वडनगर ICSTI के 201 प्रशिक्षु बुलेट ट्रेन, धोलेरा सेमीकंडक्टर समेत बड़े इंफ्रा प्रोजेक्ट्स में तैनात
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के मेहसाणा जिले के वडनगर में स्थित इंडस्ट्रियल कंस्ट्रक्शन स्किल्स ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (ICSTI) ने अपने पायलट चरण के 201 प्रशिक्षुओं को देश की प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में तैनात कर दिया है या तैनाती की प्रक्रिया जारी है। 21 मई 2026 को उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह संस्थान अब पूर्ण क्षमता से संचालित हो रहा है और 20 से अधिक ट्रेड्स में व्यावसायिक प्रशिक्षण दे रहा है।
संस्थान की स्थापना और पृष्ठभूमि
ICSTI की स्थापना एक निजी इंजीनियरिंग एवं निर्माण कंपनी ने गुजरात सरकार की स्किल डेवलपमेंट एजेंसियों के सहयोग से की है। दोनों पक्षों के बीच पिछले वर्ष मार्च में एमओयू हस्ताक्षरित हुआ था, जिसके बाद सितंबर में पहला बैच शुरू हुआ। 9.3 एकड़ में फैले इस कैंपस में व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए बड़े प्रैक्टिकल मॉडल और सिमुलेशन आधारित सुविधाएँ विकसित की गई हैं।
संस्थान प्रमुख निरंजन मिश्रा के अनुसार, प्रशिक्षण ढाँचा ब्रिटेन के कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री ट्रेनिंग बोर्ड के मानकों पर आधारित है। उन्होंने कहा, 'स्किल ट्रेनिंग फ्रेमवर्क ब्रिटेन के कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री ट्रेनिंग बोर्ड के मानकों पर आधारित है। पाठ्यक्रम उसी के मार्गदर्शन में तैयार किया गया है, ताकि वैश्विक स्तर की ट्रेनिंग सुनिश्चित हो सके।'
प्रशिक्षुओं की तैनाती — कहाँ और किन परियोजनाओं में
अधिकारियों के अनुसार, 45, 60 और 90 दिन के कोर्स पूरे करने वाले प्रशिक्षु अभी निम्नलिखित परियोजनाओं में कार्यरत हैं: धोलेरा सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन परियोजना, अहमदाबाद-मुंबई हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर (बुलेट ट्रेन), अहमदाबाद मेट्रो, खंभालिया सोलर पावर प्रोजेक्ट और हरियाणा के पानीपत रिफाइनरी प्रोजेक्ट।
इन प्रशिक्षुओं को प्रतिमाह ₹18,000 से ₹20,000 तक का स्टाइपेंड दिया जा रहा है। प्रशिक्षुओं को उनकी दक्षता के आधार पर लेवल-2, लेवल-3 और लेवल-4 श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है।
प्रशिक्षु की आवाज़ — ज़मीनी अनुभव
वडनगर के कॉमर्स स्नातक रोनक कड़िया ने बताया कि उन्होंने दो महीने पहले फॉर्मवर्क कारपेंट्री ट्रेड में प्रवेश लिया था और अब वे अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन परियोजना की साइट पर कार्यरत हैं। उन्होंने कहा, 'ICSTI-वडनगर में ट्रेनिंग के दौरान मैंने बहुत कुछ सीखा। मेरी स्किल बेहतर हुई और अब मैं बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट साइट पर काम कर रहा हूँ। यहाँ की ट्रेनिंग व्यावहारिक है और रोज़गार के अच्छे अवसर मिलते हैं।'
रोज़गार मार्ग — 33 महीने तक स्टाइपेंड
प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उम्मीदवारों को नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रमोशन स्कीम (NAPS) के तहत 24 महीने और प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना के तहत 9 महीने तक काम का अवसर मिलता है — यानी कुल 33 महीने तक स्टाइपेंड आधारित रोज़गार।
अधिकारियों के मुताबिक, दो वर्ष का अप्रेंटिसशिप पूरा करने के बाद प्रशिक्षु फ्रंट लाइन सुपरवाइजर पद के लिए पात्र हो जाते हैं। इसके अतिरिक्त विदेशों में रोज़गार के अवसर भी उपलब्ध हो सकते हैं।
पात्रता, ट्रेड्स और सुविधाएँ
18 से 35 वर्ष आयु वर्ग के उम्मीदवार प्रवेश ले सकते हैं। ट्रेड के अनुसार शैक्षणिक योग्यता भिन्न है — कुछ कोर्स के लिए सामान्य स्कूली शिक्षा पर्याप्त है, जबकि कुछ में ITI प्रमाणपत्र आवश्यक है। संस्थान में फिलहाल 20 से अधिक ट्रेड्स में प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिनमें फॉर्मवर्क कारपेंट्री, स्कैफोल्डिंग, प्लंबिंग, इलेक्ट्रिकल सिस्टम, वेल्डिंग, पाइप फिटिंग, HVAC, फायर फाइटिंग सिस्टम, सर्वेइंग, सोलर इंस्टॉलेशन और हेल्थ एंड सेफ्टी शामिल हैं।
यह कार्यक्रम पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए खुला है। कैंपस में अलग-अलग हॉस्टल, भोजन व्यवस्था, खेल मैदान, जिम, स्वास्थ्य सेवाएँ, इंडोर गेम्स और योग-मेडिटेशन की सुविधाएँ उपलब्ध हैं। प्रशिक्षुओं से कोई शुल्क नहीं लिया जाता और रहने-खाने की सुविधा निःशुल्क है।
गौरतलब है कि यह पहल ऐसे समय में आई है जब देश में कुशल निर्माण श्रमिकों की माँग तेज़ी से बढ़ रही है और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए प्रशिक्षित जनशक्ति की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। आने वाले बैचों के साथ संस्थान की क्षमता और तैनाती का दायरा और विस्तृत होने की उम्मीद है।