बांकीपुर उपचुनाव: भाजपा ने अभिषेक कुमार की जगह नीरज कुमार सिन्हा को बनाया उम्मीदवार
सारांश
मुख्य बातें
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बड़ा बदलाव करते हुए 10 जुलाई 2026 को नीरज कुमार सिन्हा को अपना नया प्रत्याशी घोषित किया। पार्टी के पहले घोषित उम्मीदवार अभिषेक कुमार ने पारिवारिक कारणों का हवाला देते हुए चुनाव से नाम वापस ले लिया और इस संबंध में प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी को पत्र सौंपा।
कौन हैं नीरज कुमार सिन्हा
उपलब्ध बायोडाटा के अनुसार, नीरज कुमार सिन्हा का जन्म 1 जुलाई 1994 को पटना में हुआ। वह वर्तमान में मीठापुर के निवासी हैं। उनके पिता स्वर्गीय युग कुमार और माता स्वर्गीय सरोज देवी थीं। वह अविवाहित हैं और उन्होंने बी.ए. तक की शिक्षा प्राप्त की है।
संगठन में दो दशक का अनुभव
नीरज कुमार सिन्हा ने वर्ष 2006 में BJP की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण की थी। तब से वह संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियाँ निभाते आए हैं। वह नरेंद्र भारती मंडल के बूथ अध्यक्ष, मंडल महामंत्री, भाजयुमो जिला उपाध्यक्ष और दो बार मंडल अध्यक्ष रह चुके हैं। वर्तमान में भी वह नरेंद्र भारती मंडल के मंडल अध्यक्ष के पद पर हैं।
गौरतलब है कि उनके चाचा स्वर्गीय नरेंद्र भारती जनसंघ काल के कार्यकर्ता थे, जिनका निधन वर्ष 1984 में हुआ था। उनके निधन के बाद ही संबंधित मंडल का नाम 'नरेंद्र भारती मंडल' रखा गया — यह पारिवारिक पृष्ठभूमि नीरज की BJP से गहरी जड़ों को रेखांकित करती है।
बांकीपुर में राजनीतिक समीकरण
उम्मीदवार बदलने के इस फैसले के बाद बांकीपुर उपचुनाव का मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। इस सीट पर अब तीन प्रमुख दावेदार हैं — राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की उम्मीदवार रेखा गुप्ता, जनसुराज के प्रत्याशी प्रशांत किशोर, और BJP की ओर से नीरज कुमार सिन्हा। माना जा रहा है कि इन तीनों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल सकती है।
BJP की रणनीति
यह ऐसे समय में आया है जब BJP पटना की इस प्रतिष्ठित सीट पर अपनी पकड़ बनाए रखना चाहती है। पार्टी ने अंतिम समय में उम्मीदवार बदलकर संगठनात्मक अनुभव और ज़मीनी जुड़ाव रखने वाले नेता पर दाँव लगाया है। नीरज का दो दशक से अधिक का संगठनात्मक करियर इस चुनाव में पार्टी की मुख्य ताकत के रूप में पेश किया जा रहा है।
आगे क्या
अब सभी की निगाहें नामांकन प्रक्रिया और प्रचार अभियान पर टिकी हैं। बांकीपुर की यह सीट पटना की राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण विधानसभाओं में से एक मानी जाती है और इस उपचुनाव के नतीजे बिहार की राजनीति पर असर डाल सकते हैं।