भीषण गर्मी में बच्चों को हीट स्ट्रोक का सबसे अधिक खतरा: NHM की चेतावनी, जानें बचाव के ज़रूरी उपाय

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भीषण गर्मी में बच्चों को हीट स्ट्रोक का सबसे अधिक खतरा: NHM की चेतावनी, जानें बचाव के ज़रूरी उपाय

सारांश

देश में 45°C तापमान और आसन्न नौतपा के बीच NHM ने आगाह किया है कि नवजात शिशु और छोटे बच्चे हीट स्ट्रोक के प्रति सबसे कमज़ोर होते हैं। सही पहनावा, तरल पदार्थ और दोपहर की धूप से परहेज़ — ये तीन सावधानियाँ जानलेवा खतरे को टाल सकती हैं।

मुख्य बातें

कई राज्यों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुँचा; 25 मई से 2 जून तक नौतपा में और तपन की आशंका।
NHM के अनुसार नवजात शिशु और छोटे बच्चे हीट स्ट्रोक के प्रति सर्वाधिक संवेदनशील।
बच्चों को दोपहर 12 से शाम 4 बजे के बीच बाहर न ले जाएं; ठंडी और हवादार जगह पर रखें।
पर्याप्त पानी, तरल पदार्थ और माँ का दूध नियमित रूप से दें।
तेज़ बुखार, उल्टी, चिड़चिड़ापन या सांस की तकलीफ पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें ।

नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि देशभर में जारी भीषण गर्मी के बीच नवजात शिशु और छोटे बच्चे हीट स्ट्रोक के प्रति सर्वाधिक संवेदनशील हैं। कई राज्यों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच चुका है और 25 मई से 2 जून तक नौतपा की अवधि में गर्मी का प्रकोप और तीव्र होने की आशंका है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, सही देखभाल और सतर्कता से बच्चों को इस मौसम में सुरक्षित रखा जा सकता है।

क्यों होते हैं बच्चे सबसे ज़्यादा प्रभावित

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी के मौसम में छोटे बच्चों का शरीर वयस्कों की तुलना में कहीं तेज़ी से गर्म होता है। बच्चे पसीना भी कम निकाल पाते हैं, जिससे शरीर का तापमान तेज़ी से बढ़ सकता है और हीट स्ट्रोक का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। NHM के अनुसार, शिशुओं में हीट स्ट्रोक के लक्षण जल्दी पहचानना कठिन होता है, इसलिए माता-पिता को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए।

हीट स्ट्रोक के प्रमुख लक्षण

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि बच्चा अत्यधिक रोए, चिड़चिड़ा हो, असामान्य रूप से अधिक सोए, उल्टी करे, तेज़ बुखार हो या सांस लेने में कठिनाई हो, तो ये हीट स्ट्रोक के संकेत हो सकते हैं। ऐसी किसी भी स्थिति में तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेना आवश्यक है। लापरवाही बच्चे की सेहत को गंभीर खतरे में डाल सकती है।

बचाव के लिए NHM के सुझाव

नेशनल हेल्थ मिशन ने बच्चों को हीट स्ट्रोक से बचाने के लिए कई उपाय सुझाए हैं। बच्चों को ठंडी और हवादार जगह पर रखें और उन्हें सीधी धूप या बंद गर्म कमरे में कभी न छोड़ें। दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच बच्चों को बाहर ले जाने से परहेज़ करें।

बच्चों को पर्याप्त पानी और तरल पदार्थ नियमित रूप से पिलाएं। स्तनपान कराने वाली माताएँ समय-समय पर माँ का दूध देती रहें। बच्चे के शरीर का तापमान नियमित रूप से जाँचते रहें।

पहनावे और स्नान से राहत

बच्चों को हल्के, ढीले और सूती कपड़े पहनाएं — अधिक कपड़े लादने से बचें। बच्चे को ठंडे पानी से नहलाएं या गीले कपड़े से शरीर पोंछें, जिससे शरीर का तापमान नियंत्रित रहे।

सरकार की एडवाइज़री और आगे की स्थिति

भारत सरकार लगातार एडवाइज़री जारी कर नागरिकों से सतर्क रहने और किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतने की अपील कर रही है। यह ऐसे समय में आया है जब नौतपा — हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष की सर्वाधिक तपन वाली अवधि — 25 मई से 2 जून तक चलेगी और तापमान में और वृद्धि संभव है। विशेषज्ञों ने परिवारों से आग्रह किया है कि इस अवधि में बच्चों की देखभाल में कोई कोताही न बरती जाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

हर साल एडवाइज़री जारी होती है — फिर भी हीट स्ट्रोक से बच्चों की मौतें रुकती नहीं। असली सवाल यह है कि सरकारी चेतावनियाँ उन लाखों परिवारों तक कितनी पहुँचती हैं जो बिना पंखे और एसी के जीवन जी रहे हैं। NHM की सलाह सही है, लेकिन 'ठंडी और हवादार जगह' की उपलब्धता शहरी मध्यवर्ग की सुविधा है, गरीब परिवारों की नहीं। जब तक सार्वजनिक कूलिंग शेल्टर और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की पहुँच नहीं बढ़ती, ये एडवाइज़री कागज़ी राहत बनकर रह जाएंगी।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बच्चों में हीट स्ट्रोक के लक्षण क्या होते हैं?
NHM के अनुसार, यदि बच्चा अत्यधिक रोए, चिड़चिड़ा हो, असामान्य रूप से अधिक सोए, उल्टी करे, तेज़ बुखार हो या सांस लेने में कठिनाई हो तो ये हीट स्ट्रोक के संकेत हो सकते हैं। शिशुओं में ये लक्षण जल्दी पहचानना कठिन होता है, इसलिए किसी भी असामान्य बदलाव पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
गर्मी में बच्चों को हीट स्ट्रोक से कैसे बचाएं?
बच्चों को ठंडी और हवादार जगह पर रखें, सीधी धूप और बंद गर्म कमरे से दूर रखें। दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच बाहर न ले जाएं, हल्के सूती कपड़े पहनाएं और पर्याप्त पानी व तरल पदार्थ देते रहें।
नौतपा क्या है और यह बच्चों के लिए खतरनाक क्यों है?
नौतपा हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष की सर्वाधिक गर्म अवधि होती है, जो इस वर्ष 25 मई से 2 जून तक रहेगी। इस दौरान तापमान और अधिक बढ़ने की आशंका है, जिससे छोटे बच्चों में हीट स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
क्या स्तनपान गर्मी में बच्चे को सुरक्षित रखने में मदद करता है?
हाँ, स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार गर्मी में माँ का दूध समय-समय पर देते रहना बच्चे के शरीर में तरल पदार्थ की मात्रा बनाए रखने में सहायक है। यह शिशुओं को हाइड्रेटेड रखता है और हीट स्ट्रोक के जोखिम को कम करता है।
भारत सरकार ने भीषण गर्मी को लेकर क्या एडवाइज़री जारी की है?
भारत सरकार ने नागरिकों से सतर्क रहने और लापरवाही न बरतने की अपील करते हुए एडवाइज़री जारी की है। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और बाहर काम करने वाले लोगों को दोपहर की धूप से बचने और पर्याप्त पानी पीने की सलाह दी गई है।
राष्ट्र प्रेस
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