9 जुलाई 2026
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सूरत बाढ़ में ₹500 करोड़ खारी प्रोजेक्ट का ऐलान, डिप्टी सीएम हर्ष संघवी ने नागरिकों की एकजुटता को सराहा

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सूरत बाढ़ में ₹500 करोड़ खारी प्रोजेक्ट का ऐलान, डिप्टी सीएम हर्ष संघवी ने नागरिकों की एकजुटता को सराहा

सारांश

सूरत में रिकॉर्ड बारिश के बाद डिप्टी सीएम हर्ष संघवी ने नागरिकों की आपसी मदद को सराहा और खारी प्रोजेक्ट के तहत ₹500 करोड़ के जल-निकासी कार्य का ऐलान किया। जाँच के आदेश और बुनियादी ढाँचे की मरम्मत भी प्राथमिकता में है।

मुख्य बातें

डिप्टी सीएम हर्ष संघवी ने 9 जुलाई 2026 को सूरत में पत्रकारों को बाढ़ राहत कार्यों की जानकारी दी।
खारी प्रोजेक्ट के तहत सूरत में जलभराव रोकने के लिए ₹500 करोड़ के व्यय का ऐलान किया गया।
दक्षिण गुजरात और सूरत में देश के अन्य हिस्सों की तुलना में सर्वाधिक वर्षा दर्ज हुई।
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक हुई; भविष्य में ऐसी स्थिति न हो, इसके लिए जाँच के आदेश दिए गए।
क्षतिग्रस्त स्ट्रीट लाइट और बुनियादी ढाँचे की मरम्मत के आदेश जारी; पूरी रूपरेखा शीघ्र लागू होगी।

गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने 9 जुलाई 2026 को सूरत में पत्रकारों से बातचीत करते हुए बताया कि भारी बारिश और बाढ़ के दौरान शहर के नागरिकों ने जिस तरह एक-दूसरे की मदद की, वह अनुकरणीय है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि खारी प्रोजेक्ट के तहत शहर में जलभराव रोकने के लिए ₹500 करोड़ के व्यय का ऐलान किया गया है।

बाढ़ की स्थिति और नागरिकों की भूमिका

संघवी ने बताया कि बीते कुछ दिनों में दक्षिण गुजरात और विशेष रूप से सूरत में असाधारण रूप से भारी वर्षा दर्ज की गई। उनके अनुसार, देश के अन्य हिस्सों की तुलना में सूरत में सर्वाधिक बारिश हुई, जिससे शहर के कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन ने हरसंभव मदद पहुँचाने का प्रयास किया, लेकिन जहाँ सरकारी सहायता किसी कारण से नहीं पहुँच सकी, वहाँ स्थानीय नागरिकों ने स्वयं आगे आकर स्थिति को संभाला।

सरकार की प्रतिक्रिया और समीक्षा बैठक

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में सूरत में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें राहत एवं पुनर्वास के साथ-साथ भविष्य में ऐसी स्थितियों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए विस्तृत निर्देश दिए गए। संघवी ने बताया कि बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने में प्रशासन को सफलता मिली।

जाँच के आदेश और बुनियादी ढाँचे की मरम्मत

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि यह जाँच की जाएगी कि पूर्व में भी इस प्रकार की स्थिति उत्पन्न होने के बावजूद इस बार जलभराव क्यों हुआ और कहाँ चूक रही। साथ ही, बाढ़ के दौरान क्षतिग्रस्त हुई स्ट्रीट लाइट और अन्य बुनियादी ढाँचे की मरम्मत के आदेश जारी किए गए हैं। आवश्यकता पड़ने पर इनकी अलग से जाँच भी कराई जाएगी।

खारी प्रोजेक्ट: जलभराव से स्थायी राहत की योजना

खारी प्रोजेक्ट के अंतर्गत ₹500 करोड़ की लागत से सूरत में जल-निकासी व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा, ताकि भविष्य में भारी वर्षा के दौरान शहर में पानी न भरे। संघवी के अनुसार, इस संबंध में पूरी रूपरेखा तैयार कर ली गई है और इसे शीघ्र ही ज़मीन पर उतारा जाएगा।

आगे की राह

प्रशासनिक जाँच और खारी प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन की समयसीमा अभी घोषित नहीं की गई है, लेकिन सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि इस बार के अनुभव से सीख लेते हुए सूरत की आपदा-तैयारी को एक नए स्तर पर ले जाया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सूरत में जलभराव की समस्या नई नहीं है — हर मानसून में यही दृश्य दोहराया जाता है। असली सवाल यह है कि पिछली बार भी ऐसी घोषणाएँ हुई थीं, तो इस बार की चूक कहाँ रही। जाँच के आदेश तो दिए गए हैं, पर जवाबदेही तय करने और परिणाम सार्वजनिक करने की कोई समयसीमा नहीं बताई गई। नागरिकों की एकजुटता की तारीफ करना ज़रूरी है, लेकिन यह प्रशासनिक तैयारी की कमी को ढकने का विकल्प नहीं बन सकती।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खारी प्रोजेक्ट क्या है और इससे सूरत को क्या फायदा होगा?
खारी प्रोजेक्ट सूरत में जल-निकासी व्यवस्था को मजबूत करने की योजना है, जिसके लिए ₹500 करोड़ के व्यय का ऐलान किया गया है। इसका उद्देश्य भारी बारिश के दौरान शहर में पानी भरने की समस्या को स्थायी रूप से हल करना है।
सूरत में इस बार बाढ़ की स्थिति कितनी गंभीर थी?
डिप्टी सीएम हर्ष संघवी के अनुसार, सूरत में देश के अन्य हिस्सों की तुलना में सर्वाधिक वर्षा दर्ज की गई और शहर के कई क्षेत्रों में बाढ़ जैसे हालात बन गए। बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करना पड़ा।
सरकार ने बाढ़ के बाद क्या कदम उठाए हैं?
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक हुई, जिसमें राहत कार्यों और भविष्य की तैयारी पर निर्देश दिए गए। क्षतिग्रस्त बुनियादी ढाँचे की मरम्मत के आदेश जारी किए गए हैं और जलभराव के कारणों की जाँच भी कराई जाएगी।
सूरत के नागरिकों ने बाढ़ के दौरान किस तरह मदद की?
डिप्टी सीएम संघवी ने बताया कि जहाँ सरकारी सहायता नहीं पहुँच सकी, वहाँ स्थानीय नागरिकों ने स्वयं एक-दूसरे की मदद करके स्थिति को सामान्य बनाने का प्रयास किया। उन्होंने इस सामुदायिक एकजुटता को अनुकरणीय बताया।
क्या सूरत में भविष्य में ऐसी बाढ़ की स्थिति दोबारा हो सकती है?
सरकार ने खारी प्रोजेक्ट के तहत ₹500 करोड़ की जल-निकासी योजना और जाँच के आदेश देकर इसे रोकने की कोशिश की है। हालाँकि, क्रियान्वयन की समयसीमा अभी घोषित नहीं की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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