9 जुलाई 2026
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असम के छह समुदायों को ST दर्जा: केंद्र के पाले में गेंद, मंत्री पेगू बोले — कोई समयसीमा नहीं

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असम के छह समुदायों को ST दर्जा: केंद्र के पाले में गेंद, मंत्री पेगू बोले — कोई समयसीमा नहीं

सारांश

असम के छह समुदायों को ST दर्जा दिलाने की राह अभी लंबी है। राज्य ने अपनी सिफारिश केंद्र को भेज दी है, लेकिन मंत्री पेगू का साफ कहना है — अंतिम फैसला दिल्ली के हाथ में है और कोई समयसीमा नहीं।

मुख्य बातें

असम के छह समुदायों को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने का प्रस्ताव अभी केंद्र सरकार के विचाराधीन है।
मंत्री रानोज पेगू ने 9 जुलाई 2026 को असम विधानसभा में कहा कि प्रक्रिया पूरी होने की कोई समयसीमा नहीं बताई जा सकती।
असम सरकार द्वारा गठित मंत्रियों के समूह (GoM) की रिपोर्ट को नवंबर 2025 के शीतकालीन सत्र में मंजूरी मिली थी।
केंद्र ने राज्य से यह आकलन करने को कहा था कि नए ST दर्जे से मौजूदा जनजातीय समुदायों के आरक्षण व अधिकारों पर असर तो नहीं पड़ेगा।
राज्य सरकार ने अपनी सिफारिशें केंद्र को भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है; अंतिम निर्णय केंद्र का होगा।

असम के छह समुदायों को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा दिलाने का लंबित प्रस्ताव अब केंद्र सरकार के विचाराधीन है। शिक्षा और जनजातीय मामलों के मंत्री रानोज पेगू ने 9 जुलाई 2026 को असम विधानसभा में स्पष्ट किया कि यह मामला केंद्र के संवैधानिक अधिकार क्षेत्र में होने के कारण राज्य सरकार इसके लिए कोई समयसीमा निर्धारित करने की स्थिति में नहीं है। राज्य सरकार अपनी सिफारिशें केंद्र को भेजने की प्रक्रिया में है।

विधानसभा में उठा सवाल

विधायक चक्रधर गोगोई द्वारा विधानसभा सत्र में पूछे गए प्रश्न के जवाब में मंत्री पेगू ने कहा कि किसी भी समुदाय को अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल करने का अधिकार पूरी तरह केंद्र सरकार के पास है और इसके लिए संवैधानिक एवं संसदीय प्रक्रियाओं का पालन अनिवार्य है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य स्तर पर सौंपी गई सभी प्रक्रियाएँ पूरी की जा चुकी हैं।

मंत्रियों के समूह की भूमिका

इस मुद्दे की व्यापक समीक्षा के लिए असम सरकार ने मंत्रियों का एक समूह (GoM) गठित किया था। पेगू ने सदन को बताया कि GoM ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसे नवंबर 2025 में आयोजित असम विधानसभा के शीतकालीन सत्र में मंजूरी दी गई। यह रिपोर्ट अब राज्य सरकार की सिफारिशों के साथ केंद्र को अग्रेषित की जा रही है।

केंद्र की माँग और असम का जवाब

केंद्र सरकार ने राज्य से एक विस्तृत रिपोर्ट माँगी थी, जिसमें यह आकलन किया जाना था कि छह नए समुदायों को ST दर्जा देने से असम के मौजूदा अनुसूचित जनजाति समुदायों की संवैधानिक सुरक्षा, आरक्षण लाभ और अन्य अधिकारों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव तो नहीं पड़ेगा। पेगू के अनुसार, राज्य ने इस माँग के अनुरूप अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली है।

आगे क्या होगा

मंत्री ने दोहराया कि अंतिम निर्णय पूरी तरह केंद्र सरकार के हाथ में है। यह ऐसे समय में आया है जब असम के कई समुदाय वर्षों से ST दर्जे की माँग करते आए हैं और यह मुद्दा राज्य की राजनीति में संवेदनशील बना हुआ है। गौरतलब है कि ST दर्जे से जुड़े प्रस्ताव अक्सर दशकों तक केंद्र-राज्य के बीच लंबित रहते हैं, और इस मामले में भी अंतिम अधिसूचना की तारीख अनिश्चित बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 'समयसीमा नहीं' वाला जवाब उन समुदायों के लिए निराशाजनक है जो वर्षों से इस दर्जे की प्रतीक्षा में हैं। असली सवाल यह है कि केंद्र इस रिपोर्ट पर कितनी तेज़ी से कार्रवाई करेगा — और क्या यह निर्णय राजनीतिक कैलेंडर से स्वतंत्र होगा।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम के किन छह समुदायों को ST दर्जा देने की माँग है?
स्रोत में छह समुदायों के नाम विशेष रूप से नहीं बताए गए हैं, लेकिन यह प्रस्ताव लंबे समय से असम में लंबित है। इन समुदायों की पहचान राज्य सरकार द्वारा गठित मंत्रियों के समूह (GoM) की रिपोर्ट में दर्ज है, जिसे नवंबर 2025 में विधानसभा ने मंजूरी दी।
असम में ST दर्जे का फैसला कौन करता है?
किसी भी समुदाय को अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल करने का अधिकार संवैधानिक रूप से केंद्र सरकार के पास है। राज्य सरकार केवल सिफारिश कर सकती है; अंतिम अधिसूचना संसद के माध्यम से केंद्र जारी करता है।
असम सरकार ने इस मामले में अब तक क्या किया है?
असम सरकार ने मंत्रियों का एक समूह (GoM) गठित किया, जिसने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस रिपोर्ट को नवंबर 2025 के शीतकालीन सत्र में विधानसभा की मंजूरी मिली और अब इसे केंद्र को भेजा जा रहा है।
केंद्र ने असम से किस तरह की रिपोर्ट माँगी थी?
केंद्र सरकार ने राज्य से एक विस्तृत रिपोर्ट माँगी थी जिसमें यह आकलन हो कि नए छह समुदायों को ST दर्जा देने से असम के मौजूदा अनुसूचित जनजाति समुदायों के आरक्षण लाभ, संवैधानिक सुरक्षा और अन्य अधिकारों पर कोई प्रतिकूल असर तो नहीं पड़ेगा।
इस प्रस्ताव पर फैसला कब तक आ सकता है?
मंत्री रानोज पेगू के अनुसार, राज्य सरकार इस बारे में कोई समयसीमा नहीं बता सकती क्योंकि अंतिम निर्णय पूरी तरह केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में है। फिलहाल राज्य की सिफारिशें केंद्र को भेजी जा रही हैं।
राष्ट्र प्रेस
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