवेदनशील रहा — डिंपल यादव का आरोप।
- महिला आरक्षण बिल 2023 संसद में पारित हो चुका है, लेकिन परिसीमन और जनगणना में देरी से लागू नहीं हो पा रहा।
- डिंपल यादव ने जातिगत जनगणना की मांग करते हुए गृह मंत्री अमित शाह के बयान का हवाला दिया।
- सपा का आरोप — भाजपा के लिए महिला आरक्षण राजनीतिक मुखौटा मात्र है।
- यह मामला 2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले महिला सुरक्षा को बड़े राजनीतिक मुद्दे के रूप में स्थापित कर रहा है।
गाजीपुर दुष्कर्म मामला: डिंपल यादव का तीखा बयान
मैनपुरी, 23 अप्रैल — उत्तर प्रदेश के गाजीपुर दुष्कर्म मामले को लेकर समाजवादी पार्टी की मैनपुरी सांसद डिंपल यादव ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस घटना को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि एक पिछड़ी जाति की युवती के साथ दुष्कर्म हुआ और गंभीर हालत में उसकी मृत्यु हो गई, जो समाज और शासन-व्यवस्था दोनों के लिए गहरी चिंता का विषय है।
प्रशासन के रवैये पर उठे सवाल
डिंपल यादव ने मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि जब समाजवादी पार्टी का प्रतिनिधिमंडल पीड़िता के परिजनों से मिलने पहुंचा, तब स्थानीय प्रशासन और अधिकारियों का व्यवहार पूरी तरह असंवेदनशील था। उनके मुताबिक इस तरह का रवैया देश के लोकतांत्रिक ढांचे और संवैधानिक मूल्यों पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार लगातार संविधान और लोकतंत्र को कमजोर करने की दिशा में काम कर रही है। सपा इस मुद्दे को लगातार उठाती रही है और आगे भी उठाती रहेगी।
महिला आरक्षण और जनगणना पर स्पष्ट रुख
महिला आरक्षण बिल 2023 के संदर्भ में डिंपल यादव ने कहा कि यह विधेयक संसद में पारित हो चुका है और इसे लेकर किसी भी प्रकार की भ्रामक जानकारी फैलाना उचित नहीं है। उन्होंने सरकार से मांग की कि जनगणना का कार्य जल्द से जल्द पूरा किया जाए।
गृह मंत्री अमित शाह के बयान का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि यदि जनगणना होनी है तो उसे जातिगत आधार पर भी कराया जाना चाहिए, ताकि वंचित वर्गों को उनका उचित प्रतिनिधित्व मिल सके।
परिसीमन और आरक्षण की मांग
डिंपल यादव ने परिसीमन प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण करने और महिलाओं को प्रभावी रूप से आरक्षण देने की मांग दोहराई। उनका कहना था कि नई सीटों के निर्माण के बाद आरक्षण अधिक प्रभावी होगा, लेकिन यदि सरकार वास्तव में महिलाओं के प्रति गंभीर है तो मौजूदा सीटों पर भी आरक्षण तत्काल लागू किया जा सकता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के लिए महिला आरक्षण का मुद्दा महज एक राजनीतिक मुखौटा बनकर रह गया है। सरकार परिसीमन से बचने के लिए जनगणना कराने में जानबूझकर देरी कर रही है।
गहरा संदर्भ: उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा का सवाल
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में महिलाओं के विरुद्ध अपराध के मामले लगातार चर्चा में रहे हैं। 2012 के निर्भया कांड के बाद से देशभर में कानूनी सुधार हुए, लेकिन जमीनी हकीकत अलग बनी हुई है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश दुष्कर्म के मामलों में शीर्ष राज्यों में शामिल रहा है। ऐसे में पीड़ित परिवार से मिलने गए प्रतिनिधिमंडल के साथ प्रशासन का कथित असंवेदनशील व्यवहार विपक्ष को सरकार पर हमले का एक और अवसर देता है।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियां अभी से शुरू हो रही हैं और सपा महिला मुद्दों को केंद्र में रखकर भाजपा को घेरने की रणनीति पर काम कर रही है। आने वाले दिनों में इस मामले पर राजनीतिक गर्माहट और बढ़ने की संभावना है।