9 जुलाई 2026
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एनसीडब्ल्यू ने आईवीएफ और एआरटी क्लीनिकों की समीक्षा के लिए न्यायमूर्ति आशा मेनन की अध्यक्षता में पैनल बनाया

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एनसीडब्ल्यू ने आईवीएफ और एआरटी क्लीनिकों की समीक्षा के लिए न्यायमूर्ति आशा मेनन की अध्यक्षता में पैनल बनाया

सारांश

राष्ट्रीय महिला आयोग ने आईवीएफ और एआरटी क्लीनिकों में बढ़ती अनियमितताओं के बीच दिल्ली उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश आशा मेनन की अगुवाई में एक बहु-विषयक समिति बनाई है। यह पैनल एआरटी एक्ट 2021 और सरोगेसी एक्ट 2021 के क्रियान्वयन की समीक्षा कर नियामक खामियाँ दूर करने की सिफारिशें देगा।

मुख्य बातें

राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने 9 जुलाई 2026 को आईवीएफ और एआरटी क्लीनिकों की समीक्षा के लिए बहु-विषयक पैनल गठित किया।
समिति की अध्यक्षता दिल्ली उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश आशा मेनन करेंगी।
पैनल असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (रेगुलेशन) एक्ट, 2021 और सरोगेसी (रेगुलेशन) एक्ट, 2021 के क्रियान्वयन की समीक्षा करेगा।
समिति सहमति, गोपनीयता और जैविक ट्रेसबिलिटी से जुड़ी नियामक खामियाँ चिह्नित कर सुधारों की सिफारिश करेगी।
एनसीडब्ल्यू ने स्पष्ट किया कि प्रजनन सेवाएँ गरिमा, पारदर्शिता और जवाबदेही के सिद्धांतों पर आधारित होनी चाहिए।

राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने 9 जुलाई 2026 को आईवीएफ क्लीनिकों और सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (एआरटी) केंद्रों से जुड़े नियामक ढाँचे और कानूनों की व्यापक समीक्षा के लिए एक बहु-विषयक समिति का गठन किया है। इस समिति की अध्यक्षता दिल्ली उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश आशा मेनन करेंगी। एआरटी क्षेत्र में बढ़ती अनियमितताओं की चिंताओं के बीच यह कदम उठाया गया है।

समिति का उद्देश्य और संरचना

एनसीडब्ल्यू के अनुसार, इस पैनल में न्यायपालिका, चिकित्सा, फोरेंसिक विज्ञान, कानून प्रवर्तन, स्त्री रोग, सार्वजनिक नीति और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के विशेषज्ञ शामिल हैं। समिति की बहु-विषयक संरचना इसलिए बनाई गई है ताकि सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकियों से जुड़े कानूनी, नैतिक, चिकित्सा और प्रशासनिक मुद्दों की व्यापक जाँच सुनिश्चित की जा सके।

समिति एआरटी क्लीनिकों और आईवीएफ केंद्रों के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएँ (एसओपी) और सर्वोत्तम प्रथाओं का प्रस्ताव भी देगी, जिससे नैतिक उपचार पद्धतियों, मानकीकृत नैदानिक प्रोटोकॉल और पारदर्शिता को बढ़ावा मिल सके।

किन कानूनों की होगी समीक्षा

एनसीडब्ल्यू के बयान के अनुसार, समिति तीन प्रमुख कानूनों के क्रियान्वयन की समीक्षा करेगी — असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (रेगुलेशन) एक्ट, 2021; सरोगेसी (रेगुलेशन) एक्ट, 2021; और 2026 में अधिसूचित संबंधित संशोधन नियम। गौरतलब है कि ये कानून वर्षों की बहस के बाद अस्तित्व में आए थे, लेकिन ज़मीनी स्तर पर इनके अनुपालन को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

नियामक खामियों की होगी पहचान

समिति विशेष रूप से सहमति, गोपनीयता और जैविक ट्रेसबिलिटी से संबंधित मौजूदा सुरक्षा उपायों की जाँच करेगी। इसके अलावा, वे नियामक और प्रक्रियात्मक कमियाँ भी चिह्नित की जाएँगी जो शोषण या धोखाधड़ी को बढ़ावा दे सकती हैं। संस्थागत जवाबदेही को मज़बूत करने के लिए सुधारों की सिफारिश भी समिति के दायरे में है।

