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एनसीडब्ल्यू ने मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों पर केंद्र को सौंपी सिफारिशी रिपोर्ट, पर्सनल लॉ सुधार की माँग

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एनसीडब्ल्यू ने मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों पर केंद्र को सौंपी सिफारिशी रिपोर्ट, पर्सनल लॉ सुधार की माँग

सारांश

राष्ट्रीय महिला आयोग ने मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों पर केंद्र को विस्तृत रिपोर्ट सौंपी है — जिसमें पर्सनल लॉ सुधार, अनिवार्य विवाह पंजीकरण और 'पारो सिस्टम' जैसी शोषणकारी प्रथाओं पर तत्काल कार्रवाई की माँग है। यह पहल वक्फ और समान नागरिक संहिता बहस के बीच नई नीतिगत दिशा का संकेत देती है।

मुख्य बातें

राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने 'भारत में मुस्लिम महिलाओं के अधिकार' विषय पर विस्तृत सिफारिशी रिपोर्ट गृह मंत्रालय , महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय को सौंपी।
रिपोर्ट की तैयारी के लिए 1 अगस्त 2025 को नई दिल्ली में राष्ट्रीय राउंड टेबल चर्चा आयोजित की गई थी, जिसमें कानूनी विशेषज्ञ, धार्मिक विद्वान और नागरिक समाज के प्रतिनिधि शामिल हुए।
प्रमुख सिफारिशों में मुस्लिम पर्सनल लॉ पर व्यापक कानून, शादी का अनिवार्य पंजीकरण और बाल विवाह पर रोक शामिल है।
आयोग ने मेहर , वैवाहिक संपत्ति अधिकार, बच्चों की कस्टडी और 'पारो सिस्टम' जैसी शोषणकारी प्रथाओं पर तत्काल कार्रवाई की माँग की।
रिपोर्ट में मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एप्लीकेशन एक्ट 1937 से लेकर मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकार संरक्षण) अधिनियम 2019 तक के प्रमुख कानूनों का अध्ययन किया गया।

राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों पर एक विस्तृत सिफारिशी रिपोर्ट तैयार कर केंद्र सरकार को सौंपी है। 'भारत में मुस्लिम महिलाओं के अधिकार' शीर्षक वाली यह रिपोर्ट गृह मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय को भेजी गई है। यह पहल ऐसे समय में आई है जब मुस्लिम पर्सनल लॉ में सुधार को लेकर राष्ट्रीय बहस तेज़ हो रही है।

रिपोर्ट की पृष्ठभूमि

1 अगस्त 2025 को नई दिल्ली में एनसीडब्ल्यू ने एक राष्ट्रीय स्तर की राउंड टेबल चर्चा आयोजित की थी, जो इस रिपोर्ट की नींव बनी। इस बैठक में केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, कानूनी विशेषज्ञ, शिक्षाविद, महिला अधिकार संगठनों के प्रतिनिधि, धार्मिक विद्वान, सामाजिक कार्यकर्ता और देशभर के नागरिक समाज के सदस्य शामिल हुए। बैठक में मौजूदा कानूनों की समीक्षा, उनके क्रियान्वयन में कमियों की पहचान और सुधारों के सुझाव पर विचार-विमर्श हुआ।

मुख्य मुद्दे और चर्चा के बिंदु

चर्चा में शादी, तलाक, गुजारा भत्ता, बच्चों की कस्टडी और संपत्ति में हिस्सेदारी जैसे संवेदनशील विषयों पर विशेष ध्यान दिया गया। अलग-अलग तकनीकी सत्रों में वक्फ सुधार, महिलाओं के भरण-पोषण के अधिकार, विरासत और विवाह-तलाक से जुड़ी चुनौतियों पर भी विचार किया गया।

आयोग ने मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एप्लीकेशन एक्ट 1937, डिसोल्यूशन ऑफ मुस्लिम मैरिज एक्ट 1939, मुस्लिम महिला (तलाक पर अधिकार संरक्षण) अधिनियम 1986 और मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकार संरक्षण) अधिनियम 2019 सहित कई न्यायिक फैसलों का गहन अध्ययन किया। आयोग ने माना कि संविधान और हाल के कानूनी सुधारों ने महिलाओं के अधिकारों को मज़बूत किया है, परंतु जागरूकता, न्याय तक पहुँच और पर्सनल लॉ को सुव्यवस्थित करने की दिशा में अभी और काम बाकी है।

