देश में एम्स की संख्या 23 हुई: जेपी नड्डा ने एम्स बीबीनगर की समीक्षा में गिनाई स्वास्थ्य क्षेत्र की उपलब्धियाँ
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने 9 जुलाई 2026 को हैदराबाद के बीबीनगर स्थित एम्स बीबीनगर का दौरा किया और इस राष्ट्रीय महत्व के संस्थान की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि 20वीं शताब्दी के अंत तक देश में केवल एक एम्स था, जबकि आज यह संख्या बढ़कर 23 हो चुकी है — जो भारत के स्वास्थ्य बुनियादी ढाँचे में एक ऐतिहासिक विस्तार को दर्शाता है।
एम्स बीबीनगर की स्थापना और वित्तीय ढाँचा
एम्स बीबीनगर की स्थापना प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (PMSSY) के सातवें चरण के तहत 2019 में की गई थी। इस परियोजना का निर्माण कार्य जून 2022 में ₹1,110.55 करोड़ की लागत से आरंभ हुआ। समीक्षा के दौरान बताया गया कि अब तक लगभग ₹902 करोड़ की लागत से चल रहे निर्माण कार्य का 87.4 प्रतिशत पूरा हो चुका है। अस्पताल के सी और एफ ब्लॉक, आयुष भवन, अमृत निवास, शैक्षणिक ब्लॉक तथा छात्रावास भवनों का निर्माण संपन्न हो चुका है। रेडियोथेरेपी और ऑपरेशन थिएटर परिसर के शीघ्र पूरा होने की उम्मीद जताई गई है।
देशभर में एम्स विस्तार का ऐतिहासिक संदर्भ
नड्डा ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में 6 अतिरिक्त एम्स स्थापित किए गए थे। उसके बाद से अब तक 16 नए एम्स और जुड़ चुके हैं, जिससे देश में कुल 23 एम्स हो गए हैं। इनमें से 18 एम्स पहले से कार्यरत हैं, जबकि शेष विभिन्न निर्माण चरणों में हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देश में चिकित्सा शिक्षा और तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं की माँग तेज़ी से बढ़ रही है। गौरतलब है कि मेडिकल कॉलेजों की संख्या भी 2014 में 387 से बढ़कर वर्तमान में 820 हो चुकी है।
एम्स बीबीनगर की शैक्षणिक और चिकित्सा क्षमता
संस्थान में वर्तमान में 132 संकाय सदस्य और 133 वरिष्ठ रेजिडेंट डॉक्टर कार्यरत हैं। एमबीबीएस कार्यक्रम के दो बैच पाठ्यक्रम पूरा कर चुके हैं और एक नया बैच शीघ्र प्रवेश लेने वाला है। स्नातकोत्तर कार्यक्रम 24 एमडी विषयों और 5 डीएम/एमसीएच विशिष्टताओं में संचालित हो रहे हैं। 60 सीटों वाला बीएससी नर्सिंग कार्यक्रम 2024 में शुरू हुआ और एमएससी नर्सिंग पाँच विशिष्टताओं में उपलब्ध है। संस्थान में अभी 902 छात्र अध्ययनरत हैं।
रोगी सेवाओं के मोर्चे पर, संस्थान प्रतिदिन लगभग 1,800 मरीजों का उपचार कर रहा है और 250 बेड भर्ती रोगियों के लिए उपलब्ध हैं। आपातकालीन सेवाएँ हाल ही में शुरू की गई हैं। सीटी, एमआरआई और डेक्सा सहित अधिकांश प्रयोगशाला और रेडियोलॉजिकल सुविधाएँ उपलब्ध हैं। संस्थान तेलंगाना के सभी 33 जिलों में ई-संजीवनी के ज़रिये टेलीकंसल्टेशन सेवाएँ प्रदान करता है। लगभग 90 प्रतिशत मरीज़ आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के तहत पंजीकृत हैं।
अनुसंधान और सामुदायिक सेवा में योगदान
अनुसंधान के क्षेत्र में एम्स बीबीनगर ने 129 परियोजनाओं के माध्यम से ₹64 करोड़ के अनुसंधान अनुदान प्राप्त किए हैं और 1,156 शोध प्रकाशन प्रकाशित किए हैं। संस्थान कार्बन-युक्त कृत्रिम पैर के अंग 'एडीडीओसी' के निर्माण में DRDO के साथ सहयोग कर रहा है।
सामुदायिक सेवा के अंतर्गत संस्थान ने 6 गाँवों को गोद लिया है और 547 मोबाइल मेडिकल कैंप आयोजित किए हैं। ग्रामीण स्वास्थ्य प्रशिक्षण केंद्र (RHTC) और शहरी स्वास्थ्य प्रशिक्षण केंद्र (UHTC) के माध्यम से अब तक 66,148 मरीजों को लाभ मिला है। लगभग 10 किलोमीटर की पहुँच वाला एक सामुदायिक रेडियो स्टेशन भी संचालित है, जिससे 43 शैक्षिक कार्यक्रम प्रसारित किए जा चुके हैं।
मंत्री के निर्देश और आगे की राह
नड्डा ने समीक्षा के दौरान परिसर में नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया। मानव संसाधन की कमी को दूर करने के लिए उन्होंने सुझाव दिया कि स्थायी चयन समिति की बैठकें वर्ष में कम से कम चार बार आयोजित की जाएँ। उन्होंने अन्य एम्स संस्थानों के साथ आदान-प्रदान कार्यक्रमों और अतिथि संकाय की नियुक्ति का भी सुझाव दिया। समीक्षा के बाद नड्डा ने कार्डियोलॉजी विभाग में निर्माणाधीन कैथ लैब, रोबोटिक नेविगेशन सिस्टम और आयुष ब्लॉक का दौरा किया। देश में 1.85 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिर और 820 मेडिकल कॉलेजों के साथ, स्वास्थ्य क्षेत्र का यह विस्तार आने वाले वर्षों में भारत की स्वास्थ्य सेवा की नींव को और मज़बूत करेगा।