असम के छह समुदायों को ST दर्जा: केंद्र के पाले में गेंद, मंत्री पेगू बोले — कोई समयसीमा नहीं
सारांश
मुख्य बातें
असम के छह समुदायों को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा दिलाने का लंबित प्रस्ताव अब केंद्र सरकार के विचाराधीन है। शिक्षा और जनजातीय मामलों के मंत्री रानोज पेगू ने 9 जुलाई 2026 को असम विधानसभा में स्पष्ट किया कि यह मामला केंद्र के संवैधानिक अधिकार क्षेत्र में होने के कारण राज्य सरकार इसके लिए कोई समयसीमा निर्धारित करने की स्थिति में नहीं है। राज्य सरकार अपनी सिफारिशें केंद्र को भेजने की प्रक्रिया में है।
विधानसभा में उठा सवाल
विधायक चक्रधर गोगोई द्वारा विधानसभा सत्र में पूछे गए प्रश्न के जवाब में मंत्री पेगू ने कहा कि किसी भी समुदाय को अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल करने का अधिकार पूरी तरह केंद्र सरकार के पास है और इसके लिए संवैधानिक एवं संसदीय प्रक्रियाओं का पालन अनिवार्य है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य स्तर पर सौंपी गई सभी प्रक्रियाएँ पूरी की जा चुकी हैं।
मंत्रियों के समूह की भूमिका
इस मुद्दे की व्यापक समीक्षा के लिए असम सरकार ने मंत्रियों का एक समूह (GoM) गठित किया था। पेगू ने सदन को बताया कि GoM ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसे नवंबर 2025 में आयोजित असम विधानसभा के शीतकालीन सत्र में मंजूरी दी गई। यह रिपोर्ट अब राज्य सरकार की सिफारिशों के साथ केंद्र को अग्रेषित की जा रही है।
केंद्र की माँग और असम का जवाब
केंद्र सरकार ने राज्य से एक विस्तृत रिपोर्ट माँगी थी, जिसमें यह आकलन किया जाना था कि छह नए समुदायों को ST दर्जा देने से असम के मौजूदा अनुसूचित जनजाति समुदायों की संवैधानिक सुरक्षा, आरक्षण लाभ और अन्य अधिकारों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव तो नहीं पड़ेगा। पेगू के अनुसार, राज्य ने इस माँग के अनुरूप अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली है।
आगे क्या होगा
मंत्री ने दोहराया कि अंतिम निर्णय पूरी तरह केंद्र सरकार के हाथ में है। यह ऐसे समय में आया है जब असम के कई समुदाय वर्षों से ST दर्जे की माँग करते आए हैं और यह मुद्दा राज्य की राजनीति में संवेदनशील बना हुआ है। गौरतलब है कि ST दर्जे से जुड़े प्रस्ताव अक्सर दशकों तक केंद्र-राज्य के बीच लंबित रहते हैं, और इस मामले में भी अंतिम अधिसूचना की तारीख अनिश्चित बनी हुई है।