असम में भाजपा के नेतृत्व में सीएम हिमंत बिस्वा सरमा का उभरता प्रभाव
सारांश
Key Takeaways
- हिमंत बिस्वा सरमा भाजपा के प्रमुख चेहरे के रूप में उभरे हैं।
- सरमा की 'आशीर्वाद यात्रा' को व्यापक समर्थन मिला।
- परिसीमन ने कांग्रेस की ताकत को कम किया है।
- भाजपा के संगठनात्मक आधार में सुधार हुआ है।
- विपक्ष में संघर्ष जारी है।
नई दिल्ली, 21 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। आगामी चुनावों के लिए असम एक ऐसा राज्य बन चुका है, जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के बीच प्रतिस्पर्धा स्पष्ट रूप से देखी जा रही है। इन दोनों दलों के पास अपने-अपने गठबंधनों में महत्वपूर्ण स्थान है।
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा, जो नॉर्थ-ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस (नेडा) के संयोजक भी हैं, भाजपा के एक प्रमुख और लोकप्रिय चेहरे के रूप में उभरे हैं। कांग्रेस छोड़ने के बाद उनका राजनीतिक उत्थान तेज गति से हुआ है और पूर्वोत्तर की राजनीति में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
तीसरी बार सत्ता में आने की कोशिश करते हुए, सरमा एंटी-इनकंबेंसी के खतरों के बावजूद और भी मजबूत होकर उभरे हैं। उन्हें क्षेत्र का एक कुशल रणनीतिकार और चतुर नेता माना जा रहा है।
इस महीने के आरंभ में उनकी ‘आशीर्वाद यात्रा’ को जबरदस्त समर्थन मिला। उनकी सरकार द्वारा किए गए बुनियादी ढांचे और कल्याणकारी योजनाओं के कार्यों ने उनकी जनप्रियता को और बढ़ाया है।
बांग्लादेश से आए अवैध प्रवासियों और जमीन पर कब्जे के मुद्दे पर उनकी सख्त नीति ने स्थानीय लोगों के बीच विशेष प्रभाव डाला है।
इसी कारण भाजपा की जमीनी संगठनात्मक स्थिति और 2023 के परिसीमन के बाद उनकी स्थिति में सुधार हुआ है। परिसीमन के दौरान मुस्लिम बहुल सीटों की संख्या 35 से घटकर 24 हो गई है, जिससे कांग्रेस और ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) की पारंपरिक ताकत कमजोर होने की संभावना है।
वहीं, अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित सीटों की संख्या बढ़ने से भाजपा को अपने जनाधार को विस्तार करने में सहायता मिली है।
विपक्ष की स्थिति कमजोर दिख रही है। छह दलों के गठबंधन के बावजूद, कांग्रेस संगठनात्मक कमजोरियों और नेतृत्व संकट का सामना कर रही है, जिसके कारण पार्टी में टूट-फूट जारी है।
खासकर ऊपरी असम में भाजपा का दबदबा स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। डिब्रूगढ़ में 2014 से लगातार तीन बार लोकसभा सीट भाजपा के पास रही है, जबकि 2021 के विधानसभा चुनावों में भी यहां लगभग सभी सीटों पर जीत हासिल की गई।
हालांकि जोरहाट में 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने भाजपा उम्मीदवार को करीब 1.4 लाख वोटों से हराया था। इस बार भाजपा इन सीटों पर अपनी पूरी ताकत लगा रही है।
तिनसुकिया जिले में भी भाजपा गठबंधन ने पिछले चुनावों में अच्छा प्रदर्शन किया है, विशेषकर चाय बागान और असमिया बहुल क्षेत्रों में।
पहाड़ी जिलों और स्वायत्त परिषद क्षेत्रों में भी जनजातीय वोट सरमा के पक्ष में एकजुट नजर आते हैं, जिससे एनडीए की स्थिति मजबूत बनी हुई है।
मध्य असम और बराक वैली में मुकाबला कड़ा रहने की संभावना है। हालांकि, कांग्रेस और एआईयूडीएफ के बीच अल्पसंख्यक वोटों का बंटवारा विपक्ष के लिए नुकसानदायक हो सकता है।