रंजीत कुमार दास असम विधानसभा के नए स्पीकर, सीएम हिमंता सरमा बोले — लाखों भाजपा कार्यकर्ताओं का गर्व का क्षण

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रंजीत कुमार दास असम विधानसभा के नए स्पीकर, सीएम हिमंता सरमा बोले — लाखों भाजपा कार्यकर्ताओं का गर्व का क्षण

सारांश

असम में भाजपा के वरिष्ठ नेता रंजीत कुमार दास विधानसभा अध्यक्ष बने। सीएम हिमंता सरमा ने इसे जमीनी कार्यकर्ताओं की जीत बताया और दास से निष्पक्ष संचालन तथा 'राष्ट्र प्रथम' के सिद्धांत पर चलने की अपील की।

मुख्य बातें

रंजीत कुमार दास को 21 मई 2026 को असम विधानसभा का नया अध्यक्ष निर्वाचित किया गया।
सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने इसे लाखों भाजपा जमीनी कार्यकर्ताओं के लिए गर्व का क्षण बताया।
दास ने 2026 के असम विधानसभा चुनावों में सरभोग से भारी अंतर से जीत दर्ज की थी।
सरमा ने दास से सदन में निष्पक्षता बनाए रखने और विपक्ष को बोलने का अवसर देने की अपील की।
भाजपा के 'राष्ट्र प्रथम, पार्टी अंतिम' सिद्धांत के आधार पर सदन संचालन का आग्रह किया गया।

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 21 मई 2026 को असम विधानसभा में कहा कि वरिष्ठ भाजपा नेता रंजीत कुमार दास का विधानसभा अध्यक्ष पद पर निर्वाचन, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लाखों जमीनी कार्यकर्ताओं के लिए गर्व और उत्साह का अवसर है। दास के पदभार संभालने के तत्काल बाद सदन में दिए अपने संबोधन में सरमा ने उनकी दशकों लंबी राजनीतिक यात्रा और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

सरभोग से स्पीकर की कुर्सी तक का सफर

मुख्यमंत्री सरमा ने बताया कि जब रंजीत कुमार दास को सरभोग विधानसभा क्षेत्र से चुनावी मैदान में उतारने का निर्णय लिया गया, तो यह सीट आसान नहीं मानी जा रही थी। उन्होंने स्वीकार किया कि दास को एक अपेक्षाकृत सुरक्षित क्षेत्र से हटाकर अधिक चुनौतीपूर्ण सीट पर भेजा गया था, और हार की स्थिति में वे खुद नैतिक जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार थे।

सरमा ने कहा, 'हमारी अपनी पार्टी के नेताओं सहित कई लोग अक्सर पूछते थे कि क्या रंजीत कुमार दास चुनाव हार जाएंगे। हम दोनों को हमेशा पूरा यकीन था कि वे आसानी से जीत जाएंगे।' सोशल मीडिया पर चल रही अटकलों और राजनीतिक चर्चाओं के विपरीत, दास पूरे चुनाव प्रचार के दौरान आत्मविश्वास से भरे रहे।

2026 के असम विधानसभा चुनावों में दास ने सरभोग से भारी अंतर से जीत दर्ज की, जिसने उनके आत्मविश्वास को सही साबित किया।

साधारण परिवारों के कार्यकर्ताओं की जीत

मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि दास का स्पीकर बनना महज एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है। उन्होंने कहा कि यह उन लाखों भाजपा कार्यकर्ताओं की जीत है जो साधारण परिवारों से आते हैं और पार्टी के लिए जमीनी स्तर पर अथक परिश्रम करते हैं। यह संदेश भाजपा की उस आंतरिक संस्कृति को दर्शाता है जिसमें संगठनात्मक निष्ठा को राजनीतिक पुरस्कार से जोड़ा जाता है।

निष्पक्षता और 'राष्ट्र प्रथम' की अपील

सरमा ने नवनिर्वाचित स्पीकर से स्पष्ट आग्रह किया कि वे सदन की कार्यवाही में पूर्ण निष्पक्षता बनाए रखें। उन्होंने कहा, 'हम एक ऐसे स्पीकर चाहते हैं जो निष्पक्ष हों, जो विपक्ष को बोलने का मौका दें, और जो पार्टी के हितों से ऊपर देश और असम के हितों को प्राथमिकता दें।'

