क्या असम में एसटी दर्जे की लड़ाई फिर से गरमाई है? अखिल गोगोई का 10 साल पुराना वादा
सारांश
मुख्य बातें
गुवाहाटी, 29 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। असम विधानसभा के सत्र के पांचवें दिन का माहौल काफी गरम रहा। शिवसागर विधायक अखिल गोगोई ने असम के छह समुदायों को अब तक एसटी दर्जा न देने पर अपनी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने 2016 में वादा किया था कि असम के छह समुदाय (चुटिया, कोच-राजबोंगशी, मोरन, मटक, ताई-अहोम और चाय-जनगोष्ठी) को छह महीनों के भीतर अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिया जाएगा, लेकिन 10 साल गुजर चुके हैं और इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
उन्होंने जानकारी दी कि नागरिकता (संशोधन) अधिनियम 2019 के खिलाफ जब असम में बड़ा आंदोलन हुआ था, तब राज्यसभा में इन छह समुदायों को एसटी का दर्जा देने का बिल भी प्रस्तुत किया गया था। अखिल गोगोई का कहना है कि वे उस दिन खुद राज्यसभा की गैलरी में मौजूद थे, लेकिन आज तक उस बिल को पास नहीं किया गया है। इसी मुद्दे पर उन्होंने शनिवार को विधानसभा में जोरदार विरोध किया और कहा कि केंद्र सरकार को जल्द से जल्द इन समुदायों को जनजाति का दर्जा देना चाहिए।
अखिल गोगोई ने यह भी आरोप लगाया कि जनजाति से जुड़ी रिपोर्ट विधानसभा में समय पर प्रस्तुत नहीं की गई। 25 तारीख को रिपोर्ट आनी थी, लेकिन अब तक नहीं आई। फिर कहा गया कि 27 तारीख को आएगी, लेकिन उस दिन भी रिपोर्ट पेश नहीं हुई। उनका कहना है कि सरकार जानबूझकर इस मुद्दे को टालती रही है। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट में एसटी प्लेन्स और एसटी हिल्स के अलावा एक नई श्रेणी एसटी वैली बनाई गई है, जो भारतीय संविधान में मौजूद नहीं है। ऐसे में उस रिपोर्ट का कोई मतलब नहीं बनता। शायद यही वजह है कि सरकार इस रिपोर्ट को खुलकर चर्चा में लाना नहीं चाहती।
उन्होंने कहा कि एक प्रस्ताव शुक्रवार को सदन में रखा गया था, लेकिन उसे चर्चा के लिए लिस्ट में नहीं डाला गया। अंत में दिन के आखिरी कामकाज में उसे शामिल किया गया, ताकि इस पर कोई बहस न हो सके।
अखिल गोगोई ने स्पष्ट रूप से कहा कि सिर्फ छह समुदाय ही नहीं, बल्कि कॉलिता, नाग जोगी, बदाखिल, चाडांग समेत कई अन्य समूहों को भी एसटी का दर्जा मिलना चाहिए। उनका कहना है कि यदि असम के इन समुदायों को जनजाति की मान्यता मिल जाए तो राज्य को जनजाति राज्य घोषित किया जा सकता है। इसके बाद असम को संविधान के आर्टिकल 371(ए) या उससे मिलते-जुलते किसी प्रावधान के तहत स्पेशल कैटेगरी स्टेट का दर्जा भी मिल सकता है।