असम विधानसभा स्पीकर रंजीत कुमार दास ने दूसरी बार संभाला पद, बोले — सत्ता और विपक्ष दोनों का विश्वास होगा प्राथमिकता
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता रंजीत कुमार दास ने गुरुवार, 21 मई को दूसरी बार असम विधानसभा के अध्यक्ष पद की शपथ ली और स्पष्ट किया कि वह सत्ता पक्ष तथा विपक्ष — दोनों को विश्वास में लेकर सदन की कार्यवाही संचालित करेंगे। पदभार ग्रहण करने के तुरंत बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने निष्पक्षता और लोकतांत्रिक मूल्यों को अपने कार्यकाल की आधारशिला बताया।
मुख्य घोषणाएँ और प्राथमिकताएँ
दास ने कहा कि असम की जनता की उम्मीदों और आकांक्षाओं को विधानसभा में उचित स्थान दिलाना उनकी प्रमुख जिम्मेदारी होगी। उन्होंने कहा, 'हम सभी विपक्षी विधायकों को विश्वास में लेकर काम करेंगे। असम की जनता की उम्मीदों और आकांक्षाओं को विधानसभा में उचित स्थान मिलना चाहिए।' उनके अनुसार, निष्पक्षता बनाए रखना और मानवीय तथा लोकतांत्रिक दृष्टिकोण से कार्य करना उनकी प्राथमिकता रहेगी।
सरकार और मंत्रिपरिषद पर विश्वास
नवनिर्वाचित स्पीकर ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली सरकार की सराहना करते हुए कहा कि मंत्रिपरिषद हमेशा जनता के मुद्दों को संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ देखती रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि विधानसभा अध्यक्ष के रूप में वह भी इसी भावना को आगे बढ़ाएंगे। आने वाले दिनों में जनता से जुड़े सभी मुद्दों को मानवीय दृष्टिकोण से देखने का उन्होंने संकल्प लिया।
पत्रकारिता की पृष्ठभूमि और मीडिया से जुड़ाव
दास ने राजनीति में आने से पहले नॉर्थ ईस्ट मीडिया कॉरपोरेशन (NEMC) में अपने लंबे अनुभव का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, 'मैं पहले एनईएमसी में काम कर चुका हूं और मीडिया से मेरा गहरा जुड़ाव रहा है। इसलिए पत्रकारों से बात करना मेरे लिए कभी मुश्किल नहीं होता।' उनका मानना है कि पत्रकारिता की पृष्ठभूमि ने उन्हें जनसंवाद के प्रति अधिक संवेदनशील बनाया है।
लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका
स्पीकर दास ने मीडिया को लोकतंत्र के प्रमुख स्तंभों में से एक बताया और कहा कि इसके बिना सरकार की योजनाओं तथा जनता के मुद्दों को समाज तक प्रभावी ढंग से पहुँचाना संभव नहीं है। उन्होंने कहा, 'मीडिया लगातार लोकतांत्रिक संवाद को आगे बढ़ाता है। मीडिया के बिना हम लोगों तक अपनी बात या सरकार के काम नहीं पहुंचा सकते।' सार्वजनिक सभाओं में वह अपने पूर्व पत्रकार साथियों को विशेष रूप से याद करते हैं।
विधानसभा की गरिमा बनाए रखने की प्रतिबद्धता
दास ने असम विधानसभा की लोकतांत्रिक परंपराओं और गरिमा को बनाए रखते हुए सदन के सुचारू संचालन के प्रति अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराई। गौरतलब है कि यह उनका दूसरा कार्यकाल है, जो उनके राजनीतिक अनुभव और विधायी समझ को रेखांकित करता है। आने वाले सत्रों में उनके नेतृत्व में सदन की कार्यवाही किस दिशा में आगे बढ़ती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।