बांकीपुर उपचुनाव से पहले जन सुराज को झटका: के.सी. सिन्हा, बिट्टू सिंह समेत दर्जनों नेता भाजपा में शामिल
सारांश
मुख्य बातें
बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर 30 जुलाई को होने वाले उपचुनाव से पहले जन सुराज पार्टी को बड़ा राजनीतिक धक्का लगा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता के.सी. सिन्हा और रितेश रंजन उर्फ बिट्टू सिंह समेत दर्जनों नेताओं एवं सैकड़ों समर्थकों ने बुधवार, 15 जुलाई को भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सदस्यता ग्रहण कर ली। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर स्वयं बांकीपुर उपचुनाव में प्रत्याशी के रूप में मैदान में हैं।
मुख्य घटनाक्रम
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने पटना में आयोजित एक कार्यक्रम में सभी नेताओं को पार्टी की सदस्यता दिलाई और उनका स्वागत किया। भाजपा में शामिल होने वालों में के.सी. सिन्हा — जो पिछले विधानसभा चुनाव में कुम्हरार सीट से जन सुराज के अधिकृत प्रत्याशी थे — और रितेश रंजन उर्फ बिट्टू सिंह — जिन्होंने दीघा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था — प्रमुख हैं। दोनों नेताओं का अपने-अपने क्षेत्रों में उल्लेखनीय जनाधार माना जाता है।
इनके अतिरिक्त गोपाल सिंह (मनेर विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी), विनीता बिट्टू सिंह (पूर्व मेयर प्रत्याशी), डॉ. किशोर कुमार, ब्रज किशोर सिन्हा, ब्रह्मदेव मांझी, सुनील यादव, राजू यादव, रंजीत सिंह, राम बाबू यादव, शुभम सिंह, मंटू राय और साधु जी समेत कई अन्य नेताओं ने भी भाजपा की सदस्यता ली।
उपचुनाव की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि यह उपचुनाव नितिन नवीन के बांकीपुर विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद आवश्यक हुआ है। नवीन ने राज्यसभा सदस्य निर्वाचित होने के बाद विधायक पद छोड़ा था। वे बांकीपुर से लगातार चार बार विधायक रह चुके हैं, जो इस सीट पर भाजपा की पकड़ को दर्शाता है। मतदान 30 जुलाई को निर्धारित है।
भाजपा की प्रतिक्रिया
सरावगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के कार्यों और भाजपा की नीतियों से प्रभावित होकर विभिन्न दलों के नेता बड़ी संख्या में पार्टी से जुड़ रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि 'पूरे देश में विपक्षी दलों में भगदड़ की स्थिति है और जनप्रतिनिधि लगातार भाजपा से जुड़ रहे हैं।' सरावगी ने विश्वास जताया कि नए सदस्य संगठन को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे।
जन सुराज पर असर और चुनावी समीकरण
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बांकीपुर उपचुनाव से ठीक पहले जन सुराज के इन प्रमुख नेताओं का पार्टी छोड़ना चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। यह ऐसे समय में हुआ है जब प्रशांत किशोर खुद इस सीट से ताल ठोंक रहे हैं और पार्टी अपनी पहचान स्थापित करने की कोशिश में है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि 30 जुलाई के मतदान में मतदाता इस राजनीतिक उठापटक को किस नज़रिए से देखते हैं।