महाराष्ट्र: 2011 से पहले की झुग्गियों को कानूनी संरक्षण, 3 महीने में सर्वेक्षण पूरा करने का वादा
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने गुरुवार, 9 जुलाई 2026 को विधानसभा में एक अहम घोषणा करते हुए स्पष्ट किया कि राज्य सरकार, वन विभाग और विभिन्न केंद्रीय एवं राज्य सरकारी प्राधिकरणों की भूमि पर 1 जनवरी 2011 से पहले निर्मित सभी झुग्गी-झोपड़ियों को पूर्ण कानूनी संरक्षण प्रदान किया जाएगा। इन बस्तियों के निवासियों का पुनर्वास झुग्गी पुनर्वास प्राधिकरण (SRA), महाराष्ट्र आवास और क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MHADA) या अन्य सरकारी आवास योजनाओं के ज़रिए किया जाएगा।
नीति का दायरा और पृष्ठभूमि
बावनकुले ने सदन को बताया कि मुंबई शहर, मुंबई उपनगर और कोंकण क्षेत्र में मैंग्रोव क्षेत्रों, वन भूमि, राजस्व भूखंडों, नजूल भूमि और नगर एवं औद्योगिक विकास निगम (CIDCO) की संपत्तियों पर बड़े पैमाने पर आवासीय बस्तियाँ अस्तित्व में आ चुकी हैं। विकास योजना आरक्षण, पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्रों और वन विभाग के कड़े नियमों के चलते इन घरों को उनके वर्तमान स्थानों पर नियमित करना संभव नहीं है।
गौरतलब है कि यह नीति उन लाखों परिवारों के लिए राहत लेकर आई है जो दशकों से अनिश्चित कानूनी स्थिति में जीवन बिता रहे थे और किसी भी समय बेदखली की आशंका में रहते थे।
मुख्यमंत्री की कैबिनेट मंजूरी
मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कैबिनेट बैठक में इस नीति को औपचारिक मंजूरी दे दी है और राज्य भर में इसका कार्यान्वयन युद्धस्तर पर शुरू हो चुका है। यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में शहरी भूमि विवाद और बेदखली के मामले लंबे समय से राजनीतिक और न्यायिक बहस का केंद्र रहे हैं।
सर्वेक्षण और विशेष समिति
बावनकुले ने सदन को आश्वस्त किया कि मुंबई उपनगरीय जिले सहित पूरे राज्य में संबंधित भूमि पर रहने वाले निवासियों का बायोमेट्रिक और भौतिक सर्वेक्षण अगले तीन महीनों के भीतर पूरा कर लिया जाएगा। इस कार्य के लिए कोंकण संभागीय आयुक्त के नेतृत्व में एक विशेष समिति गठित की गई है, जिसमें मुंबई और मुंबई उपनगरीय जिलों के जिला कलेक्टर भी शामिल हैं। समिति ने सर्वेक्षण प्रक्रिया शुरू कर दी है।
पुनर्वास की रूपरेखा
जहाँ पर्यावरणीय या तकनीकी बाधाओं के कारण आवासों को नियमित करना संभव नहीं होगा, वहाँ एक व्यापक मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा। इसके अंतर्गत यह तय किया जाएगा कि निवासियों को MHADA, CIDCO या SRA की परियोजनाओं में कहाँ और किस प्रकार समायोजित किया जाए।
मंत्री ने दृढ़ता से कहा कि 1 जनवरी 2011 से पहले इन क्षेत्रों में निवास कर रहा एक भी पात्र व्यक्ति बेघर नहीं होगा और राज्य सरकार उन्हें उचित आवास दिलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
आम जनता पर असर
यह नीति मुंबई और कोंकण के उन लाखों परिवारों को सीधे प्रभावित करेगी जो वर्षों से वन भूमि, मैंग्रोव क्षेत्र और सरकारी जमीन पर बसे हैं। कानूनी संरक्षण मिलने से इन निवासियों को न केवल बेदखली का भय खत्म होगा, बल्कि वे सरकारी आवास योजनाओं के तहत पक्के मकान के भी हकदार बन सकेंगे। आने वाले महीनों में सर्वेक्षण के नतीजे इस नीति की व्यापकता और पहुँच को और स्पष्ट करेंगे।