महिलाओं के अधिकारों पर ज़ोर

एनसीडब्ल्यू ने अपने बयान में दोहराया कि प्रजनन स्वास्थ्य सेवाएँ गरिमा, सूचित विकल्प, पारदर्शिता और जवाबदेही के सिद्धांतों पर आधारित होनी चाहिए। आयोग ने स्पष्ट किया कि सहायक प्रजनन सेवाओं का लाभ उठाने वाली प्रत्येक महिला को प्रक्रिया के हर चरण में नैतिक व्यवहार और उसके अधिकारों की रक्षा का आश्वासन मिलना चाहिए।

आगे क्या होगा

समिति की सिफारिशों से भविष्य के कानूनी, नीतिगत और प्रशासनिक सुधारों को दिशा मिलने की उम्मीद है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में आईवीएफ उद्योग तेज़ी से विस्तार कर रहा है और नियामक निगरानी की माँग बढ़ रही है। समिति की रिपोर्ट एआरटी प्रणाली के संचालन को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक अहम आधार बन सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि समिति की सिफारिशें कितनी जल्दी और कितनी ईमानदारी से लागू होंगी। एआरटी एक्ट 2021 को लागू हुए पाँच साल हो चुके हैं, फिर भी ज़मीनी स्तर पर अनियमितताओं की शिकायतें थमी नहीं हैं — जो खुद इस बात का प्रमाण है कि कानून बनाना और उसे लागू करना दो अलग चुनौतियाँ हैं। बहु-विषयक संरचना आशाजनक है, पर बिना समयबद्ध जवाबदेही तंत्र के, यह समिति भी पिछली समीक्षाओं की तरह फाइलों में दब सकती है। प्रजनन उपचार चाहने वाली महिलाएँ कागज़ी सुधारों की नहीं, व्यावहारिक सुरक्षा की हकदार हैं।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनसीडब्ल्यू ने आईवीएफ क्लीनिकों के लिए कौन-सा पैनल गठित किया है?
राष्ट्रीय महिला आयोग ने आईवीएफ और एआरटी क्लीनिकों के नियामक ढाँचे की समीक्षा के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश आशा मेनन की अध्यक्षता में एक बहु-विषयक समिति बनाई है। इस पैनल में न्यायपालिका, चिकित्सा, फोरेंसिक विज्ञान और सार्वजनिक नीति के विशेषज्ञ शामिल हैं।
यह समिति कौन-से कानूनों की समीक्षा करेगी?
समिति असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (रेगुलेशन) एक्ट, 2021; सरोगेसी (रेगुलेशन) एक्ट, 2021; और 2026 में अधिसूचित संबंधित संशोधन नियमों के क्रियान्वयन की समीक्षा करेगी। साथ ही यह नियामक खामियाँ चिह्नित कर सुधारों की सिफारिश भी करेगी।
इस पैनल के गठन की ज़रूरत क्यों पड़ी?
एआरटी क्लीनिकों और आईवीएफ केंद्रों में अनियमितताओं को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच यह पैनल बनाया गया है। एनसीडब्ल्यू का मानना है कि सहमति, गोपनीयता और जैविक ट्रेसबिलिटी जैसे मुद्दों पर मौजूदा सुरक्षा उपाय पर्याप्त नहीं हैं।
इस समिति की सिफारिशों का क्या असर होगा?
समिति की सिफारिशों से भविष्य के कानूनी, नीतिगत और प्रशासनिक सुधारों को दिशा मिलने की उम्मीद है। इसका मुख्य उद्देश्य एआरटी प्रणाली को मज़बूत करना और प्रजनन उपचार चाहने वाली महिलाओं को हर चरण में ठोस सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
एनसीडब्ल्यू आईवीएफ क्लीनिकों में महिलाओं के अधिकारों पर क्या रुख रखता है?
एनसीडब्ल्यू का स्पष्ट रुख है कि प्रजनन स्वास्थ्य सेवाएँ गरिमा, सूचित विकल्प, पारदर्शिता और जवाबदेही के सिद्धांतों पर आधारित होनी चाहिए। आयोग ने कहा है कि सहायक प्रजनन सेवाएँ लेने वाली हर महिला को नैतिक व्यवहार और अधिकारों की रक्षा का आश्वासन मिलना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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