भाजपा के वैचारिक सिद्धांत का उल्लेख करते हुए सरमा ने कहा कि पार्टी 'राष्ट्र प्रथम, पार्टी अंतिम' के दर्शन में विश्वास रखती है और दास को इसी आधार पर सदन का संचालन करना चाहिए।

आरएसएस पृष्ठभूमि और संसदीय अनुभव की ताकत

सीएम सरमा ने विश्वास जताया कि रंजीत कुमार दास का लंबा राजनीतिक अनुभव, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) में उनकी संगठनात्मक पृष्ठभूमि और संसदीय परंपराओं की गहरी समझ उन्हें एक सफल और सम्मानित स्पीकर के रूप में स्थापित करेगी। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि सदन के भीतर राजनीतिक तटस्थता बरतते हुए भी दास लोगों के चुने हुए प्रतिनिधि के रूप में विधानसभा के बाहर एक सक्रिय राजनीतिक हस्ती बने रहेंगे।

आगे क्या

रंजीत कुमार दास के नेतृत्व में असम विधानसभा का नया सत्र शुरू होगा। सीएम सरमा की निष्पक्षता की अपील और विपक्ष को पर्याप्त अवसर देने की बात असम की विधायी राजनीति में एक सकारात्मक संकेत है। अब यह देखना होगा कि दास सत्तारूढ़ दल के वरिष्ठ नेता होते हुए भी स्पीकर की संवैधानिक भूमिका में कितनी स्वतंत्रता से कार्य कर पाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

या विपक्ष के संभावित आरोपों को पहले ही निष्प्रभावी करने की रणनीति। असम में भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत है, इसलिए स्पीकर पद पर नियंत्रण उनके लिए स्वाभाविक है — लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब विपक्ष किसी विवादास्पद विधेयक पर बहस की माँग करेगा। दास की आरएसएस पृष्ठभूमि और भाजपा निष्ठा के बावजूद, संसदीय परंपराओं की उनकी समझ पर सरमा का जोर एक सकारात्मक संकेत है — जिसे अमल में देखना बाकी है।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रंजीत कुमार दास कौन हैं और वे असम विधानसभा के स्पीकर कैसे बने?
रंजीत कुमार दास भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं, जो 2026 के असम विधानसभा चुनावों में सरभोग क्षेत्र से भारी अंतर से जीते। उनकी आरएसएस पृष्ठभूमि और लंबे राजनीतिक अनुभव को देखते हुए उन्हें विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए चुना गया।
सीएम हिमंता सरमा ने रंजीत कुमार दास के स्पीकर बनने पर क्या कहा?
सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि यह लाखों भाजपा जमीनी कार्यकर्ताओं के लिए गर्व का क्षण है जो साधारण परिवारों से आते हैं। उन्होंने दास से निष्पक्षता बनाए रखने, विपक्ष को बोलने का मौका देने और 'राष्ट्र प्रथम, पार्टी अंतिम' के सिद्धांत पर चलने की अपील की।
सरभोग सीट पर रंजीत कुमार दास की जीत इतनी अहम क्यों मानी जा रही है?
सरभोग को चुनावी दृष्टि से चुनौतीपूर्ण सीट माना जाता था और दास को एक आसान क्षेत्र से हटाकर वहाँ भेजा गया था। सरमा ने स्वीकार किया कि हार की स्थिति में वे नैतिक जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार थे, लेकिन दास ने भारी अंतर से जीत दर्ज कर सभी अटकलों को गलत साबित किया।
असम विधानसभा के स्पीकर के रूप में रंजीत कुमार दास की क्या भूमिका होगी?
स्पीकर के रूप में दास सदन की कार्यवाही का संचालन करेंगे। सीएम सरमा ने उनसे सदन के भीतर राजनीतिक तटस्थता बनाए रखने और सभी दलों को समान अवसर देने का आग्रह किया है, जबकि विधानसभा के बाहर वे लोगों के प्रतिनिधि के रूप में सक्रिय रहेंगे।
भाजपा का 'राष्ट्र प्रथम, पार्टी अंतिम' सिद्धांत क्या है?
यह भाजपा का वैचारिक सिद्धांत है जिसके तहत पार्टी के हितों से ऊपर देश के हितों को प्राथमिकता दी जाती है। सीएम सरमा ने दास से आग्रह किया कि वे इसी दर्शन के आधार पर असम विधानसभा का संचालन करें।
राष्ट्र प्रेस
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