एनसीडब्ल्यू की प्रमुख सिफारिशें

रिपोर्ट में आयोग ने कई अहम सुझाव दिए हैं। इनमें मुस्लिम पर्सनल लॉ पर व्यापक कानून बनाने, शादी का अनिवार्य पंजीकरण, बाल विवाह पर रोक और तलाक की प्रक्रिया को अधिक निष्पक्ष बनाने की बात शामिल है। महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मेहर और वैवाहिक संपत्ति पर अधिकार मज़बूत करने तथा बच्चों की कस्टडी को 'बच्चों के सर्वोत्तम हित' के आधार पर तय करने की सिफारिश भी की गई है।

इसके साथ ही आयोग ने महिलाओं की पर्याप्त भागीदारी वाले संवेदनशील विवाद निपटान तंत्र, बेहतर कानूनी सहायता, हेल्पलाइन और जागरूकता अभियानों की आवश्यकता रेखांकित की। रिपोर्ट में 'पारो सिस्टम' जैसी शोषणकारी प्रथाओं पर तत्काल कार्रवाई, पीड़ित महिलाओं के पुनर्वास, पहचान और रोज़गार सहायता की भी माँग की गई है।

आगे की राह

एनसीडब्ल्यू ने संबंधित मंत्रालयों और सभी हितधारकों से इन सिफारिशों को प्राथमिकता के आधार पर लागू करने की अपील की है। गौरतलब है कि यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब वक्फ संशोधन कानून और समान नागरिक संहिता जैसे मुद्दे राष्ट्रीय विमर्श में केंद्रीय स्थान रखते हैं। अब देखना यह होगा कि सरकार इन सिफारिशों पर किस गति से कदम उठाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या सरकार इसे नीतिगत कार्रवाई में बदलेगी या यह फ़ाइलों में दब जाएगी — जैसा अतीत में कई आयोगों की सिफारिशों के साथ हुआ है। वक्फ संशोधन और समान नागरिक संहिता की बहस के बीच यह रिपोर्ट आई है, जो इसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील बनाती है। रिपोर्ट में 'पारो सिस्टम' जैसी प्रथाओं का उल्लेख मुख्यधारा की कवरेज में अक्सर अनदेखा रह जाता है, जबकि यह ज़मीनी स्तर पर गंभीर समस्या है। बिना स्पष्ट समयसीमा और जवाबदेही तंत्र के, ये सिफारिशें केवल इरादों का दस्तावेज़ बनकर रह सकती हैं।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनसीडब्ल्यू ने मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों पर क्या रिपोर्ट सौंपी है?
राष्ट्रीय महिला आयोग ने 'भारत में मुस्लिम महिलाओं के अधिकार' विषय पर एक विस्तृत सिफारिशी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी है। यह रिपोर्ट गृह मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय को भेजी गई है, जिसमें पर्सनल लॉ सुधार से लेकर महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा तक कई सिफारिशें हैं।
एनसीडब्ल्यू की रिपोर्ट में कौन-कौन सी प्रमुख सिफारिशें हैं?
रिपोर्ट में मुस्लिम पर्सनल लॉ पर व्यापक कानून, शादी का अनिवार्य पंजीकरण, बाल विवाह पर रोक और तलाक प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाने की सिफारिश है। इसके अलावा मेहर और वैवाहिक संपत्ति पर अधिकार मज़बूत करने, बच्चों की कस्टडी को उनके हित के आधार पर तय करने और 'पारो सिस्टम' जैसी शोषणकारी प्रथाओं पर तत्काल कार्रवाई की भी माँग की गई है।
यह रिपोर्ट कैसे तैयार की गई?
1 अगस्त 2025 को नई दिल्ली में एनसीडब्ल्यू ने एक राष्ट्रीय राउंड टेबल चर्चा आयोजित की थी। इसमें केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री, कानूनी विशेषज्ञ, शिक्षाविद, धार्मिक विद्वान और देशभर के नागरिक समाज के प्रतिनिधि शामिल हुए, जिनके सुझावों के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की गई।
रिपोर्ट में किन कानूनों की समीक्षा की गई है?
आयोग ने मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एप्लीकेशन एक्ट 1937, डिसोल्यूशन ऑफ मुस्लिम मैरिज एक्ट 1939, मुस्लिम महिला (तलाक पर अधिकार संरक्षण) अधिनियम 1986 और मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकार संरक्षण) अधिनियम 2019 सहित कई न्यायिक फैसलों का अध्ययन किया।
इन सिफारिशों से मुस्लिम महिलाओं को क्या फायदा होगा?
यदि इन सिफारिशों को लागू किया जाता है, तो मुस्लिम महिलाओं को विवाह, तलाक, संपत्ति और बच्चों की कस्टडी के मामलों में अधिक कानूनी सुरक्षा मिलेगी। बेहतर कानूनी सहायता, हेल्पलाइन और जागरूकता अभियानों से न्याय तक पहुँच आसान होगी, और शोषणकारी प्रथाओं के खिलाफ ठोस कार्रवाई संभव होगी।
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