बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव: भाजपा प्रत्याशी अभिषेक कुमार बंटी ने किया नामांकन, एनडीए को जीत का भरोसा
सारांश
मुख्य बातें
बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर 30 जुलाई को होने वाले उपचुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रत्याशी अभिषेक कुमार सिन्हा उर्फ बंटी ने गुरुवार, 9 जुलाई को पटना कलक्ट्रेट में अपना नामांकन दाखिल किया। नामांकन के दौरान राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में सभी ने अभिषेक की जीत के प्रति आत्मविश्वास जताया। इस सीट पर 3 अगस्त को मतगणना होगी।
नामांकन का घटनाक्रम
नामांकन समारोह में एनडीए के कई वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे, जिन्होंने अभिषेक कुमार बंटी को जीत का आशीर्वाद दिया। बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बताया कि वे पटना कलक्ट्रेट में एनडीए प्रत्याशी के नामांकन में सहभागी बने। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की सांसद शांभवी चौधरी ने कहा कि नामांकन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब प्रचार अभियान को गति दी जाएगी।
एनडीए नेताओं का दावा
भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा कि बांकीपुर उपचुनाव में एनडीए पूरी तरह एकजुट है और उन्हें पूरा भरोसा है कि प्रत्याशी अभिषेक कुमार बंटी निर्णायक जीत हासिल करेंगे। उन्होंने इस सीट पर भाजपा की जीत को सुनिश्चित बताया।
बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी ने कहा, 'उपचुनाव है और जनता ही मालिक है। हम भी लोगों के पास जाएंगे और एनडीए प्रत्याशी के लिए समर्थन मांगेंगे।' उन्होंने यह भी कहा कि बांकीपुर क्षेत्र में नितिन नवीन और उनके पिता ने विकास कार्यों के ज़रिए जनता से गहरा भावनात्मक जुड़ाव बनाया है। मंत्री ने बताया कि नितिन नवीन के पिता के आकस्मिक निधन के बाद वे राजनीति में आए और उनका स्वभाव बेहद विनम्र है।
प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवारों की स्थिति
इस सीट पर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार भी मैदान में हैं। जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी प्रशांत किशोर लगातार क्षेत्र में पैदल यात्रा कर जनता से सीधा संपर्क बना रहे हैं और समर्थन जुटाने में जुटे हैं।
सीट खाली होने की पृष्ठभूमि
बांकीपुर विधानसभा सीट नितिन नवीन के राज्यसभा सांसद निर्वाचित होने के बाद रिक्त हुई है। यह सीट पटना जिले की राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सीटों में गिनी जाती है। गौरतलब है कि इस क्षेत्र में नितिन नवीन के परिवार की लंबे समय से राजनीतिक उपस्थिति रही है, जो एनडीए के लिए परंपरागत रूप से अनुकूल मानी जाती है।
आगे क्या
30 जुलाई को मतदान और 3 अगस्त को मतगणना के साथ यह उपचुनाव बिहार की राजनीति में एनडीए, राजद और जन सुराज की ताकत का अगला परीक्षण बनेगा। प्रचार अभियान अब तेज़ होने की उम्मीद है।