असम चुनाव 2026: हिमंता बिस्वा सरमा जलुकबारी से लगातार छठी बार विधायक, 89,434 मतों से जीत

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असम चुनाव 2026: हिमंता बिस्वा सरमा जलुकबारी से लगातार छठी बार विधायक, 89,434 मतों से जीत

सारांश

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने जलुकबारी से छठी बार जीत दर्ज कर इतिहास रच दिया। 89,434 मतों की यह जीत सिर्फ एक चुनावी नतीजा नहीं — यह उस राजनीतिक यात्रा की परिणति है जो कभी एक गुरु की हार से शुरू हुई थी और आज असम की सत्ता के शीर्ष पर पहुँची है।

मुख्य बातें

हिमंता बिस्वा सरमा ने 4 मई 2026 को जलुकबारी से छठी बार विधायक बनने का रिकॉर्ड बनाया।
कांग्रेस उम्मीदवार बिदिशा नियोग को 89,434 मतों के बड़े अंतर से पराजित किया।
2001 से 2026 तक सरमा ने लगातार छह बार यह सीट जीती — पहले कांग्रेस, फिर BJP के टिकट पर।
जलुकबारी सीट पर 2,06,314 मतदाता पंजीकृत हैं; मतदान प्रतिशत आमतौर पर 75-85% रहता है।
सीट का इतिहास गुरु भृगु कुमार फुकन और शिष्य हिमंता बिस्वा सरमा की राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से जुड़ा है।

असम विधानसभा चुनाव 2026 के परिणामों में जलुकबारी विधानसभा सीट से मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 89,434 मतों के बड़े अंतर से जीत दर्ज करते हुए लगातार छठी बार विधायक बनने का इतिहास रच दिया। उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार बिदिशा नियोग को करारी शिकस्त दी। 4 मई 2026 को घोषित इस परिणाम ने एक बार फिर साबित किया कि जलुकबारी सीट पर सरमा की पकड़ अटूट बनी हुई है।

जलुकबारी सीट का राजनीतिक महत्व

कामरूप मेट्रोपॉलिटन जिले में स्थित जलुकबारी विधानसभा क्षेत्र गुवाहाटी लोकसभा क्षेत्र का अभिन्न हिस्सा है। 1967 से अस्तित्व में आई यह सामान्य (अनारक्षित) सीट गुवाहाटी शहर के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में फैली है। गुवाहाटी विश्वविद्यालय, असम इंजीनियरिंग कॉलेज और राष्ट्रीय राजमार्ग, रेलवे, एयरपोर्ट तथा सरायघाट पुल की बेहतर कनेक्टिविटी ने इस क्षेत्र को रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बना दिया है।

अब तक इस सीट पर 12 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, जिनमें कांग्रेस ने पाँच बार, भारतीय जनता पार्टी (BJP) और निर्दलीय उम्मीदवारों ने दो-दो बार, तथा जनता पार्टी, नतुन असम गण परिषद और असम गण परिषद ने एक-एक बार जीत हासिल की है।

गुरु-शिष्य की ऐतिहासिक राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता

जलुकबारी की चुनावी कहानी केवल आँकड़ों तक सीमित नहीं है — इसमें एक दिलचस्प गुरु-शिष्य प्रतिद्वंद्विता की कहानी भी छुपी है। भृगु कुमार फुकन, जिन्हें असम की राजनीति में हिमंता बिस्वा सरमा का राजनीतिक मार्गदर्शक माना जाता है, ने 1985 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में पहली बार यह सीट जीती थी। उस समय वे ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) के महासचिव थे और असम आंदोलन तथा ऐतिहासिक असम समझौते में उनकी अहम भूमिका रही।

फुकन इसके बाद पहली असम गण परिषद सरकार में गृह मंत्री बने। राजनीतिक मतभेदों के बाद उन्होंने अपनी पार्टी बनाई और 1991 में फिर जीत दर्ज की। 1996 में असम गण परिषद (AGP) के टिकट पर लगातार तीसरी जीत हासिल करते हुए उन्होंने तत्कालीन कांग्रेस उम्मीदवार और अपने पूर्व शिष्य हिमंता बिस्वा सरमा को पराजित किया था।

यह ऐसे समय में आया जब सरमा अभी राजनीति में अपनी जगह बना रहे थे। गौरतलब है कि इतिहास ने करवट ली और 2001 में हिमंता बिस्वा सरमा ने अपने राजनीतिक गुरु फुकन को ही मात देकर जलुकबारी सीट पर कब्ज़ा किया — और तब से यह सीट उनका गढ़ बन गई।

