असम में भाजपा की ऐतिहासिक जीत: नड्डा पर्यवेक्षक, 82 सीटें जीतकर तीसरी बार सरकार गठन की तैयारी
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने असम विधानसभा चुनाव में 126 सदस्यीय विधानसभा की 82 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया है और अब 5 मई 2026 को गुवाहाटी से सरकार गठन की प्रक्रिया तेज कर दी है। पार्टी ने विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा को केंद्रीय पर्यवेक्षक और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को सह-पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। यह भाजपा की असम में लगातार तीसरी सरकार बनाने की दिशा में निर्णायक कदम है।
पर्यवेक्षकों की नियुक्ति और जिम्मेदारियाँ
भाजपा के संसदीय बोर्ड ने आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में यह जानकारी दी। जगत प्रकाश नड्डा केंद्र सरकार में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री के साथ-साथ रसायन एवं उर्वरक मंत्री भी हैं। उनकी नियुक्ति इस बात का संकेत है कि पार्टी हाईकमान असम में सरकार गठन को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को सह-पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त किया गया है, जो नड्डा के साथ मिलकर विधायक दल के नेता के चुनाव की प्रक्रिया को संपन्न कराएंगे। गौरतलब है कि भाजपा परंपरागत रूप से किसी वरिष्ठ केंद्रीय नेता को पर्यवेक्षक नियुक्त करती है ताकि राज्य स्तर पर नेतृत्व चयन में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
चुनाव परिणामों की तस्वीर
126 सदस्यीय असम विधानसभा में भाजपा ने 82 सीटें जीतकर स्पष्ट और निर्णायक जनादेश प्राप्त किया। कांग्रेस केवल 19 सीटों पर सिमट गई, जबकि असम गण परिषद (एजीपी) और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) को 10-10 सीटें मिलीं।
अन्य दलों में ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) और रायजोर दल ने 2-2 सीटें जीतीं, जबकि तृणमूल कांग्रेस (TMC) को मात्र 1 सीट से संतोष करना पड़ा। यह परिणाम असम में भाजपा के जनाधार के और मजबूत होने का प्रमाण है।
हिमंता बिस्वा सरमा का शानदार प्रदर्शन
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने अपनी जालुकबारी सीट 89,434 वोटों के भारी अंतर से जीतकर राज्य में अपना राजनीतिक दबदबा बरकरार रखा। भाजपा के कई अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी इस चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया, जिससे पार्टी की समग्र स्थिति और सुदृढ़ हुई।
कांग्रेस को करारा झटका
दूसरी ओर, कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं को इस चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा। गौरव गोगोई जोरहाट सीट से चुनाव हार गए, जबकि वरिष्ठ नेता देबब्रत सैकिया भी अपनी सीट नहीं बचा सके। यह ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस पहले से ही कई राज्यों में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए संघर्ष कर रही है।
आगे क्या होगा
विधायक दल के नेता का चुनाव अगला अहम कदम होगा, जिसके बाद नई सरकार के गठन की औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, हिमंता बिस्वा सरमा के फिर से मुख्यमंत्री बनने की संभावना प्रबल है, हालांकि आधिकारिक घोषणा विधायक दल की बैठक के बाद ही होगी। लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी के साथ भाजपा असम में अपनी राजनीतिक पकड़ को और गहरा करने की स्थिति में है।