सरमा का अटूट वर्चस्व: 2001 से 2026 तक

हिमंता बिस्वा सरमा ने 2001, 2006 और 2011 में कांग्रेस के टिकट पर जलुकबारी से लगातार जीत दर्ज की। 2015 में कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने के बाद उन्होंने 2016 और 2021 में भाजपा के टिकट पर भी यह सीट जीती। 2021 में उन्होंने कांग्रेस के रोमेन चंद्र बोरठाकुर को एक लाख से अधिक मतों के अंतर से हराया था।

अब 2026 में भी उन्होंने अपनी जीत की लय बरकरार रखी है, हालाँकि इस बार जीत का अंतर 89,434 मत रहा — जो फिर भी एक बड़ी जीत मानी जाती है।

मतदाता और सामाजिक संरचना

2026 के चुनाव के लिए अंतिम मतदाता सूची में 2,06,314 मतदाता दर्ज किए गए, जो 2024 में 2,04,137 थे। तेज़ शहरीकरण के कारण नए मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस सीट का सामाजिक ढाँचा मिश्रित है — यहाँ हिंदू, मुस्लिम, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और मध्यम वर्गीय शहरी मतदाता बड़ी संख्या में हैं। पिछले कई चुनावों में मतदान प्रतिशत 75 से 85% के बीच रहा है, जो इस क्षेत्र की राजनीतिक जागरूकता का प्रमाण है।

जलुकबारी की यह जीत हिमंता बिस्वा सरमा के राजनीतिक करियर का एक और मील का पत्थर है — और असम की राजनीति में उनकी केंद्रीय भूमिका को और मज़बूत करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन एक सवाल यह भी उठता है कि क्या जलुकबारी की जीत का अंतर 2021 के एक लाख से घटकर 89,434 पर आना किसी बदलती हवा का संकेत है। यह ऐसे समय में आया है जब BJP को राज्य में कई सीटों पर कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूक जाती है, वह यह है कि जलुकबारी का सामाजिक ढाँचा — मुस्लिम, SC, ST और शहरी मध्यवर्गीय मतदाताओं का मिश्रण — इस सीट को भविष्य की असम राजनीति का एक बैरोमीटर बनाता है। सरमा की चुनौती अब जीतने से आगे बढ़कर इस विविध निर्वाचन क्षेत्र की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की है।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हिमंता बिस्वा सरमा ने 2026 में जलुकबारी से कितने मतों से जीत दर्ज की?
हिमंता बिस्वा सरमा ने 2026 के असम विधानसभा चुनाव में जलुकबारी सीट से कांग्रेस उम्मीदवार बिदिशा नियोग को 89,434 मतों के अंतर से हराया। यह उनकी इस सीट से लगातार छठी जीत है।
जलुकबारी सीट का राजनीतिक इतिहास क्या है?
जलुकबारी सीट 1967 से अस्तित्व में है और अब तक 12 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। कांग्रेस ने पाँच बार, BJP और निर्दलीय ने दो-दो बार, तथा जनता पार्टी, नतुन असम गण परिषद और AGP ने एक-एक बार यह सीट जीती है।
भृगु कुमार फुकन और हिमंता बिस्वा सरमा के बीच क्या संबंध था?
भृगु कुमार फुकन को असम की राजनीति में हिमंता बिस्वा सरमा का राजनीतिक मार्गदर्शक माना जाता है। 1996 में फुकन ने AGP के टिकट पर सरमा को हराया था, लेकिन 2001 में सरमा ने उन्हें पराजित कर जलुकबारी पर कब्ज़ा किया और तब से यह सीट उनका गढ़ बन गई।
हिमंता बिस्वा सरमा ने कांग्रेस से BJP में कब कदम रखा?
हिमंता बिस्वा सरमा ने 2015 में कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुए। इसके बाद उन्होंने 2016 और 2021 में BJP के टिकट पर जलुकबारी सीट जीती और 2026 में भी जीत बरकरार रखी।
जलुकबारी सीट पर कितने मतदाता हैं और मतदान प्रतिशत कैसा रहता है?
2026 के चुनाव के लिए जलुकबारी में 2,06,314 मतदाता पंजीकृत हैं, जो 2024 में 2,04,137 थे। इस सीट पर मतदान प्रतिशत आमतौर पर 75 से 85% के बीच रहता है, जो क्षेत्र की उच्च राजनीतिक जागरूकता को दर्शाता है।
राष्ट्र प्रेस
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